विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए महाशय/ महाशया कहना चाहते हैं कि इस क्षेत्र में आदिवासी गांव (रुढिगत) में निहित कार्यपालिका ,न्यायपालिका ,विधायिका को मुगलों ने छेड़छाड़ नही की तथा अंग्रेजों ने मान्यता देते हुए इस क्षेत्र को नन रेगुलेटेड एरिया कहा , अर्थात यहां अंग्रेजों का कोई भी कानून सीधे लागू नहीं था जब तक कि राज्यपाल लोक अधिसूचना जारी नहीं करें अर्थात ब्रिटिश की कार्यपालिका, न्यायपालिका ,विधायिका लागू नहीं थी जैसा कि इंपिरियल गैजेटियर आफ इंडिया वॉल्यूम 4 पेज नंबर 384 में कहां गया है
🌷🌻In many
tracts within this area the old complement of village officials still exists,
and, through all are not now embodied in the British system of Administration,
every village has retained a #headman and a #watchman. These officers have been
from ancient times, and are still, through to a somewhat less degree, the
backbone of the police machinery of India. The headman occupied the position of
a police magistrate and the watchman worked under his orders. The latter's
functions are thus graphically described by mountstuart Elphinstone in his
report (1819) on the territories conquered from the Peshwa:- ' His [The
Watchman ]duty are to keep watch at night,
to find out all arrivals and departures , observe all strangers and
report all suspicious person to the Patel【 headman.】
🌻👇सीआरपीसी का छत्तीसगढ़ ,मध्य प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड पर लागू नहीं होना उस समय की विद्यमान विधि(CRPC की जगह deputy commissioner को पावर ) का अभी तक लागू होने के कारण है जिस पर विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए महाशय हम यह कहना चाहते हैं कि अंग्रेजों ने भारत पर 3 तरह का शासन किया तथा सत्ता का हस्तांतरण यानी इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 के सेक्शन 7 a, b, c,
के अनुसार किया।
नोट:- इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 भारत के संविधान के अनुच्छेद 395 के द्वारा तो रिपील होती है परंतु संविधान के अन्य अनुच्छेद के उपबंध अर्थात अनुच्छेद 13 (3) क में लिखित" आदेश (आर्डर)" के अधीन अनुच्छेद 372 (1) के द्वारा सुरक्षित की जाती है। जो कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के सेक्शन 292, 293 तथा इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 के सेक्शन 18 तथा अनुच्छेद 372 के द्वारा सुरक्षित किया जाता है( सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट स्टेट ऑफ नागालैंड वर्सेस रतन सिंह 9 मार्च 1966)

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