इशहाक के विवाह का वर्णन
अब्राहम अब व्रत हो गया था और उसकी आयु बहुत थी और यहोवा ने सब बातों में उसको आशीष दी थी अब्राहम ने अपने उसे दास से जो उसके घर में पूर्णिया और उसकी सारी संपत्ति पर अधिकारी था कहा अपना हाथ मेरी जान के नीचे रख औरमुझे आकाश और पृथ्वी की परमेश्वर यहोवा की इस विषय में शपथ का की तू मेरे पुत्र के लिए कहानियां की लड़कियों में से जिनके बीच में रहता हूं किसी को ना लेगा परंतु तू मेरे देश में मेरे हीपरिवार के पास जाकर मेरे पुत्र इश्क के लिए एक पत्नी ले आएगादास ने उससे कहा कदाचित वह स्त्री इस देश में मेरे साथआना ना चाहे तो क्या मुझे तेरे पुत्र को उसे देश में जहां से तू आया है ले जाना पड़ेगाअब्राहम ने उससे कहा चौकाश रहे मेरे पुत्रको वहां कभी ना ले जाना स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने मुझे मेरे पिता के घर से और मेरी जन्म भूमि से ले जाकर मुझे शपथ खाई और कहा कि मैं यह देश तेरे वंश को दूंगावहीं अपना दूध तेरे आगे आगे भेजेगा कि तू मेरे पुत्र के लिए वहां से एक स्त्री ले आए परंतु यदि वह स्त्री तेरे साथ आना ना चाहे तब तो तू मेरी इस सफ़र से छूट जाएगा पर मेरेपुत्र को वहां ना ले जाना तब उसे दास ने अपने स्वामी अब्राहम की जान के नीचे अपना हाथ रखकर उसे इस विषय की शपथ खाई
तब वह दास अपने स्वामी केहोठों में से10 ऊंट छांट कर उसके सब उत्तम उत्तम पदार्थ में से कुछ लेकर चला औरमैं सो मोटा मियां में लाहौर के नगर के पास पहुंचा उसने ऊंट को नगर के बाहर एक कुएं के पास बैठाया वह संध्या का समय था जिस समय स्त्रियां जल भरने के लिए निकलती है वह कहने लगा है मेरे स्वामी अब्राहम के परमेश्वरयहोवा आज मेरे कार्य को सिद्ध कर और मेरे स्वामी अब्राहम पर करुणाकर देख मैं जल के इस तोते के पास खड़ा हूं और नगर वासियों की बेटियां जल भरने के लिए निकल आती हैइसलिए ऐसा होने दे कि जिस कन्या से मैं कहूं अपना घड़ा मेरी ओर झुका कि मैं पियूं और वह कह ले पिले पीछे मैंतेरे होठों को भी बुलाऊंगायह वही हो जिसे तूने अपने दास इश्क के लिए ठहराया होइसी रीति से मैं जान लूंगा कीतूने मेरे स्वामी पर करुणा की है
और ऐसा हुआ कि जब वह कहीं रहा था कि रब का और अब्राहम की भाई लाहौर की जनमई मिलकर के पुत्र बटवेल की बेटी थी वह कंधे पर घड़ा लिए हुए आईवह अति सुंदर और कुमारी थी और किसी पुरुष का मुंह ना देखा था वह कुएं में सोते के पासउतर गई और अपना घड़ा भर के फिर ऊपर आई तब वह दास उसे भेंट करने को दंड और कहा अपने घड़े में से थोड़ा पानी मुझे पिला दे उसने कहा है मेरे प्रभु ले पीले और उसने जल्दी से घड़ा उतार कर हाथ में लिए लिए उसको पिला दिया जब वह उसको पीला चुकातब कहा मैं तेरे होठों के लिए भी तब तक पानी भर भर लाऊंगी जब तक हुए पी न चुके तब वह तुरंत अपने घड़े का जलपौधे में से चुड़ैल कर फिर कुएं पर भरने कोदौड़ गई और उसकी सब ऊंट के लिए पानी भर दिया वह पुरुष उसकी और चुपचाप अचंभो के साथ ताकता हुआ यह सोचता था कि यह यहोवा ने मेरी यात्रा को सफल किया है कि नहीं
जब ऊंट पी चुके तब उसे पुरुष ने आधा तोला सोना का एक नाथ निकाल कर उसको दिया और 10 तोले सोने के कंगन उसके हाथों में पहना दिए और पूछा तू किसकी बेटी हैयह मुझको बता क्या तेरे पिता के घर में हमारे टिकने के लिए स्थान है उसने उत्तर दिया मैं तो लाहौर के जन्म में मिल्क के पुत्र बटवेल की बेटी हूं फिर उसने उससे कहा हमारे यहां पावल और चार बहुत है और टिकने के लिए स्थान भी है तब उसे पुरुष नेसर झुकाकर यहोवा को दंडवत करके कहा धन है मेरे स्वामी अब्राहम का परमेश्वर यहोवा जिसने अपनी करुणा और सच्चाई को मेरे स्वामी पर से हटा नहीं दियायहोवा नहींमुझको ठीक मार्ग पर चलकर मेरे स्वामी के भाई बांधों के घर पर पहुंचा दिया हैतब उसे कन्या ने दौड़कर अपनी माता के घर में यह सारावृत्तांत कह सुनाया तब लबान जो रिका का भाई था बाहर कुएं के निकट उसे पुरुष के पास दौड़ गया और ऐसा हुआ कि जब उसने वह नाथ और अपनीबहन रितिका के हाथों में वे कंगन भी अच्छी और उसकी यह बात भी सुनी कि उसे पुरुष ने मुझसे ऐसी बात कही तब वह उसे पुरुष के पास गया और क्या देखा कि वह सौदे के निकट वोटो के पास खड़ा है उसने कहा यह हुआ की ओर से धन्य पुरुष भीतर आ तू क्यों बाहर खड़ा है मैं घर को और ऊंट के लिए भी स्थान तैयार किया है इस पर वह पुरुष घर में गया और लबान ने ऊंट कीकठिया खोलकरउन्हें पावल और चार दिया और उसके और उसके साथियों की पाओ धोने को चल दिया तब अब्राहम के दास के आगे जलपान के लिए कुछ रखा गया पर उसने कहा मैं जब तक अपना प्रयोजन ना कह दूं तब तक पूरी कुछ ना खाऊंगा लबान ने कहा कह दे
तब उसने कहा मैं तो अब्राहम का दास हूं यहोवा ने मेरे स्वामी को बड़ी आशीष दी है इसलिए वह महान पुरुष हो गया है और उसने उसको भेड़ बकरी गाय बैल सोना रूपा दास दासी हूं ऊंट और गधे दिए हैं और मेरे स्वामी की पत्नी सारा के बुढ़ापे में उसे एक पुत्र उत्पन्न हुआ है और उसे पुत्र कीअब्राहम ने अपना सब कुछ दे दिया है मेरे स्वामी ने मुझे यह शपथ खिलाई है मैं उसके पुत्र के लिए कहानियां की लड़कियों में से जिनके देश में वह रहता है कोई स्त्री नहीं लाऊंगा मैं उसके पिता के घर और कल के लोगों के पास जाकर उसके पुत्र के लिए एक स्त्री ले आऊंगा तब मैंने अपने स्वामी से कहा कदाचित वह स्त्री मेरे पीछे ना आए तब उसने मुझसे कहा यहोवा जिसके सामने मैं चला आया हूं वह तेरे संग अपने दूध को भेज कर तेरी यात्रा को सफल करेगा और तू मेरे कल और मेरे पिताके घर आने में से मेरे पुत्र के लिए एक स्त्री लासकेगातू तब ही मेरी इस सफ़र से छूटेगा जब तू मेरे कल के लोगों के पास पहुंचेगा और यदि वे तुझे कोई स्त्री ना दें तो तू मेरी शपथ से छूटेगा इसलिए मैं आज उसे कुएं के निकट आकर कहने लगा है मेरे स्वामी अब्राहम के परमेश्वर यहोवायदि तू मेरी इस यात्रा को सफल करताहो तो देख मैं जल की इस कुएं के निकट खड़ा हूं और ऐसा हो कि जो कुमारी जल भरने के लिए आए और मैं उसे कहूं अपने घड़े में से मुझे थोड़ा पानी पिला देऔर वह मुझसे कहे पीले और मैं तेरेहोठों के पीने के लिए भी पानी भर दूंगी वह स्त्री जोजिसको तूने मेरे स्वामी के पुत्र के लिए ठहराया हैमैं मन ही मन यहकहीं रहा था कि देखो रितिका कंधे पर घड़ा लिए हुए निकल आई फिर वह सोते के पासउतार के भरने लगी मैंने उससे कहा मुझे पिला देऔर उसने जल्दी से अपने खड़े को कंधेकी पर से उतरकर कहा पीले पीछे मैं तेरे होठों को भी पिलाऊंगी इस प्रकारमैंने पी लिया और उसने उठे को भी पिला दिया तब मैंने उससे पूछा तू किसकी बेटी है उसने कहा मैं तो लाहौर के जन्म में मिलकर के पुत्र बुनवेल की बेटी हूं तब मैंने उसे नाक में वह नाथ और उसके हाथों में भी कंगन पहना दिए फिर मैं सर झुका कर यहोवा को दंडवत किया और अपने स्वामी अब्राहम की परमेश्वर यहोवा को धन कहा क्योंकि उसने मुझे ठीक मार्ग से पहुंचा कि मैं अपने स्वामी के पुत्र के लिए उसके कुटुंबियों की पुत्री कोले आऊं इसलिए अब यदि तू मेरे स्वामी के साथ कृपा और सच्चाई का व्यवहार करना चाहते हो तो मुझेकहो मुझसे कह दो ताकि मैं दाहिनी और या बाई और फिर जाऊं
तब लबान और बुटवल ने उत्तर दिया यह बात यहोवा की ओर से हुई है इसलिए हम लोग तुझे ना तो भला कह सकते हैं ना बुरा देखा रवि का तेरे सामने है उसको ले जा और वह यहोवा के वचन के अनुसार तेरे स्वामी के पुत्र की पत्नी हो जाए उनकी यह बात सुनकर अब्राहम के दास ने भूमि पर गिर के यहोवा को दंडवत किया फिर उसे दास ने सोने और रुपए के गहने और वस्त्र निकालकर रितिका को दिए और उसके भाई और माता को भी उसने अनमोल अनमोल वस्तुएं दी तब उसने अपनेसभी जनों समेत भोजन किया और रात वहीं बीते उसने तड़के उठकर कहा मुझको अपने स्वामी के पास जाने के लिए विदा करो रविका के भाई और माता ने कहा कन्या को हमारे पास कुछ दिन अर्थात कम से कम 10 दिन और रहने दो फिर उसके पश्चात वह चली जाएगी उसने उनसे कहा यहोवा ने जो मेरा यात्रा को सफल किया है इसलिए तुम मुझे मत रोको अब मुझे विदा कर दो कि मैं अपने स्वामी के पास जाऊंउन्होंने कहा हम कन्या को बुलाकर पूछते हैं और देखेंगे कि वह क्या कहती है और उन्होंने रितिक को बुलाकर उससे पूछा क्या तू इस मनुष्य के संग जाएगी उसने कहा हां मैं जाऊंगी तब उन्होंने अपनी बहन अरबी का और उसकी ढाई और अब्राहम की दास और उसके साथ ही सबों को विदा किया और उन्होंने अरबिक को आशीर्वाददियाऔर कहा है हमारी बहन तू हजारों लाखों की आधी माता हो और तेरा वंश अपने बेरियों के नगरों का अधिकारी हो तब रवि का अपनी सहेलियों समेत चली और ऊंट पर चढ़ के उसे पुरुष के पीछे होली इस प्रकार व दास रविका को साथ लेकर चल दिया
इस हक जो दक्षिण देश में रहता थालहराई नमक कुएं से होकर चला आता था सांझ के समय वह मैदान में आई ध्यान करने के लिए निकला था और उसने आंखें उठाकर उठ की ऊंट चले आ रहे हैं रविका ने भी आंखें उठाकर इश्क को देखा और देखते ही मूड पर से उत्तर पड़ी तब उसने दास से पूछा जो पुरुष मैदान पर हमसे मिलने को चला आता है सो कौन है दास ने कहा वह तोमेरा स्वामी है तब रवि का ने घूंघट लेकर अपने मुंह को ठप लियादास ने इश्क को अपना संपूर्ण वृतांत सुनाया तब इश्क रितिका को अपनी माता सर के तंबू में ले आया और उसको ब्याह कर उसे प्रेम किया इस प्रकार इश्क को माता की मृत्यु के पश्चात शांति प्राप्त हुई

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