द बाइबल सोसायटी आफ इंडिया
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बेतल में याकूब को आशीष मिलना
तब परमेश्वर ने याकूब से कहा
यहां से निकलकरबेताल को जा और वही रहे और वहां परमेश्वर के लिए बेदी बना जिसने तुझे
उसे समय दर्शन दिया जब तू अपने भाई ऐसा ओके डर से भाग जाता था तब याकूब ने अपने घराने
से और उन सब से भी जो उसके संग थे कहातुम्हारे बीच में जो प्राय देवता है उन्हें निकाल
फेंका और अपने-अपनेको शुद्ध करो और अपने वस्त्र बदल डालोऔर आओ हम यहां से निकलकर बीटल
को जाएं वहां में परमेश्वर के लिए एक विधि बनाऊंगा जिसने संकट के दिन मेरी सुन ली और
जिस मार्ग से मैं चलता था उसमें मेरे संग रहा इसलिएजीतने पर आए देवता उनके पास थे और
जितने कुंडल उनके कारों में थे उन सबों को उन्होंने याकूब को दियाऔरउसने उनको उसे बंद
वृक्ष के नीचे जो सकें के पास है गढ़ दिया
तब उन्होंने कुछ किया और उनके
चारों ओर के नगर निवासियों के मन में परमेश्वर की ओर से ऐसा भाई समा गया कि उन्होंने
याकूब के पुत्रों का पीछा ना किया या खूब उन सब समेत जो उसके संग थे कारण देश की लूज
नगर को आया वह नगर बीटल भी कहलाता हैवहां उसने एक बेदी बनाई और उसे स्थान का नामएल्बे
तेल रख क्योंकि जब वह अपने भाई के दर से भाग जाता था तब परमेश्वर उसे पर वहीं प्रगट
हुआ था और रिका की दूध पिलाने हरिधे डाबोरा मर गई और बेतल की बांज वृक्ष के निचले भाग
में उसकी मिट्टी दी गई और उसे बस वृक्ष का नाम अलोन भकूट रखा गया
फिर याकूब के पद्दन राम से
आने के पश्चात परमेश्वर ने दूसरी बार उसको दर्शन देकर आशीष थी और परमेश्वर ने उससे
कहा अब तक तेरा नाम याकूब रहा है पर आगे को तेरा नाम याकूब ना रहेगा तो इसराइल कहलाएगा
इस प्रकार उसने इसका नाम याकूब रहा हैतो इसराइल कहलाएगा इस प्रकार उसने उसका नाम इसराइल
रखा फिर परमेश्वर ने उससे कहा मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर हूं तू फूल फल और बड़े और तुझे
एक जाति वरन जातियों की एक मंडली भी उत्पन्न होगी और तेरी वश में राजा उत्पन्न होंगे
और जो देश मैं अब्राहम को इज़हार को दिया है वही देश तुझे देता हूं और तेरे पीछे तेरे
वंश को भी दूंगा तब परमेश्वर उसे स्थान में जहां उसने याकूब सेबातें की उसके पास से
ऊपर चढ़ गया और जिस स्थान में परमेश्वर ने याकूब से बातें की वहां याकूब ने पत्थर का
एक खंभा खड़ा किया और उसे पर अर्घ देकर तेल डाल दिया जहां परमेश्वर ने याकूब से बातें
की उसे स्थान का नाम उसने बेतल रखा
राहेल की मृत्यु
फिर उन्होंने बीटल से पूछ
किया और यह प्रातः थोड़ी ही दूर रह गया था कि राहेल को बच्चा जानने की बड़ी पीड़ा उठने
लगी जब उसकी बड़ी-बड़ी पीड़ा उठती थी तब ढाई ने उससे कहा मत डर अब की भी तेरे बेटा
ही होगा तब ऐसा हुआ कि वह मर गई और प्राण निकलते निकलते उसने उसे बेटे को नाम देना
नहीं रखा पर उसके पिता ने उसका नाम बिन्यामीन रखा यूं राहेल मर गई और यह प्रातः अर्थात
वेतन हम की मार्ग में उसकी मिट्टी दी गई याकूब ने उसकी कब्र पर एक खंभा खड़ा किया राहुल
की कब्र का वह खंबा आज तक बना है फिर इसराइल ने खोज किया और हैदर नमक गम्मत के आगे
बढ़कर अपना तंबू खड़ा किया
याकूब के पुत्र
जब इजराइल उसे देश में बसा
था तब एक दिन ऐसा हुआ कि रुपए ने जाकर अपने पिता की रखोली बिल्हा के साथ कुकर्म किया
और यह बात इसराइल को मालूम हो गई याकूब के 12 पुत्र हुए उनमें से लिया के पुत्र यह
थे अर्थात् याकूब का जेठ रूबेन फिर साइमन लवी यहूदी इस सरकार और जब लोन और राहुल के
पुत्र यह थे अर्थात यह सुख और विन्यामिन और राहेल की राशि बिल्हा के पुत्र यह थे अर्थात्
दान और नफताली और लिया की दासी जिला के पुत्र यह थे अर्थात गढ़ और आशीर्वाद की यही
पुत्र हुए जो उसे पद्दन राम में उत्पन्न हुए
एशाहक की मृत्यु
याकूब मरे में जो करियत अरब
अर्थात हेब्रोन है जहां अब्राहम और एशाहक परदेसी होकर रह रहे थे अपने पिता एशाहक के
पास आया इश्क की आयु 180 वर्ष की हुई और इश्क का प्राण छूट गया और वह मर गया और वह
बुध और पूरी आयु का होकर अपने लोगों में जा मिला और उसके पुत्र ऐसा और याकूब ने उसकी
मिट्टी दी
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