साथियों कुछ महान आविष्कार है जो केवल भारत में ही हुए है और जिनका उपयोग केवल भारतवासी कर सकते और किसी देश में इनका कोई उपयोग नहीं है:- - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

Breaking

more info click below

Thursday, September 12, 2019

साथियों कुछ महान आविष्कार है जो केवल भारत में ही हुए है और जिनका उपयोग केवल भारतवासी कर सकते और किसी देश में इनका कोई उपयोग नहीं है:-


साथियों कुछ महान आविष्कार है जो केवल भारत में ही हुए है और जिनका उपयोग केवल भारतवासी कर सकते और किसी देश में इनका कोई उपयोग नहीं है:-

. लिंग पूजन का आविष्कार भारत में हुआ।
. योनी पूजन का आविष्कार भारत में हुआ (कामाख्या)
 . लहसून, प्याज खाने से पाप लगता है का आविष्कार भारत में हुआ।
. खीर खिलाकर गर्भवती करने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।
. हवन का केला खिलाकर गर्भवती करने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।
. धरती चीर कर बच्चा पैदा करने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।
. वानर सूरज को आम समझ खा सकता है का आविष्कार भारत में हुआ।
. सूरज को कांख में दबा कर उड़ने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।
. देवी-देवताओं का आविष्कार भारत में हुआ।
१०. गंगा में नहा कर पाप धोने का आविष्कार भारत में हुआ।
११. गाय माता है का आविष्कार भारत में हुआ।
१२. ग्रहों के प्रकोप का आविष्कार भारत में हुआ।
१३.  पूजा पाठ कर भगवान को खुश करने का आविष्कार भारत में हुआ।
१४. हवन से प्रदूषण खत्म होता है का आविष्कार भारत में हुआ।
१५. वर्षा के देवता इंन्द्र देव का आविष्कार भारत में हुआ।
१६. हवन से इंद्र देव को खुश कर बारिश कराने का आविष्कार भारत में हुआ।

१७. मंदिरों में एवं ब्राह्मणों को दान देने से पुण्य प्राप्ति होती है का आविष्कार भारत में हुआ।
१८. मृत व्यक्ति को परलोक में खाना, बिस्तर, पलंग, चप्पल-जुता, रुपया-पैसा, सोना-चांदी आदि श्राद्ध के द्वारा पहुँचाने का आविष्कार भारत में हुआ।
१९. जात-पात का आविष्कार भारत में हुआ।
२०. छोटी जात का मंदिर में प्रवेश मात्र से भगवान अशुद्ध हो जाता है का आविष्कार भारत में हुआ।
२१. देवदासी का निर्माण भारत में हुआ।
२२. पुजारीयों द्वारा देवदासियों के बलात्कारों से उत्पन्न संतान हरिजन होता है का आविष्कार भारत में हुआ।
 २३. बत्तख पानी recycle करती है का आविष्कार भारत में हाल ही में हुआ है।
 4. गाय अॉक्सीजन लेती है और छोड़ती भी अॉक्सीजन ही है का आविष्कार भारत में अभी-अभी हुआ है।
भारत के पंडितों की पोथियों में, मनुस्मृति आदि ग्रंथों में असंख्य आविष्कार लिपिबद्ध हैं।
नदी में  पैसे नहीं डालने चाहिए।क्यों?
आईए जानते हैं-"अर्थव्यवस्था पर भारी आस्था" एक लेख !
हमारे देश में रोज जाने कितनी रेलगाड़ियाँ, जाने कितनी नदियों को पार करती हैं और उनके यात्रियों द्वारा हर रोज नदियों में सिक्के फेंकने का चलन है!
अगर रोज के सिक्कों के हिसाब से गणना की जाए तो ये रकम कम से कम दहाई के चार अंको को तो पार करती होगी।
सोचो इस तरह हर रोज कितनी भारतीय मुद्रा ऐसे फेंक दी जाती है?
इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुँचता होगा, ये तो एक अर्थशास्त्री ही बता सकता। लेकिन एक रसायनज्ञ होने के नाते मैं लोगों को सिक्के की धातु के बारे में इतना अवश्य जागरूक कर सकता हूँ कि वर्तमान सिक्के 83% लोहा और 17 % क्रोमियम के बने होते हैं। और,
क्रोमियम एक भारी जहरीली धातु है।
क्रोमियम दो अवस्था में पाया जाता है, एक Cr (III) और दूसरी Cr (IV) इनमें क्रोमियम (IV) जीव जगत के लिए घातक होता है।अगर इसकी मात्रा 0.05% प्रति लीटर से ज्यादा हो जाए तो ऐसा पानी हमारे लिए जहरीला बन जाता है। जो सीधे कैंसर जैसी असाध्य बीमारी को जन्म देता है।
 सोचो एक नदी जो अपने आप में बहुमूल्य खजाना छुपाए हुए है और हमारे एक-दो रूपये से कैसे उसका भला हो सकता है ?
सिक्के फेंकने का चलन ताँबे के सिक्के के समय था।
प्राचीनकाल में एक बा दूषित पानी से बीमारियाँ फैली थीं तो, राजा ने हर व्यक्ति को अपने आसपास के जल के स्रोत या जलाशयों में ताँबे के सिक्के को फेकना अनिवार्य कर दिया था। क्योंकि ताँबा जल को शुद्ध करने वाली सबसे अच्छी धातु है "
आजकल सिक्के नदी में फेंकने से किसी तरह का उपकार नहीं बल्कि जल प्रदूषण और बीमारियों को बढ़ावा हो रहा है।
इसलिए आस्था के नाम पर भारतीय मुद्रा को हो रहे नुकसान को रोकने की जिम्मेदारी हम सब नागरिकों की है।
 अतः आपसे निवेदन कि इसे आप अपने मित्रों, बच्चों तथा अशिक्षित व्यक्तियों को विशेष रूप से समझाएँ, ताकि अज्ञानतावश गलती हो।
धन्यवाद।
 केंद्रीय जल आयोग भारत सरकार की ओर से राष्ट्रहित एवं जनहित में जारी। जानकारी के लिए इसे शेयर जरूर करें !
tkxks turk tkxks va/kfo’okl ls fudyksa

No comments:

Post a Comment

you have any dauts, Please info me know

more info click

https://herbalraising.com/mxzkiav8?key=843373486cec3902d999f329321b8eb8