1-अपने परिवार व अपने समाज का बेहतर भविष्य बनाने के लिए निम्न कुरीतियों को त्याग करें।
1.अपने बच्चों के नाम स्वयं रखे
2.शादी की तारीख स्वयं रखे
3.मृत्यु भोज पर रोक लगाए
4.मकान तैयार होने पर स्वयं मुहूर्त करे
5.होली त्यौहार का वहिष्कार करे
6.दशहरे का त्याग करे
7.दीवाली के स्थान पर दीपदान उत्सव मनाये
8.नया सामान लाने पर कोई कोई भी दिन स्वीकारे महूर्त न निकलवाये
9.नशा त्यागे
10.उच्चशिक्षा पर जोर दे
11.बनावट त्यागे
12.मंदिरों का त्याग करें
13.तीर्थ यात्रा त्यागे
14.अन्धविश्वास त्यागे
15.फिजूलखर्ची
से बचे।।
पेट भगवान नहीं भरता भगवान को तो खुद इंसान खिलाता है। इंसान अपनी मेहनत से अपना पेट भरता है मेरे भाई अब तो समझ जाओ जाग जाओ।
2-जबरन कब्जा करा रही पुलिस व भाजपा नेता रोकने पर दलित को जिन्दा जला दिया
मोदी राज में सबसे ज्यादा दलितों व मुस्लिमो पर जुलम किए जा रहे हैं। दलितों को जिंदा जला दिया कानून व्यवस्था चौपट हो गई है
जिस भाई ने यह वीडियो शेयर नहीं किया तो थू है उसकी जिंदगी पर और मैं समझता हूं मेरे हिसाब से इस से घटिया इंसान और कोई नहीं होगा। यह भारत देश है यहां पर गरीबों की नहीं सुनी नहीं जाती
एक गरीब आदिवासी से मैने कहा कि आप लोग बीजेपी को वोट देकर सरकार बना रहे हो। क्या आप लोग नहीं जानते कि बीजेपी देश के संविधान को ख़त्म करना चाहती है। क्या आप लोग नहीं जानते कि देश का संविधान है तो हम लोगों को आरक्षण मिला है, जिससे हमारे समाज के लोग आज नौकरी चाकरी में हैं। नेता मंत्री बन रहे हैं। आगे बढ़ रहे हैं। तब फिर उसने जो जवाब दिया तो मैं फिर निरूत्तर हो गया।
उसने कहा कि मैं जानता हूँ कि बीजेपी सरकार बनाकर संविधान को ख़त्म कर देगी। संविधान खत्म हो गया तो फिर आरक्षण भी खत्म हो जायेगा। फिर जब आरक्षण नहीं रहेगा तो फिर हमारे लोग क्या बाबू,क्या गुरूजी, क्या आईएस,क्या आईपीएस, क्या सरपंच, क्या विधायक और क्या मंत्री बन सकेंगे।
मै तो यही चाहता हूँ कि ऐसा ही हो। इसलिए मैं बीजेपी को वोट देता हूँ। क्योंकि जो लोग आज आरक्षण का लाभ लेकर बाबू,चपरासी,गुरुजी,पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर, कमिश्नर, नेता मंत्री बन गये हैं, वो लोग तो हमको पूछबे नहीं करते हैं।
हम तो वैसे भी ग़रीबी झेल रहे हैं। तंगहाली में जी रहे हैं। खाने के लिए दाना नहीं। रहने के लिये झोपड़ी नहीं। कब हमें नक्सली आके मार जायें, कब पुलिस आके मार जाये। इसका कोई ठिकाना नहीं। हम तो कब मर जायें इसकी कोई गारंटी नहीं है। हमारे लिये संविधान का होना या न होना, आरक्षण का होना या न होना ,इससे हमें क्या फर्क पड़ेगा। फर्क तो उनको पड़ेगा जो आरक्षण का लाभ उठाकर बड़े बड़े पदों पर पहुंच गये और सुविधा भोगी होकर हमारे जैसे लोगों को कीड़े मकोड़े समझते हैं। इसलिए हमको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। संविधान खत्म हो जायेगा तो वो लोग भी हमारे लेवल में आ जायेंगे,
फिर उनको भी गरीबी का एहसास होगा। फिर वो हमारी गरीबी को समझेंगे। फिर हमारे साथ सिस्टम्स से लड़ने में साथ देंगे।
इसलिए मै जानबूझकर बीजेपी को वोट करता हूँ।
अब है कोई जवाब आपके पास।
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