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Monday, February 16, 2026

प्रभु यीशु मसीह के वचन एदोम के राजा puri vachan padiye aur apna jivan me changai paye

 


एदोम के राजा

फिर जब इसराइलियों पर किसी राजा नेराज्यना किया था तब भी आदम के देश में यह राजा हुए बोर के पुत्र बेल ने दो में राज्य किया और उसकी राजधानी का नाम दिनहमा है बेल के मरने पर वस्त्र निवासी दे रहे का पुत्र युवक उसके स्थान पर राजा हुआ फिर हो श्याम के मरने परमदद का पुत्र हदाद उसके स्थान पर राजा हुआ यह वही है जिसने मेघानियों को आप के देश में मार लिया और उसकी राजधानी का नाम अमित है हद्द के मरने परमसूरी का वासी संभाला उसके स्थान पर राजा हुआ फिर सामला की करने पर साहुल जो महानंद के तट वाले रहो बहुत नगर का था वह उसके स्थान पर राजा हुआ चावल के मरने पर अकबर का पुत्रबाल नान उसकी स्थान पर राजा हुआ अकबर की पुत्र बाल हनुमान के मरने पर हैदर उसके स्थान पर राजा हुआ और उसकी राजधानी का नाम पॉल है और उसकी पत्नी का नाम महेताबिल है जो मैं जहां हद की नातिन और मातृत की बेटी थी ऐसा वंशियों की अधिपतियों के कालों और स्थान के अनुसार उनके नाम यह है टिम्न अधिपति अल्बा अधिपति जेटीईटी अधिपति अहोलीबामा अधिपति एल अधिपति विनोद अधिपति कनज अधिपति विमान अधिपति में विचार अधिपति मग्घियाल अधिपति इरम अधिपति एवं वंशियों ने जो देश अपना कर लिया था उसकी निवास स्थान में उनके यही अधिपति हुए एडोनी जाति कामूल पुरुष एसव है

युसूफ और उसके भाई

याकूब तो कनान देश में रहता था जहां उसका पिता परदेसी होकर रहा था याकूब के वंश का वृतांत यह है यह शुभ 17 वर्ष का होकर अपने भाइयों के संग भेड़ बकरियों को चलाता था और वह लड़का अपने पिता की पत्नी बिल्हा और जुल्का के पुत्रों के संग रहा करता था और उनकी बुराइयों का समाचार अपने पिता के पास पहुंचा था करता था इसराइल अपने सब पुत्रों सेबाढ़ के युसूफ से प्रीति रखता था क्योंकि वह उसकी बुढ़ापे का पुत्र था और उसने उसके लिए एकरंग बिरंगा अंगरखा बनवाया परंतु जब उसके भाइयों ने देखा कि हमारा पिता हम सब भाइयों से अधिक उसी से प्रीति रखता है तब वह उसे बेर करने लगे और उसके साथ ठीक से बात भी नहीं करते थे

यूसुफ ने एक स्वप्न देखा और उसके अपने भाइयों से उसका वर्णन किया तब वह उसे और भी दोस्त ड्रेस दुश्मनी करने लगे उसने उनसे कहा जो स्वप्न में मैंने देखा है उसे सुनो हम लोग खेत में पूरे बढ़ रहे हैं और क्या देखता हूं कि मेरा पूरा उठकर सीधा खड़ा हो गया तब तुम्हारे फूलों ने मेरे फूलोंको चारों तरफ से घेर लिया और उसे दंडवत किया तब उसके भाइयों ने उससे कहा क्या सचमुच तू हमारे ऊपर राज्य करेगा क्या सचमुच तू हम पर प्रभुता करेगा इसलिए वह उसके सपनों और उसकी बातों के कारण उसे और भी अधिक बेर करने लगे फिर उसने एक और स्वप्न देखा और अपने भाइयों से उसका भी यूं वर्णन किया सुनो मैंने एक और सपना देखा है कि सूर्य और चंद्रमा और 11 तारीख मुझे दंडवत कर रहे हैं इस स्वप्न का उसने अपने पिता और भाइयों से वर्णन किया तब उसके पिता ने उसको दांत कर कहा यह कैसा स्वप्न है जो तूने देखा है क्या सचमुच मैं और तेरी माता और तेरे भाई तब जाकर तेरे आगे भूमि पर गिर के दंडवत करेंगे उसके भाई उस डाह करते थे पर उसके पिता ने उसके उसे वचन को स्मरण रखा

यूसुफ का बेचा जाना

उसके भाईअपने पिता की भेड़ बकरियों को चराने के लिए सकीम को गए हैं तब इसराइल ने यूसुफ से कहा तेरे भाई सके ही में भेड़ बकरी चरा रहे होंगे इसलिए जो मैं तुझे उनके पास भेजता हूं उसने उससे कहा जो आजा मैं हाजिर हूं उसने उससे कहा जा अपने भाइयों और भेड़ बकरियों का हाल देख आपकी वे कुशल से तो है फिर मेरे पास समाचार ले आए अतः उसने उसको हेब्रोन की तराई में विदा कर दिया और वह सके में आया और एक मनुष्य ने उसको मैदान में इधर-उधर भटकते हुए प्रकार उससे पूछा तू क्या ढूंढता है उसने कहा मैं अपने भाइयों को ढूंढता हूं कृपया मुझे बता कि वह भेड़ बकरियों को कहां चला रहे हैंउसे मनुष्य ने कहा वह यहां से चले गए हैं और मैंने उनको यह कहते सुना आओ हमदो तन को चलें इसलिए युसूफ अपने भाइयों के पीछे चला और उन्हें दो तन में पाया जब ही उन्होंने उसे दूर से आते देखा तो उसके निकट आने के पहले ही उसे मार डालने का षड्यंत्र रचा और भी आपस में कहने लगे देखो वह स्वप्न देखने वाला रहा है इसलिए आओ हम उसको घाट करके किसी गड्ढे में डाल दें और यह कह देंगे की कोई बनेला पशु उसको खो गया फिर हम देखेंगे कि उसके सपनों का क्या फल होगायह सुनकर रोबेन ने उसको उनके हाथ से बचने के विचार से कहा हम उसकी प्राण से तो ना मारेंगे फिर रुको ने उनसे कहा लहू मत भाव उसको जंगलकि इस फिर रोबेन ने उनसे कहा लघु मत भाव उसको जंगल के इस गड्ढे में डाल दो औरउसे पर हाथ मत उठाओ वह उसको उनके हाथ से छुड़ाकर पिता के पास फिर पहुंचाना चाहता था इसलिए ऐसा हुआ कि जब युसूफ अपने भाइयों के पास पहुंचा तब उन्होंने उसका रंग बिरंगा अंग रखा जिसे वह पहने हुए था उतार लिया और यीशु को उठाकर गड्ढे में डाल दिया वह गड्ढा सुख था और उसमें कुछ जल था

तब वह रोटी खाने बैठ गए और आंखें उठकर क्या देखा कि इस्माइलों का एक दल ऊंट पर सुगंध द्रव्य बालसन और गंधर्व लदे हुए गिल से मिश्र को चला जा रहा हैतब यहूदी ने अपने भाइयों से कहा अपने भाई को घाट करने और उसका खून छिपाने से क्या लाभ होगा आओ हम उसे इस्माइलों के हाथ भेज डालें और अपना हाथ उसे पर ना उठाएं क्योंकि वह हमारा भाई और हमारी ही हड्डी और मांस है और उसके भाइयों ने उसकी बात मान ली तब निभाई व्यापारी उधर से होकर उनके पास पहुंचे अतः यूसुफ के भाइयों नेउसको उसे गड्ढे में से खींच के बाहर निकाला और इस्माइलों के हाथ चांदी के 20 टुकड़ों में भेज दियाऔर भी यूसुफ को मिश्र ले गए

रुबान ने गद्दे पर लौट कर क्या देखा कि यूसुफ गड्ढे में नहीं है इसलिए उसने अपने वस्त्र फाड़े और अपने भाइयों के पास लौटकर कहने लगा लड़का तो नहीं है अब मैं किधर जाऊं तब उन्होंने यूसुफ का अंग रख लिया और एक बकरे को मार के उसके लहू में उसे डुबो दिया और उन्होंने उसे रंग-बिरंगे अंगरखे को अपने पिता के पास भेज कर पहले दिया यह हमको मिला है अतः देखकर पहचान ले कि यह तेरे पुत्र का अंग रखा है कि नहींउसने उसकी पहचान लिया और कहा हां यह मेरे ही पुत्र का अंग रखा है किसी दुष्ट पशु ने उसको खा लिया है निसंदेह युसूफ हार डाला गया है तब याकूब ने अपने वस्त्र फाड़े और कमर में तट लपेटा और अपने पुत्र की लिए बहुत दिनों तक विलाप करता रहा उसकी सब बहु बेटियों ने उसको शांति देने का प्रार्थना किया पर उसको शांति ना मिले और वह यही कहता रहा मैं तो विलाप करता हुआ अपने पुत्र के पास अधुलोक में उतर जाऊंगा किस प्रकार उसका पिता उसके लिए रोता ही रहा इस बीच मेघ योजना यूसुफ को मिस्र में ले जाकर होती पर नमक फिरौन की एक हकीम और अंगरक्षकों के प्रधान के हाथ भेज डाला 

 

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