याद रखिये...........
"हारने वालों का भी अपना रुतबा
होता है,
मलाल वो करें जो दौड़ में शामिल नहीं
होंगे.
"गोंडवाना गणतंत्र पार्टी"
विपर्यय के इस कठिन अँधेरे दौर में क्रान्ति के नये संस्करण की तैयारी के लिए युवा
वर्ग का आह्वान करता है। यह एक नूतन क्रान्तिकारी नवजागरण और प्रबोधन का शंखनाद करता
है। यह नयी क्रान्ति की नेतृत्वकारी शक्ति के निर्माण के लिए, उसकी मार्गदर्शक वैज्ञानिक
जीवनदृष्टि और इतिहासबोध की समझ कायम करने के लिए और भारतीय क्रान्ति के रास्ते की
सही समझदारी कायम करने के उद्देश्य से विचार-विनिमय और बहस-मुबाहसे के लिए आम जनता
के विवेकशील बहादुर युवा सपूतों को आमन्त्रित करता है। "गोंडवाना गणतंत्र पार्टी"
क्रान्ति की आत्मा को जागृत करने की ज़रूरत का अहसास है। यह एक नयी क्रान्तिकारी स्पिरिट
पैदा करने की तड़प की अभिव्यक्ति है। लोग यदि लोहे की दीवारों में कैद नशे की गहरी
नींद सो रहे हैं, तब भी हमें लगातार आवाज़ लगानी ही होगी। नींद में घुट रहे लोगों के
कानों तक लगातार पहुँचती हमारी आवाज़ कभी न कभी उन्हें जगायेगी ही। भूलना नहीं होगा
कि एक चिंगारी सारे जंगल को आग लगा सकती है। "गोंडवाना गणतंत्र पार्टी" ऐसी
ही एक चिंगारी बनने को संकल्पबद्ध है।
ज़िन्दगी के इस दमघोंटू माहौल को बदलने
के लिए तमाम ज़िन्दा लोगों का आह्वान करता है। यह उन सभी का आह्वान करता है जो सही
मायने में नौजवान हैं। जिनमें व्यक्तिगत स्वार्थ, कायरता, दुनियादारी, धन लिप्सा, कैरियरवाद
और पद-ओहदे-हैसियत-मान्यता की गलाकाटू प्रतिस्पर्धा के ख़िलाफ़ लड़ने का माद्दा और
ज़िद है, जिनकी रगों में उष्ण रक्त प्रवाहित हो रहा है। जो न्याय, सौन्दर्य, प्रगति
और शौर्य के पुजारी हैं। "गोंडवाना गणतंत्र पार्टी" जनता की सेवा में लग
जाने के लिए, मेहनतकश अवाम में घुलमिलकर उसकी मुक्ति का परचम थाम लेने के लिए ऐसे ही
नौजवानों का आह्वान करता है। सामाजिक क्रान्तियों की कठिन शुरुआत की चुनौतियों को स्वीकारने
के लिए पहले जनता के बहादुर युवा सपूत ही आगे आते हैं। इतिहास के रथ के पहिए नौजवानों
के उष्ण रक्त से लथपथ हुआ करते हैं।
अंत में दिल की बात.......,
"हुई है जब से मुखालिफ हवा ज़माने
की..!!
मुझे भी जिद्द सी हुई है दिया..जलाने
की..!!
जयस
अनूपपुर
एक कहानी काल्पनिक है लेकिन सच्ची
है अवश्य ही पढिए
हम बहुत बड़े हो गए हैं मगर अब भी
लगता है थोड़े से कच्चे हैं, क्योंकि हमारे
अंदर अभी भी नादानियां हैं क्योंकि हम कभी स्वविवेक से यह निर्णय नहीं कर पाते हैं
कि हमें क्या करना चाहिए, आप सभी परिचित हैं
जब एक पिता के चार बच्चे होते हैं, चारों भाईयों
में बहुत गहरा प्रेम था ,चारों भाई कभी एक दूसरे के सलाह के बगैर कोई भी कार्य नहीं
करते थे मगर एक अनसुने से कहानी जो किसी और ने उनको बारी बारी से सुना दिया , सभी ने
उसको सुना और इतनी गहरी प्रेम भावना के साथ रहने वाले भाईयों में बिना सोचें समझे यह
निर्णय ले लिए और एक दूसरे के साथ बैर द्वेष की भावना पैदा कर लिए अचानक ही उनका फलता
फूलता परिवार सिर्फ दूसरों के कहने पर ध्वस्त हो गया और धन और संपत्ति से सम्पूर्ण
परिवार पल भर में सब कुछ खत्म हो गया ठीक आज
का समय है हमें भी यह सीख लेना पड़ेगा कि कभी भी बिना विचारे परखे विना आपस में चर्चा
किए किसी भी मसले पर शीघ्र निर्णय नहीं लेना चाहिए अन्यथा आज की हमारी स्थिति जो धीरे
धीरे धीरे करके थोड़ा थोड़ा पनप रहा है, अगर
हम धैर्य और साहस के साथ विवेक पूर्ण फैसला नहीं लेते हैं तो हम भी उन चार सम्पन्न
भाइयों के तरह ध्वस्त हो जाएंगे, हमें एकजुटता के साथ ही चलना है विखराव नहीं जुड़ाव
की नीति के आधार पर ही चलना है, इन्हीं अपेक्षाओं
के साथ
सादर सेवा जोहार
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