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Friday, February 6, 2026

याकूब ने अपने भाई से छल क्यों किया उसका सपना क्या था

 


याकूब का सपना

याकूब बेशर्मब से निकलकर हरण की ओर चला और उसने किसी स्थान में पहुंचकर रात वहीं बिताने का विचार किया क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था इसलिए उसने उसे स्थान की पत्थरों में से एक पत्थर ले अपना तकिया बना कर रखा और उसी स्थान में सो गया तब उसने स्वप्न में क्या देखा कि एक सीधी पृथ्वी पर खड़ी है और उसका सिर स्वर्ग तक पहुंचता है और परमेश्वर के दूध उसे पर से चढ़ते उतरते हैं और यहोवा उसके ऊपर खड़ा होकर कहता है मैं यहोवा तेरे दादा अब्राहम का परमेश्वर और ईशहांक  का भी परमेश्वर हूं जिस भूमि पर तू लेता है उसे मैं तुझको और तेरे वंश को दूंगा और तेरा वंश भूमि की धूल की किनका के समान बहुत होगा और पश्चिम पूरब उत्तर दक्षिण चारों ओर फैला जाएगा और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कल आशीष पाएंगे और सुन मैं तेरे संग रहूंगा और जहां कहींतू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा और तुझे इस देश में लोटा ले आऊंगा मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा कर लूं तब तकतुझको ना छोडूंगा तब याकूब जाग उठा और कहने लगानिश्चय इस स्थान में यहोवा है और मैं इस बात को जानता था और भाई खाकर उसने कहा यह स्थान क्या ही भयानक हैयह तो परमेश्वर की भवन को छोड़ और कुछ नहीं हो सकता वर्ण यह स्वर्ग का फाटक ही होगा

भर को याकूब उठा और अपने तकिए का पत्थर लेकर उसका खंभा खड़ा किया और उसके श्री पर तेल डाल दिया उसने उसे स्थान का नाम डिटेल रखा पर उसे नगर का नाम पहले लूज था तब याकूब ने यह मन्नत मानी यदि परमेश्वर मेरे संग रहकर इस यात्रा में मेरी रक्षा करें और मुझे खाने के लिए रोटी और पहनने के लिए कपड़ा दे और मैं अपने पिता की घर में कुशलछम से लौट जाऊं तो यह हुआ मेरा परमेश्वर ठहरेगा और यह पत्थरजिसे मैं खंभा खड़ा किया है परमेश्वर का भवन ठहरेगा और जो कुछ तू मुझे दे उसका दसवांश में अवश्य ही तुझे दिया करूंगा

याकूब की लाभांन से भेंट

श्री याकूब ने अपना मार्ग लिया और पुरवियों के देश में आया उसने दृष्टि करके क्या देखा कि मैदान में एक कुआं है और उसके पास भेड़ बकरियों के तीन झुंड बैठे हुए हैं क्योंकि जो पत्थर उसे कुएं के मुंह पर धारा रहता था जिसमें से झुंडों को जल पिलाया जाता था वह भारी था और जब सब झुंड वहां इकट्ठा हो जाते तब चरवाहे उसे पत्थर को कुएं के मुंह पर से लड़का कर भेंट भेड़ बकरियों को पानी पिलाते और फिर पत्थर को कुएं के मुंह पर जैव खाते हो रख देते थे अतः याकूब नेचरवाहों से पूछा है मेरे भाइयों तुम कहां के हो उन्होंने कहा हम हरण के हैं तब उसने उनसे पूछा क्या तुम लाहौरके होते पोते लबान को जानते हो उन्होंने कहा हां हम उसे जानते हैं फिर उसने उनसे पूछा क्या वह कुशल से है उन्होंने कहा हां कुशल से है और वह देख उसकी बेटी राहुल भेड़ बकरियों को लिए हुए चली आती है उसने कहा देखो अभी तो दिन बहुत हैं पशुओं के इकट्ठा होने का समय नहीं इसलिए भेड़ बकरियों को जल पिलाकर फिर ले जाकर चढ़ाव उन्होंने कहा हम अभी ऐसा नहीं कर सकते जब सब झुंड इकट्ठा होते हैं तबपत्थर कुएं के मुंह पर से लुढ़काया जाता है और तब हम भेड़ बकरियों को पानी पिलाते हैं

उनकी यह बातचीत हो ही रही थी कि राहुल जो पशु किरया करती थी अपने पिता की भेड़ बकरियों को लिए हुएए याकूब ने अपने मामा लागू की बेटी राहुल को और उसकी भेड़ बकरियों को देखा तो निकट जाकर कुएं के मुख पर से पत्थर को लड़का या और अपने मामा लग्न की भेड़ बकरियों को पानी पिलाया तब याकूब ने राहुल को चुम्मा और ऊंचे स्वर से रोए और याकूब ने राहुल को बता दिया कि मैं तेरा फर भाई हूं अर्थातरिका का पुत्र हूं तब उसने दौड़ के अपने पिता से कह दिया अपनेभांजे या खूब का समाचार आते ही लगन उसे भेंट करने को थोड़ा और उसको गले लगा कर चुम्मा फिर अपने घर ले आया याकूब ने लवण को अपना सब वृतांत सुनाया तब लवण ने याकूब से कहा तू तो सचमुच मेरी हड्डी और मांस है और याकूब एक महीना भर उसके साथ रहा

 

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