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Thursday, February 19, 2026

prabhu eshu masih vachan-युसूफ और पोतीपर की पत्नी

 

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युसूफ और पोतीपर की पत्नी

जब युसूफ मिश्रा में पहुंचाया गया तब पोतीपर नामक एकमिस्त्री ने जो फिरौन का हकीम और अंगरक्षकों का प्रधान था उसको इस्माइलों के हाथ से जो उसे वहां ले गए थे मोड़ लिया यह शुभ अपनेमिस्त्रीस्वामी के घर मेंरहता था और यहोवा उसके संग था इसलिए वह भाग्यवान पुरुष हो गया और यूसुफ के स्वामी ने देखा कि यहोवा उसके संग रहता है और जो काम वह करता है उसको यह हुआ उसके हाथ से सफल कर देता है तब उसकी अनुग्रह की दृष्टि उसे पर हुई और वह उसकी सेवा टहल करने के लिए नियुक्त किया गया फिर उसने उसको अपने घर का अधिकारी बनकर अपना सब कुछ उसके हाथ में सौंप दियाजब से उसने उसको अपने घर का और अपनी सारी संपत्ति का अधिकारी बनाया तब से यह हुआ यह सब के कारण उसेमिस्त्री के घर पर आशीष देने लगा और क्या घर में क्या मैदान में उसका जो कुछ था सब पर यहोवा की आशीष होने लगी इसलिए उसने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहां तक छोड़ दिया कि कुछ यूसुफ के हाथ मेंअपने खाने की रोटी को छोड़ वह अपनी संपत्ति का हाल कुछ न जानता था

यह सब सुंदर और रूपवान था इन बातों की पश्चात ऐसा हुआ कि उसके स्वामी की पत्नीने यीशु की ओर आंख लगाई और कहा मेरे साथ सो पर उसने आशीर्वाद करते हुएअपने स्वामी की पत्नी से कहा सुन जो कुछ इस घर में है मेरे हाथ में है उसे मेरा स्वामी कुछ नहीं जानता और उसने अपना सब कुछ मेरे हाथ में सौंप दिया है इस घर में मुझे बड़ा कोई नहीं और उसने तुझे छोड़ जो उसकी पत्नी है मुझे कुछ नहीं रख छोड़ा इसलिए भला मैं ऐसी बड़ी दुष्ट करके परमेश्वर का अपराधी क्यों बानो और ऐसा हुआ किवह प्रतिदिन युसूफ से बात करती रही पर उसने उसकी न मानी कि उसके पास लेते या उसके संग रहे

एक दिन क्या हुआ कि यीशु अपना कामकाज करने के लिए घर में गया और घर की सेवकों में से कोई भी घर के अंदर ना था तब उसे स्त्री ने उसका वस्त्र पकड़ कर कहा मेरे साथ सो पर वह अपना वस्त्र उसके हाथ में छोड़कर भाग और बाहर निकल गया यह देखकर कि वह अपना वस्त्र मेरे हाथ में छोड़कर बाहर भाग गया उसे स्त्री नेअपनी घर की सेवकों को बुलाकर कहा देखो वहएक एवरी मनुष्य को हमारा तिरस्कार करने की लिए हमारे पास ले आया है वह तो मेरे साथ सोने की मतलब से मेरे पास अंदर आया था और मैं मुझे सर से चिल्ला उठी और मेरी बड़ी चिल्लाहट सुनकर वह अपना वस्त्र मेरे पास छोड़कर भाग और बाहर निकल गया और वह उसका वस्त्र उसकी स्वामीकी घर आने तक अपने पास रख रही तब उसने इस उसे इस प्रकार की बातें कहींवह एवरी दास जिसको तू हमारे पास ले आया है वह मुझे से हंसी करने के लिए मेरे पास आया था और जब मैं मुझे स्वर से चिल्ला उठी तब वह अपना वस्त्र मेरे पास छोड़कर बाहर भाग गया

अपनी पत्नी की यह बातें सुनकर कि तेरे दास ने मुझे ऐसा काम किया यूसुफ के स्वामी का खूब भड़का और यूसुफ की स्वामी ने उसको पकड़ कर बंदी गृह में जहांराजा के कैदी बंद थे डलवा दिया आता है वह उसे बंदी गृह में रहापर यहोवा यूसुफ के संग संग रहा और उसे पर करुणा की और बंदी ग्रह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उसे पर हुई इसलिए बंदी ग्रह के दरोगा ने उन सब मंत्रियों को जो कारागार में थी युसूफकी हाथ में सौंप दिया और जो जो काम हुए वहां करते थे वह उसी की आज्ञा से होता था यह सब के वश में जो कुछ था उसमें से ही बंदी ग्रह के दरोगा को कोई भी वस्तु देखने ना पढ़ती थी क्योंकि यहोवा यूसुफ के साथ था और जो कुछ वह करता था यह हुआ उसकोउसमें सफलता देता था

 

बंधियों के सपनों का अर्थ बताना

इन बातों की पश्चात ऐसा हुआ किमिश्रा के राजा के पिलाने हरे और पकने हर ने अपने स्वामी की विरुद्ध कुछ अपराध किया तबफिरों ने अपने उन दोनों हकीमो अर्थात पिलनेहरों के प्रधान और पकने हारों की प्रधान पर क्रोधित होकर उन्हें कैद कर की अंगरक्षकों के प्रधान के घर की इस बंदी के राह में जहां यह शुभ बंदी था डलवा दिया तब अंगरक्षकों की प्रधान ने उनको यह सुख के हाथ सोप और वह उनकी सेवा टहल करने लगा अतः वे कुछ दिन तक बंदी गृह में रहे मिश्रा के राजा पिलाने हार और पकने हर बंदिग्रही में बंद थे उन दोनों ने एक ही रात में अपने-अपने फोन हर की अनुसार स्वप्न देखा सवेरे जब-जब युसूफ उनके पास अंदर गया तब उन पर उसने जो दृष्टि की तो क्या देखा है कि वह उदास हैं इसलिए उसने फिरौन के उन हाथियों सेजो उसके साथ उसके स्वामी के घर की बंदी के रहे में थे पूछा आज तुम्हारे मुंह क्यों उदास हैं उन्होंने उससे कहा हम दोनों ने स्वप्न देखा हैऔर उनके फल का बताने वाला कोई भी नहीं

यीशु ने उनसे कहा क्या सपनों का फल कहना परमेश्वर का काम नहीं है मुझे अपना अपनासपना बताओतब पिलाने हारुन का प्रधान अपना स्वप्न यूसुफ के योग बताने लगा मैंने स्वप्न में देखा कि मेरे सामने एकडाक लाता है और उसे डकलाता में तीन दलिया हैं और उसमें मानोकलियां लगी है और भी फली और उसके गुच्चो में दाग लगकर पक गईफिरौन का कटोरा मेरे हाथ में था औरमैंने उन देखो को लेकर फिरौन के कठोर में निचोड़ और कटोरी को फिरौन के हाथ में दिया तब यह सूखने उससे कहा इसका फल यह है तीन डोलियों का अर्थ तीन दिन इसलिए अब से 3 दिन के भीतर फिरौन तेरा सिर ऊंचा करेगा और फिर से तेरे पद पर तुझे नियुक्त करेगा और तू पहले की समान फिरौन का पिलाने हर होकर उसका कटोरा उसके हाथ में फिर दिया करेगा अतः जब तेरा भला हो जाएतब मुझे स्मरण करना और मुझ पर कृपा करके फिरौन सेमेरी चर्च चलाना और इस घर से मुझे छुड़ा देना क्योंकि सचमुच इब्राणियों के देश से मुझे चुरा कर लाया गया है और यहां भी मैंने कोई ऐसा काम नहीं किया जिसके कारण मैं इस कारागार में डाला जाऊं

यह देखकर कि उसके स्वप्न का फल अच्छा निकलापकाने हारों के प्रधान ने यहसुख से कहामैं भी सपना देखा है वह यह है मैंने देखा कि मेरे सिर पर सफेद रोटी की तीनटोकरिया हैं और ऊपर की टोकरी में फिरौन के लिए सब प्रकार की पक्की पके वस्तुएं हैं और पक्षी मेरे सिर पर की टोकरी में से उन वस्तुओं को खा रहे हैं यह सूखने कहा इसका फल यह है तीन टोकरियों का अर्थ तीन दिन है अब से तीन दिन के भीतर फिरों तेरा सर कटवा कर तुझे एक वृक्ष पर तंगवा देगा और पक्षी तेरे मांस को नोच नोच कर खाएंगेतीसरे दिन फिरौन का जन्मदिन थाउसने अपने सब कर्मचारियों को भेज दिया और उनमें से पिलाने हारों के प्रधान और पकने हारों के प्रधान दोनों को बंदी ग्रह से निकलवायापिलनेहारों के प्रधान को तो पिलाने हर कीपद पर फिर से नियुक्त किया और वह फिरौन के हाथ में कटोरा देने लगा पर पकाने हारून की प्रधान को उसने तंगवा दिया जैसा कि यह सूखने उनके स्वप्न का फल उनसे कहा था फिर भी पिलानिहारों के प्रधान ने यह सुख को स्मरण न रखा परंतु उसे भूल गया 

 

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206 महात्मा गांधी रोड बेंगलुरु560001

 

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