प्रभु यीशु रचित सुसमाचार
अध्याय निर्गमन भूमिका
निर्गमन नाम का अर्थ- प्रस्थान करनाया चले जाना है यह इजरायल की इतिहास की प्रमुख घटना को दर्शाता
है जिसका वर्णन इस पुस्तक में मिलता है अर्थात इसराइल लोगों का मिश्र से जहां भी दास थे प्रस्थान
करना इस पुस्तक के तीन मुख्य भाग है एक इजरायली लोगों का दशतों से छुटकारा पाना और सिन पर्वत तक
यात्रा कर नादो सीने पर्वत पर परमेश्वर का अपने लोगों से वचन बांधना जिसके द्वारा उन्हें
जीवन व्यतीत करने की नैतिक सामाजिक और धार्मिक नियम प्राप्त हुए तीन इजरायली
लोगों के लिए आराधना करने के स्थान को निर्मित और सुसज्जित करना और यजुर्कों और परमेश्वर की
आराधना से संबंधित नियमों को प्राप्त करना
मुख्यतः इस पुस्तक में यह वर्णित है कि परमेश्वर ने क्या
किया जैसा कि उसने अपने लोगों को दासतु से छुड़ाया और भविष्य की आशा के लिए एक
जाति के रूप में उन्हें संगठित किया इस पुस्तक का प्रमुख मानव पत्र मूसा है जिसे परमेश्वर ने
अपने लोगों को मिश्र से निकले जाने के लिए चुना था इस पुस्तक का सुप्रसिद्ध भाग वे अध्याय में
दी गई 10 आज्ञाओं की सूची है
मिस्र में इसराइलियों की दुर्दशा
इजरायल की पुत्रों के नाम जो अपने-अपने घराने को लेकर याकूब
के साथ मिस्र देश में आए यह हैं रूबेन साइमन लेवे यहूदी हिस्सा कर जब लोन दुनिया
में दान नकली गार्ड और असीर और यूसुफ तो मिश्र में पहले ही आ चुका था याकूब की लूज वश
मेंजो उत्पन्न हुए हुए सब 70 प्राणी थेयह शुभ
और यह शुभ और उसकी सब भाई और उसे पीढ़ी के सब लोग मर मिटेंगे परंतु इजरायल की संतान फूल
में फल में लगी और भी लोग अत्यंत समर्थ ही बनती चले गए और इतना अधिक बढ़ गई कि सारा देश उनसे
भर गया
मिस्र में एक नया राजा गति पर बैठा जो यूसुफ को नहीं जानता
था उसने अपनी प्रजा से कहा देखो इजरायली हमसे गिनती और समर्थ में अधिक बढ़ गए हैं इसलिए आओ हम उनके
साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करें कहीं ऐसा ना हो कि जब वह बहुत बढ़ जाए और यदि संग्राम का समय
आप पड़े तो हमारे बहरियों से मिलकर हमसे लड़े और इस देश से निकल जाए इसलिए
उन्होंने उन पर बेकरी करने वालों को नियुक्त कियाकि वे उन पर भार डाल-डाल कर उनका
दुख दिया करें और उन्होंने फिरौन के लिए पीतम और रामशेष नामक भंडार वाले नगरों को बनाया पर उनको दुख
देते गए तैरते हुए बढ़ती और फैलते चले गए इसलिए वह इसराइलियों से ही अत्यंत डर गए
तो भी मिश्रियों ने इसराइलियों से कठोरता के साथ सेवा करवाई और उनके जीवन को गाड़ी
आईटी और खेती की भांति-भांति की काम की कठिन सेवा से दुखी कर डाला जिस किसी काम में भी उनसे
सेवा करवाते थे उसमें भी कठोरता का व्यवहार करते थे
शिप्रा और बुध नामक दो एवरी भाइयों को मिश्र के राजा
ने आज्ञा दी जब तुम एवरी स्त्रियों को बच्चा उत्पन्न होने के समय प्रसव की
पत्थरों पर बैठी देखो तब यदि बेटा हो तो उसे मार डालना और बेटी हो तो जीवित रहने
देना परंतु वे बधाइयां परमेश्वर का भाई मानती थी इसलिए मिश्र के राजा की आजा ना मन
कर लड़कों को भी जीवित छोड़ देती थीतब मिश्रा के राजा ने उनको बुलवाकर पूछा तुम जो
लड़कों को जीवित छोड़ देती हो तो ऐसा क्यों करती हो भाइयों ने फिरौन को उत्तर दिया
एवरी स्तरीय मिश्री स्त्रियों के समान नहीं है वह ऐसी प्रतिली है कि भाइयों के
पहुंचने से पहले ही उनका बच्चा उत्पन्न हो जाता है इसलिए परमेश्वर ने भाइयों के
साथ भलाई की और वे लोग बढ़कर बहुत शरारती हो गए इसलिए कि भैया परमेश्वर का भाई
मानती थी उसने उनके घर बसाई तब फिरौन ने अपनी सारी प्रजा की लोगों को आजादी
इंद्रियों की जितने बेटी उत्पन्न हो उन सबों को तुम नील नदी में डाल देना और सब
वीडियो को जीवित रहने देना

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