इशाहक और अबीमेलेक
के बीच संधि
तब
अभिलेख अपने मंत्री अजीत और अपने सेनापति पिकोल को संग लेकर गार्डर से उसके पास गया
इशाहक ने उनसे कहा तुमने मुझे बेर करके अपने बीच से निकाल दिया था अब मेरे पास क्यों
आए होउन्होंने कहा हमने तो प्रत्यक्ष देखा है कि यहोवा तेरी साथ रहता है इसलिए हमने
सोचा कि तू तो यहोवा की ओर से धन है अतः हमारे तेरे बीच में शपथ खाई जाए और हम तुझे
इस विषय की भाषा बंदे की जैसे हमनेतुझे नहीं छुआ वरुण तेरे साथ केवल भलाई ही की है
और तुझको कुशल छेम से विदा किया उसके अनुसार तू भी हमसे कोई बुराई ना करेगातब उसने
उनको खोज दिया और उन्होंने खाया पिया सवेरे उन सबों ने तड़के उठकर आपस में शपथ खाई
तब इश्क नहीं उनको विदा किया और वह कुशल छेम सेउसके पास से चले गए उसी दिन इशाहक के
दसों ने आकर अपने उसे होते हुएकुएं का वृतांत सुना के कहा हमको जल का एक सोता मिला
है तब उसने उसका नाम शिव रखा इसी कारण उसे नगर का नाम आज तक बेशर्म पड़ा है
ऐसाव कि विदेशी पत्नियां
जब
ऐसाव
40 वर्ष का हुआ तब उसने हितिवारी की बेटी यह होती और हिंदी अलोन की बेटी वसमत से विवाह
कर लिया और इन स्त्रियों के कारण इस आग और रविका के मन को खेद हुआ
याकूब को आशीर्वाद
मिलना
जब
इशाहक
बूढ़ा हो गया और उसकी आंखें ऐसी धुंधली पड़ गई कि उसको सोचता ना था तब उसने अपने जेथे
पुत्र ईश्व को बुलाकर कहा है मेरे पुत्र उसने कहा क्या आजा उसने कहा सुन मैं तो बूढ़ा
हो गया हूं और नहीं जानता कि मेरी मृत्यु का दिन कब होगा इसलिए अब तू अपना तरकश और
धनुष आदि हथियार लेकर मैदान में जा और मेरे लिएअहीर कर ले ए तब मेरी रुचि के अनुसार
स्वादिष्ट भोजन बनाकर मेरे पास ले आना कि मैं उसे खाकर मरने से पहले तुझे जी भर के
आशीर्वाद दूं
तब
ऐसा अहीरकरने को मैदान में गया जब इश्क पेशाब से यह बात कर रहा था तब रब का सुन रही
थी इसलिए उसने अपने पुत्र याकूब से कहा सुन मैं तेरे पिता को तेरे भाई हिसाब से यह
कहते सुना हैमेरे लिए अहीर करके उसका स्वादिष्ट भोजन बना कि मैं उसे खाकर तुझे यहोवा
के आगे करने से पहले आशीर्वाद इसलिए अब है मेरे पुत्र मेरी सुन और यह आजा मां की बकरियों
की पास जाकर बकरियों के दो अच्छे-अच्छे बच्चे ले ए और मैं तेरे पिता के लिए उसकी रुचि
के अनुसार उनके मांस का स्वादिष्ट भोजन बनाऊंगी तब तू उसको अपने पिता के पास ले जाना
कि वह उसे खाकर मरने से पहले तुझको आशीर्वाद दे याकूब ने अपनी माता री विकास से कहा
सुन मेरा भाई ऐसा हो तोगुरुवार पुरुष है और मैं रूम हैं पुरुष हूं कदाचित मेरे पिता
मुझेटटोलना लगे तो मैं उसकी दृष्टि मेंठग ठहर जाऊंगा और आशीष के बदले साफ ही कमाऊंगा
उसकी माता ने उससे कहा है मेरे पुत्र शसाब तुझ पर नहीं मुझे पर पड़े तू केवल मेरी सुन
और जाकर वे बच्चे मेरे पास ले ए तब याकूब जाकर उनको अपनी माता के पास ले आया और माता
ने उसके पिता की रुचि के अनुसार स्वादिष्ट भोजन बना दिया तब रिबिका ने अपने पहले के
पुत्र ऐसाओं की सुंदर वस्त्र जो उसके पास घर में थे लेकर अपने छोटे पुत्र या खूब को
पहना दिए और बकरियों के बच्चों की खालों को उसके हाथों में और उसके चिकनी गले में लपेट
दिया और वह स्वादिष्ट भोजन और अपनी बनाई हुई रोटी भी उसने अपने पुत्र या खूब के हाथों
में दे दी
तब
वह अपने पिता के पास गया और कहा है मेरे पिता उसने कहा क्या बात है है मेरे पुत्र तू
कौन है याकूब ने अपने पिता से कहा मैं तेरा जेठ पुत्र ऐसा हूं मैं तेरी आज्ञा के अनुसार
किया है इसलिए उठ और बैठकर मेरे अहीर के मांस में से कहा कि तू जी सेमुझे आशीर्वाद
दे इस हक ने अपने पुत्र से कहा है मेरे पुत्र क्या कारण है कि वह तुझे इतनी जल्दी मिल
गया उसने यह उत्तर दिया तेरे परमेश्वर यहोवा नहीं उसको मेरे सामने कर दिया फिर इस हक
ने याकूब से कहा है मेरे पुत्र निकट मैं तुझे टटोलकर जानू कि तू सचमुच मेरा पुत्र ऐसाव
है कि नहीं तभी आपको अपने पिता इशाहक के निकट गया और उसने उसको
टटोलकर कहा बोल तो याकूब का सा है पर हाथ ऐसा हीकैसे जान पड़ते हैं और उसने उसको नहीं
पहचाना क्योंकि उसके हाथ उसके भाईकी सेरविवार थे आता है उसने उसको आशीर्वाद दिया और
उसने पूछा क्या तू सचमुच मेरा पुत्र ऐसाव है उसने कहा हां मैं ही हूं तब उसने कहा भोजन
को मेरे निकट लिया कि मैं अपने पुत्र की अहीर के मांस में से खाकर तुझे जी भर के आशीर्वाद
दूं तब वह उसको उसके निकट ले आया और उसने खाया और वह उसके पास दाग मधु भी लाया और उसने
पियातब उसके पिता इशाहक ने उससे कहा है मेरे पुत्र
निकट आकर मुझे तुम उसने निकट जाकर उसको चुम्मा और उसने उसके वस्त्रो का सुगंध प्रकार
उसको यह आशीर्वाद दिया
देख
मेरे पुत्रकी सुगंध जो ऐसे खेत की सी है जिस पर यहोवा ने आशीष दी होपरमेश्वर तुझे आकाश
से उसे और भूमि की उत्तम से उत्तम उपज और बहुत सा अनाज और नया दाग मधु देराज्य राज्य
के लोग तेरे आधीन हो और देश के लोग तुझे दंडवत करें तू अपने भाइयों का स्वामी हो और
तेरी माता के पुत्र तुझे दंडवत करेंजोतुझे शराब दे वे आप ही श्रापितहो जाए और जो तुझे
आशीर्वाद दे हुए आशीष पेआशीष पे

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