इस कारण जिस प्रकार 5वी अनुसूचित राज्य आन्ध्र प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट में डाले गए केस WP CIVIL
no 324/2003 by A. Sadguru Prasad के बाद आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने ट्राईबल एडवाइजरी काउंसिल के सलाह अनुसार सीआरपीसी 1973 का विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों में उनके स्थानीय रूडी प्रथा और अंग्रेजो के द्वारा लागू विधि के अनुसार वर्ष 2004 में, CRPC 1898 sect 1(2) , CRPC 1973 sect 5 के अनुसार किया क्योंकिसुप्रीम कोर्ट के आदेश मैं सीआरपीसी 1973 को पांचवी अनुसूची के पैराग्राफ 5(1) के तहत विस्तार करने का आदेश दिया गया था।
🌷 उसी प्रकार झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश , उड़ीसा में लागू existing
law ट्रीटी Treaty of allahabad, आदिवासियों के कस्टमरी लॉ, रूढ़ि प्रथा, custom
and usage 13(3) क के अनुसार ही CRPC का विस्तार करते हुवे सभी under trial, कोर्ट केस, जेल में विचाराधीन अनु जनजाति कैदी, तथा सजा काट रहे कैदियों को मुक्त करें,
🌷🌻 अतः इस प्रकार संबंधित पुलिस, कलेक्टर तथा संबंधित पदाधिकारियों के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 20, 21, 22
के विरुद्ध कार्य किया जा रहा है। इसलिए महाशय /महाशया से अनुरोध है कि सीआरपीसी 1898 के सेक्शन 1(2),सीआरपीसी 1973 के सेक्शन 5 के अनुरूप स्थानीय विधि( रूढ़ि custom and usage, 13(3) क,) कस्टमरी लॉ के अनुरूप सीआरपीसी का विस्तार छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और उड़ीसा में करें और तत्कालीन फर्जी मुकदमे जो कि विधि के अनुरूप नहीं किए गए हैं, उनकी कार्यवाही रूकवा कर उन्हें मुकदमे से मुक्त कर हिरासत से बाहर निकाले, चूंकि इसमें विधि का सारवान प्रश्न(substancial
question) निहित है तथा इस बाबत जानबूझकर राज्यों, सरकार, पुलिस पदाधिकारी के द्वारा अनुसूचित जनजातियों में उनके विरुद्ध गृह युद्ध की स्थिति पैदा की जा रही है जो कि आईपीसी की धारा के तहत संगीन जुर्म है जिसके जिम्मेदार पिछले 70 साल के राज्यपाल और संबंधित ब्यूरोक्रेट्स है। मुकदमा मुक्त ना करने की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मामला को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे, तथा 1950, 1973
के बाद के सारे मुकदमे जिनमे crpc के तहत कारवाही की गई है उनको मुक्त करने की प्रार्थना माननीय कोर्ट से की जाएगी, साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों , beurocrates , पद मुक्त राज्यपाल पर देशद्रोह का केस लगाने की मांग अदालत से की जाएगी। तथा बाकी संबंधित दस्तावेज अदालत में पेश किए जाएंगे।

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