याकूब की संतान
जब यहोवा ने देखा कि लिया अप्रिय हुई तब उसने उसकी को कोली पर राहुल बढ़ रही आता है लिया गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ और उसने यह कहकर उसका नाम रूबेन रखा यहोवा ने मेरे दुख पर दृष्टि की है अब मेरा पति मुझे प्रीति रखेगा फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ तब उसने यह कहा यहसुनकर कि मैं अप्रिय हूं यहोवा ने मुझे यह भी उत्तर दिया इसलिए उसने उसका नाम साइमन रखा फिर वह गर्भवती हुई और उसकी एक पुत्र उत्पन्न हुआ और उसने कहा अब की बार तो मेरा पति मुझसे मिल जाएगा क्योंकि उसे मेरे तीन पुत्र उत्पन्न हुएइसलिए उसका नाम लवी रखा गया और फिर वह गर्भवती हुई और उसकी एक और पुत्र उत्पन्न हुआ और उसने कहा अबकी बार तो मैं यहोवा का धन्यवाद करूंगी इसलिए उसने उसका नाम यहूदी रखा तब उसकी कोख बंद हो गई
जब रहे ने देखा कि याकूब के लिए मुझे कोई संतान नहीं होती तब वह अपनी बहन से डाक करने लगी और याकूब से कहा मुझे भी संतान दे नहीं तो मर जाऊंगी तब याकूब ने रेल से क्रोधित होकर कहा क्या मैं परमेश्वर हूं तेरी कोख तो उसी सेबंद कर रखी है राहुल ने कहा अच्छा मेरी राशि बिल्हा हाजिर है उसी के पास जा वह मेरे घुटनों परजाने की औरउसके द्वारा मेरा भी घर बचेगा तब उसने उसे अपनी दासी बिल्हा को दिया कि वह उसकी पत्नी हो और याकूब उसके पास गया और बिल्हा गर्भवती हुई और याकूब सेउसके एक पुत्र उत्पन्न होगा तब राहुल ने कहा परमेश्वर ने मेरा न्याय झुकाया और मेरी सुनकर मुझे एक पुत्र दिया इसलिए उसने उसका नाम दान रखाराहुल की दासी बिल्हा फिर गर्भवती हुई और याकूब से एक पुत्र और उत्पन्न हुआ तब राहुल ने कहा मैंने अपनी बहन के साथबड़े बाल से लिपटकर मल युद्ध किया और अभी जीत गई अतः उसने उसका नाम नफताली रखा
जब लिया ने देखा कि मैं जलने से रहित हो गई हूं तब उसने अपनी दासी जुल्फा को लेकर याकूब की पत्नी होने के लिए दे दिया और लिया की राशि जुल्का के भी याकूब से एक पुत्र उत्पन्न हुआ तब लिया ने कहा अहो भाग्य इसलिए उसने उसका नाम याद रखा फिर लियाकी दासी जुल्का की याकूब से एक और पुत्र उत्पन्न हुआ तब इंडिया ने कहा मैं धन्य हूं निश्चय स्त्रियां मुझे धन कहेंगे इसलिए उसने उसका नाम अशर रखा
गेहूं की कटनी के दिनों में रूबेन को मैदान में डूडा फल मिले और वह उनको अपनी माता लिया के पासले गया तब राहुल ने लिया से कहा अपने पुत्र के दौड़ा फलों में से कुछ मुझे दे उसने उससे कहातूने जो मेरे पति को ले लिया है क्या यह छोटी बात हैअब क्या तू मेरे पुत्र के दौड़ा फल भी लेना चाहती है राहुल ने कहा अच्छा तेरे पुत्र के दूध फलों के बदले वह आज रात को तेरे संग सोएगा साह को जब याकूब मैदान से आ रहा था तब लिया उसे भेंट करने को निकली और कहा तुझे मेरे ही पास आना होगा क्योंकि मैं अपने पुत्र की दौड़ा फल देकर तुझे सचमुच मोल लिया है तब वह उसे रात को उसी के संग सोया तब पर मैं परमेश्वर ने लिया की सुनी और वह गर्भवती हुई और याकूब से उसके पांचवी पुत्र उत्पन्न हुआ तब लिया ने कहा मैं ने जो अपने पति को अपनी दासी दी इसलिए परमेश्वर ने मुझे मेरी मजदूरी दी है इसलिए उसने कहा उसका नाम इस सरकार रख लिया फिर गर्भवती हुई और याकूब से उसके छतवान पुत्र उत्पन्न हुआ तब लिया ने कहा परमेश्वर ने मुझे अच्छा दान दिया है अब की बार मेरा पति मेरे संग बना रहेगा क्योंकि मेरे उससे छह पुत्र उत्पन्न हो चुके हैं इसलिए उसने उसका नाम जगलून रखा तत्पश्चात उसके एक बेटी भी हुई और उसने उसका नाम दिन रखा परमेश्वर ने राहुल की भी सुधीर और उसकी सुनकर उसकी को खोली इसलिए वह गर्भवती हुई और उसने एक पुत्र को जन्म दिया तब उसने कहा परमेश्वर ने मेरी नाम धराई को दूर कर दिया है इसलिए उसने यह कहकर उसका नाम युसूफ रखा परमेश्वर मुझे एक पुत्र और भी देगा
याकूब और लावान के बीच विवाद
जब राहुल से युसूफ उत्पन्न हुआ तब याकूब ने लवण से कहा मुझे विदा कर कि मैं अपने देश और स्थान को जाऊंमेरी स्त्रियों और मेरे बच्चे जिनके लिए मैं तेरी सेवा की है उन्हें मुझे दे कि मैं चला जाऊं तू तो जानता है कि मैं तेरी कैसी सेवा की है लवण ने उसे कहा यदि तेरी दृष्टि में मैं ने अनुग्रह पाया है तोयही रह जा क्योंकि मैंअनुभव सेजान लिया है कि यहोवा ने तेरे कारण से मुझे आशीष दी है फिर उसने कहा तू ठीक बात की मैं तुझको क्या दूं और मैं उसे दूंगा उसने उसे कहा तू जानता है कि मैं तेरी सेवा कैसे की है और तेरे पशु मेरे पास किस प्रकार रहे मेरे आने से पहले भी कितने थे औरअब कितने हो गए हैं और यहोवा ने मेरे आने पर तुझे आशीष दी है पर मैं अपने घर का काम कब करने पाऊंगा
उसने फिर कहा मैं तुझे क्या दूं याकूब ने कहातू मुझे कुछ ना दे यदि तू मेरे लिए एक काम करें तो मैं फिर तेरी भीड़ बकरियों को चुराऊंगा और उनकी रक्षा करूंगा मैं आज तेरी सब भेड़ बकरियों के बीच होकर निकलूंगा और जो भीभेड़ या बकरी चींटी वाली औरचितकावरी हो और जो भेद काली हो और जो बकरी चितकबरी औरजिद्दी वाली हूं उन्हें मैं अलग कर रखूंगाऔर मेरी मजदूरी में वे ही करेंगे और जब आगे को मेरी मजदूरी की चर्चातेरे सामने चले तब धर्म की यही साक्षी होगी अर्थात बकरियां में से जो कोई ना चिट्ठी वाली ना चितकबरी हो और भेद में से जो कोई काली ना हो यदि मेरे पास निकले तो चोरी की ठहरेगी तब लवण ने कहा तेरे कहने के अनुसार हो अतःउसने उसी दिन सब धारी वाले औरचितकबरी बकरों और सब चिट्ठी वाली और चितकावेरी बकरियों को अर्थात जिनमें कुछउजालापन था उनको और सब काली भेद कोभी अलग करके अपने पुत्र के हाथ में सौंप दिया और उसने अपने और याकूब के बीच मेंतीन दिन के मार्ग काअंतर ठहराया और याकूब लवण की भीड़ बकरियों को चराने लगा
तब याकूब ने चिनार और बादाम और अरमान वर्षों की हरी हरी चिड़िया लेकर उनके चिलके कहीं-कहीं छिलके उन्हें धारीदार बना दिया ऐसी की उन चिड़ियों की सफेदी दिखाई देने लगे तब छुरी हुई झाड़ियां को भेड़ बकरियों के सामने उनके पानी पीने के कत्ल होते में खड़ा किया और जब वह पानी पीने के लिए आए तब लोगों हो गई चिड़ियों के सामने गार्डन होकर भेड़ बकरियां धारी वाले चिट्ठी वाले और चिट खबरें बच्चे जानी तब याकूब ने बीडीओ के बच्चों को अलग-अलग किया और लबान की भेड़ बकरियों के मुख को चिट्ठी वाले और सब काले बच्चों की और कर दिया और अपने झुंडों को उनसे अलग रखा और लवण की भेड़ बकरियों से मिलने ना दिया और जब-जब बलवंत भेड़ बकरियां गभिन्न होतीथी तब वह उन्हें उनके आगे नहीं रखता था उसे निर्बल निर्बल लवण की रही और बलवंत याकूब की हो गई इस प्रकार वह पुरुष अत्यंत धनवान हो गया और उसके बहुत सी भेड़ बकरियां और दासियां और दास और ऊंट और गधे हो गए

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