द बाइबल सोसायटी आफ इंडिया
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जैसा पेड़ वैसा फल
झूठ नदियों से सावधान रहो जो भेद के वश में तुम्हारे पास आते हैं परंतु भीतर से हुए भूखे हर खाने वाले भेड़िए हैंउनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे क्या कटीलीझाड़ियां से अंगूर या कांटों से अंजीर तोड़े जाते हैं इसी प्रकार प्रत्येक अच्छा पेड़ अच्छा फल देता है परंतु निकम्मा पेड़ बड़ा फल देता है अच्छा पेड़ बड़ा फल नहीं दे सकता और ना ही निकम्मा पेड़ अच्छे फल दे सकता है प्रत्येक पेड़ जो अच्छा फल नहीं देता काटा और आग में झोंक दिया जाता है अतः तुमउनके फलों से उन्हें पहचान लोगे प्रत्येक जो मुझे हे प्रभु हे प्रभु कहता है स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा परंतु जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है वही प्रवेश करेगा उसे दिन बहुत लोग मुझे कहेंगे हे प्रभु हे प्रभु क्या हमने तेरे नाम से भविष्यवाणी नहीं की और तेरे नाम से दुष्ट आत्माओं को नहीं निकाला और तेरे नाम से बहुत से आश्चर्य कर नहीं किया तब मैं उनसे स्पष्ट कहूंगा मैं तुमको कभी नहीं जाना है कुकर्मियों मुझसे दूर हटो
इसलिए जो कोई मेरी इन वचनों को सुनकर उन पर चलता है वह उसे बुद्धिमान मनुष्य के समान है जिसे अपना घर चट्टान पर बनाया औरमें मेघ बरसा पानी आई आंधियां चली और उसे घर से टकराई फिर भी वह नहीं गिरा क्योंकि उसकी न्यू चट्टान पर डाली गई थी परंतु जो कोई मेरे इन वचनों को सुनता है और उनका पालन नहीं करता वह उसे मूर्ख के समान है जिसे अपना घर बालू पर बनाया और मेघ वर्षा बाढ़ आई आंधी चली और उसे घर से टकराई तब वह गिर पड़ा और पूर्णता है ध्वस्त हो गया
इसका परिणाम यह हुआ कि जब यीशु यह बातें कह चुका तो भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई क्योंकि वह उन्हें उनके शास्त्रियों के समान नहीं वरन अधिकार सहित उपदेश दे रहा था
कुष्ठ रोगी का शुद्ध किया जाना
जब वह पर्वत सेउतरा तो एक विशाल जनसमूह उसके पीछे चल पड़ा और देखो एक कुष्ठ रोगी उसके पास आया और दंडवत करके उसे कहने लगा है प्रभु यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा और वह कुष्ठ रोग से तुरंत शुभ हो गया और यीशु ने उससे कहा देख किसी से ना कहना परंतु जाकर अपने आप को यादव को दिखा और मूसा के द्वारा निर्धारित भेंट चढ़ा की उन पर साक्षी हो
सूबेदार का विश्वास
और जब उसनेकफन हूं में प्रवेश किया तो एक सूबेदार उसके पास आया और विनती करके खाने लगा है प्रभु मेरा सेवकलकवा का मारा घर में पड़ा हुआ अत्यंत पीड़ा में तड़प रहा है उसने उससे कहा मैं आकर उसे चंगा करूंगा परंतु सूबेदार ने उत्तर दिया है प्रभु मैं इस योग में नहीं कि तू मेरी छत तले आए परंतु केवल वचन कह दे और मेरा सेवक चंदा हो जाएगा क्योंकि मैं भी शासन के अधीन हूं और मेरे अधीन सिपाही हैं जब मैं एक से कहता हूं जा तो वह जाता है और दूसरे सेतो वह आता है और जब अपने दांत से कहता हूं यह कर तो वह करता है जब यीशु ने यह सुन तो संभव किया और अपने पीछे आने वालों से कहा मैं तुमसे सच कहता हूं मैं इसराइलियों के किसी व्यक्तियों में भी ऐसा बड़ा विश्वास नहीं पायामैं तुमसे कहता हूं कि पूर्वऔर पश्चिम से बहुत से लोग आकर इब्राहिम इश्क और याकूब के साथ स्वर्ग के राज्य में भोजन करने बैठेंगे परंतु राज्य केसंतान बाहर अंधकार में फेंक दिए जाएंगे और वहां रोना और दांत पीसना होगा और यीशु ने सूबेदार से कहा जा तेरे विश्वास के अनुसार ही तेरे लिए हो और सेवक उसी क्षण चंदा हो गया
रोगियों की चंगाई
और अब यीशु पतरस के घर आया तो उसकी सास को जोर से पीड़ित बिस्तर पर पड़े देखा उसने उसका हाथ छुए और उसका ज्वार तुरंत उतर गयाऔर वह उठकर उसकी सेवा टहल करने लगी और जब संध्या हुई तो वह बहुत से दुष्ट आत्मग्रस्त लोगों को उसके पास लाइए और उसने वचन मंत्र से ही उन दुष्ट आत्माओं को निकाला और उन सब को चंगा किया जो बीमार थी जिससे कि जो वचन ऐसा या नबी द्वारा कहा गया था वह पूरा हो उसने स्वयंहमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारे रोगों को उठा लिया
यीशु ने जब अपने चारों ओर भीड़ को देखा तो उसे पर जाने का आदेश दिया और किसी शास्त्री ने आकर उससे कहा गुरु जहां कहीं तू जाएगा मैं तेरे पीछे चलूंगा यीशु ने उससे कहा लोमड़ियों की मानदेय और आकाश की पक्षियों की घोसला होते हैं परंतु मनुष्य के पुत्र के लिए सर रखने को भी कहीं स्थान नहीं है उसके चेलों में से किसी ने उससे कहा प्रभु पहले मुझे अनुमति दे कि मैं जाकर अपने पिता को दफन करूं परंतु यीशु ने उससे कहा मेरे पीछेचला और मुर्दों को अपने मुर्दे दफन करने दे
आंधी को शांत करना
जब वह नाव पर चढ़ गया तो उसके चेले उसके पीछे चल पड़े और देखो समुद्र में एक बड़ी आंधी उठी जिससे कि नाम लहरों से ढक गई परंतु वह सो रहा था हुए उसके पास आए और उन्होंने यह कहकर उसे जगाया प्रभु हमें बच्चा हम नाश हुए जाते हैं उसने उनसे कहा है अल्प विश्वासियों तुम इतने भयभीत क्यों हो तब उठकर उसने आंधी और समुद्र को डाटा और पूर्ण शांति छा गई और वहविस्मित होकर कहने लगे यह कैसामनुष्य है की आंधी और समुद्र भी इसकी आज्ञा मानते हैं
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