अब्राहम के अन्य का वंशज
तब अब्राहम ने एक और पत्नीब्याह ली जिसका नाम कटोरा था उससेजिमरनजो छान मत ना विज्ञान
इसका और शुभ उत्पन्न हुए और ददन के वश में आसुरीलटूसी और लंबी लोग हुए मैदन के पुत्र हेप है पर हनक आबिदा और एल्डर हुई यह सब कटोरा की संतान हुए इस हाफ को तो अब्राहम ने अपना सब कुछ दिया पर अपनी रखेलियों की पुत्रों को कुछ-कुछ देखकर अपने जीते जी अपने पुत्र इश्के पास से पूर्व देश में भेज दिया
अब्राहम की मृत्यु
अब्राहम की सारी आयु 175 वर्ष की हुई अब्राहम का दीर्घायु होने के कारण अर्थात पूरे बुढ़ापे की अवस्था में प्राण टूट गया और वह अपने लोगों में जा मिला उसके पुत्र इश्क और इस्माइल ने खेती के शहर के पुत्र
अपरों की मरे की समझ वाली भूमि में जोमक दिल की गुफा थी उसकी मिट्टी दी अर्थात जो भूमि अब्राहम ने हितों से मोल ली थी उसी में अब्राहम और उसकी पत्नी सारा दोनों को मिट्टी दी गई अब्राहम के मरने के पश्चात परमेश्वर ने उसके पुत्र इश्क को जोलहराई नमक कुएं के पास रहता था आशीष थी
इस्माइल की वंशावली
अब्राहम का पुत्र स्माइल जो सर की मिस्त्री दासी हजीरा से उत्पन्न हुआ था उसकी यह वंशावली है इस्माइल के पुत्रों के नाम और वंशावली यह है अर्थात स्माइल का जेठ पुत्र फिर केदार अधवेल
दीमशाम हदर टीमा यातुर नफीस और कदम इस्माइल के पुत्र यह ही हुए और इन्हीं के नाम के अनुसार इन गांवों और छावनियों के नाम भी पड़े और यही12 अपने-अपने कुल की प्रधान हुए स्माइल की सारी आयु 137 वर्ष की हुई तब उसके प्राण छूट गए और वह अपने लोगों में जा मिला उसके वंश हबला से सूर्य तक जो मिश्रा के सम्मुख असुर के मार्ग में है बस गए और उनका भाग्य उनके सब भाई बांधों के सम्मुख
इस्माइल के पुत्रों की उत्पत्ति का वर्णन
अब्राहम के पुत्र इश्क की वंशावली यह है अब्राहम से इश्क उत्पन्न हुआ और इश्क ने 40 वर्ष का होकर रब का से जोबदन राम के वासी अरणी की बेटी और हारालवण की बहन थी विवाह कर लिया इस हाफ की पत्नीबंद थी इसलिए उसने उसके निमित्त यहोवा से विनती की और यहोवा ने उसकी विनती सुनी इस प्रकार उसकी पत्नी का गर्भवती हुई लड़के उसके गर्भ में आपस में लिपट की एक दूसरे को करने लगे तब उसने कहा मेरी जो ऐसी ही दशा रहेगी तो मैं कैसे जीवित रहूंगी
और वह यहोवा की इच्छा पूछने को गईतब यहोवा नहीं उससे कहा तेरे गर्भ में दो जातियां हैं और तेरी भूख से निकलते ही दो राज्य के लोग अलग-अलग होंगे और एक राज्य के लोग दूसरे से अधिक समवर्ती होगीऔर बड़ा बेटा छोटा के अधीन होगा जब उसके प्रसव का समय आया तब क्या प्रकट हुआ कि उसके गर्भ में जुड़वा बालक है पहले जो उत्पन्न हुआ वह लाल किला और उसका सारा शरीर कंबल के समान रूम में था इसलिए उसका नाम हिसाब रखा गया पीछे उसका भाई अपने हाथ से ऐसाओं की एड़ी पड़े हुए उत्पन्न हुआ और उसका नाम याकूब रखा गया जब रविका ने उनका जन्म दिया तब इश्क 60 वर्ष का था
ऐसाओं द्वारा पहले महिलाओं का अधिकार भेजना
फिर भी लड़के बढ़ने लगे और ऐसा हो तो बनवासी होकर चतुर शिकार खेलने वाला हो गया पर याकूब सीधा मनुष्य था और तंबू में रहा करता था इस हक ऐसाओं के अहीर का मांस खाया करता था इसलिए मैं उसे प्रीति रखता था पर रितिका याकूब से प्रीति रखती थी
एक दिन याकूब भोजन के लिए कुछ दाल पका रहा था और ऐसा जंगल में थका हुआ आयातब असम ने याकूब से कहा वह जो लाल वस्तु है इस लाल वस्तु में से मुझे कुछ मिला क्योंकि मैं थका हूं इसी कारण उसका नाम एवं भी पड़ा याकूब ने कहा अपना पहला उठा का अधिकार आज मेरे हाथ भेज दे ऐसा होने कहा देख मैंतो अभी करने पर हूं इसलिए पहले बेटे के अधिकार से मेरा क्या लाभ होगा याकूब ने कहा मुझे अभी शपथ का आता है उसने उसे शपथ खाई और अपना पहला उठेगा अधिकार याकूब के हाथ भेज डाला इस पर याकूब ने पेशाब को रोटी और पकाए हुई मशहूर की डाल दी और उसने उसे भाभी लिया और उठकर चला गयायूं या अशोक ने अपना पहला उठा का अधिकार जाना

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