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Wednesday, January 22, 2020

आदिवासी एकता परिषद के 27 वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन की विधिवत शुरुआत "आदिवासी सांस्कृतिक एकता महारैली"


14 जनवरी, 2020

     आदिवासी एकता परिषद के 27 वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन की विधिवत शुरुआत "आदिवासी सांस्कृतिक एकता महारैली" के रूप में हुई जो आर्यन ग्राउंड से प्रारंभ हुई और हुतात्मा चौक (पांच बत्ती चौक) पर पुजा अर्चना करके बिरसा मुंडा चौक पर पुजा कर महासम्मेलन स्थल सिड़को मैदान, कोलगांव पहुची । इस महारैली में देशभर से आए हुए लाखों कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक  वेशभूषा धारण कर पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ नाचते गाते हुए आदिवासी एकता-जिंदाबाद-2 भारत देश के आदिवासी एक हो-एक हो-2, दुनिया के आदिवासी एक हो-एक हो-2, प्रकृति की रक्षा कौन करेगा-हम करेंगे-2, जल जंगल जमीन कुणिन छे-आमरी छे-2, आदि गगनभेदी नारे लगाते हुए महारैली की शोभा बढ़ा रहे थे । जैसे ही महारैली सम्मेलन स्थल के प्रवेश द्वार पर पहुंची आदिवासी युवतियों ने अनाज से भरी टोकनियों से महारैली का स्वागत किया । इस प्रकार महारैली प्रवेश द्वार से होकर धीरे-धीरे पांडाल में प्रवेश किया । पूरा पांडाल  आदिवासी पारंपरिक वाद्ययंत्र की धून व गगनभेदी नारों से गूंज उठा । पूरी रैली जब पंडाल में प्रवेश कर चुकी तब सारे वाद्य यंत्र बंद करवा कर अध्यक्ष मंडल  के सदस्यों की उपस्थिति में स्थानीय पुजारियों द्वारा प्रकृति, पूर्वज  एवं  आदिवासी समाज के महान क्रांतिकारी शहीदों  व महापुरुषों की आदिवासी परंपरा अनुसार पूजा अर्चना  की गई एवं  धरती वंदना  "नाई भूलजी आमू  नाई भूलजी  इयू धरती याहकिले नाई भूलजी".....  सामूहिक रूप से  गाया गया ।  तत्पश्चात अतिथियों को मंच पर बुलाया गया जिसमें सर्वप्रथम आदिवासी एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष आप कालूराम धोदडे़ जी, आदिवासी एकता परिषद के अध्यक्ष भूपेंद्र भाई चौधरी जी, आदिवासी एकता परिषद के महासचिव अशोक भाई चौधरी जी, अध्यक्ष मंडल के सभी सदस्य वाहरू सोनवाने, डोंगर भाऊ बागुल, रेखा ताई पाड़वी, दरबार दादा पाड़वी, राजू पांढरा, गजानंद ब्राह्मणे, शंकर भाई तड़वला, शिवभानुसिंह मंडलोई, पोलाल खर्,ते साधना बहन मीणा, मोगजी भाई भगोरा, जीवराज जी डामोर, अमरसिंह भाई चौधरी-संस्थापक अध्यक्ष, आदिवासी समन्वय मंच भारत, डॉ शांतिकर वसावा, प्रभु भाई टोकिया, माननीय ओमकारसिंह मरकाम जी, कैबिनेट मंत्री, आदिम जाति कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश शासन, स्थानीय सांसद माननीय राजेंद्र गावित जी, श्रीनिवास वनगा  विधायक- पालघर, सुनील भुसारा, विधायक- विक्रमगढ़, राजेश पाटिल, विधायक-बोईसर , पद्माकर वलवी, पूर्व आदिवासी विकास मंत्री, महाराष्ट्र सरकार,  महेश भाई वसावा, विधायक- डेडियापाडा(गुजरात), आनंद भाई चौधरी विधायक -मांडवी गुजरात, नेपाल के पूर्व सांसद  उरांव जी, यूनाइटेड नेशन परमानेंट फोरम ऑन इंडिजिनियस इश्यूज के उपाध्यक्ष आप फूलमान चौधरी जी, अन्ना बेले भाषाविद् अमेरिका, बेंजामिन न्यूजीलैंड, निकोलस जी बारला, राष्ट्रीय संयोजक- आदिवासी समन्वय मंच, भारत, पोम्पी होजांगा -आसाम, स्टालिन एनजीटी -आशाम, कुमार चंद्र मार्डी -झारखंड, डॉ अभय खाका- दिल्ली, एडवोकेट पापाराव -तेलंगाना, रमेश तावड़कर पूर्व कैबिनेट मंत्री -गोवा सरकार, जादव पाहान -अंडमान निकोबार, मुकेश बेरवा -झारखंड आदि इन सभी की उपस्थिति में महासम्मेलन के अध्यक्ष बाबलू भाई निकोडि़या जी नियुक्त किया गया । वर्तमान अध्यक्ष भूपेंद्र भाई चौधरी गुजरात द्वारा महा सम्मेलन के अध्यक्ष का पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया । इसी बीच महासम्मेलन के मुख्य अतिथि महामहिम सुश्री अनुसुइया उईके जी का पूरे काफिले के साथ पांडाल में आगमन हुआ पांडाल में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत अभिवादन किया । उन्हें ससम्मान मंचासीन करवाया गया । जैसे ही महामहिम मंच पर उपस्थित हुए प्रोटोकॉल के हिसाब से राष्ट्रगान की धुन बजाई गई । तत्पश्चात महासम्मेलन की थीम "आदिवासियत" का अनावरण अतिथियों द्वारा किया गया । महामहिम राज्यपाल को मंच के सामने यथा स्थान पर बिठाया गया और महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा नगर हवेली, राजस्थान के प्रमुख कार्यकर्ताओं को मंच पर बुलाया गया और मध्य प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने अपने राज्य के कुछ ही कार्यकर्ताओं को प्रतीक स्वरूप मंच पर बुलाया ताकि समय बचाया जा सके तथा सभी कार्यकर्ताओं का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत अभिवादन करने के पश्चात सभी मंचासीन अतिथियों को ससम्मान पांडाल में मंच के सामने अपना अपना स्थान ग्रहण करने हेतु निवेदन किया गया । महा सम्मेलन की थीम "आदिवासियत" का विस्तृत विवरण महान चित्रकार गोसा पेंटर जी द्वारा प्रस्तुत किया गया । महासम्मेलन का स्वागत भाषण एडवोकेट मीना धोदडे़ जी द्वारा दिया गया । महासम्मेलन की प्रस्तावना आदिवासी एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष कालूराम धोदडे़ जी द्वारा रखी गई । मध्य प्रदेश शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग के मंत्री ओमकार सिंह मरकाम जी ने संभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज को  जितना जल्दी हो सके एकता के सूत्र में बंधने की आवश्यकता है आदिवासी एकता परिषद द्वारा यह कार्य पिछले 27 वर्षों से किया जा रहा है वह वास्तव में प्रशंसनीय है । स्थानीय सांसद आप राजेंद्र गावित जी ने देशभर से आये हुए आदिवासी समाज के कार्यकर्ताओं एवं अन्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सभा को संबोधित किया । आप फुलमान चौधरी जी, उपाध्यक्ष- यूनाइटेड नेशंस परमानेंट फोरम ऑन इंडिजिनियस पीपल ईशुज  ने अपने उद्बोधन में  दुनिया के आदिवासियों को एक होने की बात कही  और भारत देश के आदिवासियों की समस्याओं को  संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे  मंच पर रखने की बात कही । आप अशोक भाई चौधरी जी, महासचिव -आदिवासी एकता परिषद ने आदिवासी एकता परिषद की भूमिका पर विस्तृत रुप से प्रकाश डाला । महा सम्मेलन के मुख्य अतिथि महामहिम सुश्री अनुसिया उईके जी ने सभा को संबोधित करते हुए आदिवासियों के संवैधानिक प्रावधान जिसमें विशेष रूप से पांचवी व छठवीं अनुसूची, पेसा कानून 1996, वनाधिकार मान्यता कानून 2006 व आदिवासी संस्कृति व उसके मूल्य आदि प्रमुख बातों पर जोर दिया । उन्होंने अपने उद्बोधन में यह भी कहा कि आदिवासी सलाहकार परिषद का अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री ना होकर आदिवासी व्यक्ति को ही बनाया जाना चाहिए । अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन जो गैर आदिवासियों ने गलत ढंग से ले ली गई है उसका सर्वे होना चाहिए । आदिवासियों को अपने पारंपरिक एवं संवैधानिक हक लेने के लिए संगठित होने की आवश्यकता है । संगठित होने के अलावा आदिवासियों के पास में कोई भी विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है । उद्घाटन सत्र का आभार पोरलाल खर्ते, मध्य प्रदेश द्वारा किया गया । प्रोटोकॉल के अनुसार पुनः राष्ट्रगान की धुन बजाई गई और महामहिम राज्यपाल महोदय महासम्मेलन से प्रस्थान कर गए ।
       
     आदिवासी एकता परिषद द्वारा मुख्य रूप से पांच राज्य राजस्थान, गुजरात, दादरा नगर हवेली, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में कार्य किया जा रहा है । इन राज्यों का वार्षिक प्रतिवेदन रखा गया । जिसमें मध्य प्रदेश-  आप गजानन ब्राह्मणे, प्रदेश अध्यक्ष- आदिवासी एकता परिषद एवं सदस्य अध्यक्ष मंडल आदिवासी एकता परिषद, राजस्थान- नारायण रोत, गुजरात -डॉ शांतिकर वसावा, दादरा नगर हवेली -विनय कुंवरा, महाराष्ट्र- अशोक बागुल ने अपने अपने राज्य का प्रतिवेदन विस्तृत रूप से रखा ।

प्रबोधन सत्र :-
      
       प्रबोधन सत्र में निम्नलिखित विषयों पर वक्ताओं द्वारा प्रकाश डाला गया :- आदिवासी संस्कृति एवं संगठित धर्म का प्रभाव,
आदिवासी महिलाओं की समस्याएं एवं समाधान, आदिवासी स्वावलंबन, अर्थव्यवस्था एवं प्रकृति संतुलन, मुख्यधारा का विकास एवं पर्याय, आदिवासी स्वशासन, संवैधानिक अधिकार, अंतरराष्ट्रीय आदिवासी अधिकार एवं मानवाधिकार, आदिवासी एकता परिषद का घोषणा पत्र एवं शोषण मुक्ति आंदोलन, आदिवासी शिक्षा व स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आदिवासी जीवन में उसका समाधान, आदिवासियों के संवैधानिक प्रावधान -पांचवी अनुसूची, वनाधिकार मान्यता कानून, पेसा कानून आदि विषयों पर वक्ताओं ने अपना वक्तव्य दिया ।
        जिसमें प्रमुख रूप से शंकर भाई तड़कला-सदस्य अध्यक्ष मंडल, आदिवासी एकता परिषद मध्य प्रदेश, वाहरु सोनवाणे- संस्थापक सदस्य एवं सदस्य अध्यक्ष मंडल-आदिवासी एकता परिषद, भूपेंद्र भाई चौधरी सदस्य अध्यक्ष मंडल -आदिवासी एकता परिषद, एडवोकेट पापाराव- तेलंगाना, मुकेश बिरवा-झारखंड, जादव पाहान-अंडमान निकोबार, अरविंद उरांव-झारखंड, उपासु गांवकर -गोवा, सुदर्शन भूमिज- झारखंड, पोम्पी होजांग-आसाम, अन्ना बेले, भाषाविद-अमेरिका, बेंजामिन जी -न्यूजीलैंड, जगत बहादुर बराम-नेपाल, डॉ अभय खाखा- जेएनयू दिल्ली,अरविन्द जी छत्तीसगढ़,राजम्मा आन्ध्रा प्रदेश,बिरेंन्द्र भगत जी झारखण्ड तथा जेएनयु, हैदराबाद व दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को मंच पर बुलाकर उनका परिचय करवाया गया और उनके द्वारा पश्चिम भारत के विद्यार्थियों को इन विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु आने का आह्वान किया गया साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया की उनके द्वारा इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश संबंधी सभी जानकारी एवं आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा । बीच-बीच में आदिवासी आंदोलन पर आधारित गीतों की प्रस्तुति भी दी गई जिसमें प्रमुख रूप से जगनभाई-गुजरात, दामू ठाकरे महाराष्ट्र व सृष्टि वसावा गुजरात आदि थे ।

       शाम को महासम्मेलन के प्रस्ताव जो जलवायु परिवर्तन,ग्लोबल वार्मिंग, आदिवासियों के संवैधानिक प्रावधान, बड़ी बड़ी परियोजनाओं से आदिवासियों का विस्थापन पर रोक, आदिवासी बोली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना व उन्हें आदिवासी विश्वविद्यालय में भाषा, कला, इतिहास, ज्ञान के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करना, देश के आदिवासियों पर गलत हो झूठे मुकदमे वापस लेने, आदिवासी सलाहकार परिषद का अध्यक्ष आदिवासी व्यक्ति को ही बनाया जाए, गैर आदिवासी पुरुष द्वारा आदिवासी महिलाओं से शादी करने पर आदिवासी महिला होने के नाते मिलने वाले समस्त पारंपरिक एवं संवैधानिक लाभ से वंचित करना, भारतीय संविधान में अनुसूचित जनजाति शब्द के स्थान पर आदिवासी शब्द को शामिल करना, स्टेचू ऑफ़ यूनिटी एरिया डेवलपमेंट ट्यूरिज्म  गवर्नेंस को तत्काल निरस्त करने, आदिवासियों के आस्था के स्थानों का संरक्षण, आदिवासी सांस्कृतिक भवनों का निर्माण, बैकलॉग पदों की भर्ती, जनगणना में आदिवासियों का अलग कालम स्थापित करना, सीएए एवं एनआरसी को संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार पांचवी अनुसूची को भी बाहर रखना आदि प्रस्ताव लाखों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में  सर्वसम्मति से पारित किए गए । अंत में आदिवासी एकता परिषद के महासचिव अशोक भाई चौधरी जी द्वारा दिनभर की चर्चाओं का सारांश प्रस्तुत किया गया और महासम्मेलन के अध्यक्ष बाबलू भाई निकोडि़या जी का अध्यक्षीय जी भाषण किया गया । संचालन डॉ महेश मोरे, सुनील गायकवाड़, रामचंद्र सांबरे, संदीप मेघान जी द्वारा किया गया ।

आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम

       आदिवासी एकता परिषद द्वारा आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु प्रतिवर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है रात्रि 10:00 बजे से आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ धरती वंदना से किया गया । आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से लगभग 40 सांस्कृतिक दलों द्वारा अपनी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई । सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच में आदिवासियों बचाओ यात्रा 2020 में अपना पूरा समय देने वाले कार्यकर्ता एवं मध्य प्रदेश के प्रमुख कार्यकर्ताओं को मंच पर बुलाकर उनका स्वागत अभिवादन किया गया । सांस्कृतिक कार्यक्रम में विशेष उल्लेखनीय असम का बिहू नृत्य, महाराष्ट्र का तारपा नृत्य, देव नृत्य गुजरात, डांग नृत्य आह्वा सापुतारा, गुजरात, डांडिया नृत्य होशंगाबाद मध्य प्रदेश, गवरी नृत्य, नाटक इंडिया कंपनी आधारशिला शिक्षण केंद्र सागड़ जिला बड़वानी मध्य प्रदेश का नाटक "खरनाथा बुल्यन नाथ पैराय देदा" आदि ने दर्शकों का मन मोहा । बीच-बीच में मधुर गीतों की प्रस्तुतियां भी हुई जिसमें चंपालाल बडोले मध्यप्रदेश, शरद दिव्या अहमदनगर महाराष्ट्र आदि थे । सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन नीता काटकर महाराष्ट्र, संदीप मेघान, महाराष्ट्र, नक्ताराम भील राजस्थान, सुनील गायकवाड महाराष्ट्र, लालसिंह गामित गुजरात, विरल कोकणी गुजरात, अनिल रावत मध्यप्रदेश सुभाष पटेल मध्य प्रदेश आदि के द्वारा किया गया ।

 15 जनवरी 2020

संगठन सत्र

       आदिवासी एकता परिषद एक वैचारिक आंदोलन हैं जो आदिवासी विचारधारा अर्थात दुनिया की मूल विचारधारा का प्रचार प्रसार कर दुनिया में पुनः मानवीयता व इंसानियत स्थापित करने तथा इंसान इंसान, जीव जंतु व प्रकृति के प्रति संवेदना जगे, इस हेतु विगत 27 वर्षों निरंतर प्रयासरत हैं । इस विचारधारा के साथ देश के आदिवासियों के अनेक संगठन व संस्थाएं जुड़कर कार्य करते हैं । अतः उनके सुझाव व साल भर के कार्य नियोजन हेतु संगठन सत्र का आयोजन किया जाता है । संगठन सत्र में आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) मध्य प्रदेश द्वारा बनाए गए "आदिवासी कैलेंडर" का विमोचन आदिवासी एकता परिषद के महासचिव अशोक भाई चौधरी जी एवं अध्यक्ष मंडल के सदस्यों तथा आकास के कार्यकारी अध्यक्ष धूमसिंह चौहान जी, डिप्टी कमिश्नर, राज्य कर द्वारा किया गया । संगठन सत्र में कई कार्यकर्ताओं ने बात रखी । इसमें प्रमुख रूप से एडवोकेट अभिजीत वसावा- महाराष्ट्र, राजेंद्र बारिया जी, महासचिव-आदिवासी एकता परिषद, मध्य प्रदेश, सुनील गायकवाड, संयोजक -आदिवासी एकता परिषद, महाराष्ट्र, भगवान वलवी, महाराष्ट्र,संदीप वसावा गुजरात, कस्तूरी बहन गुजरात, केरम जमरा, मध्य प्रदेश, हलजी चौधरी, गुजरात, दामू ठाकरे महाराष्ट्र, लक्ष्मी सोलंकी  मध्य प्रदेश, जसवंत भाई लाइनमैन मध्यप्रदेश, जोरावर पारगी राजस्थान, सूरजलाल जी डामोर मध्यप्रदेश, प्रभु भाई टोकिया दादरा नगर हवेली, महेंद्र भाई वलवी महाराष्ट्र, एडवोकेट पापारावजी तेलंगाना, चंपालाल बडोले मध्य प्रदेश, रमेश चौहान मध्य प्रदेश, दुर्गाशंकर मीणा राजस्थान, प्रोफेसर विपिन जोजो,TSI,मुंबई, ल्युक मेंडिज महाराष्ट्र, डॉक्टर जितेंद्र वसावा गुजरात आदि ने अपने अपने अनुभव के साथ सुझाव रखे । जिसका सारांश अशोक भाई चौधरी महासचिव आदिवासी एकता परिषद द्वारा रखा गया । संचालन डा महेश मोरे (महाराष्ट्र) व चंपालाल बडो़ले जी (मध्य प्रदेश) द्वारा किया गया ।

समापन सत्र

समापन सत्र में महाराष्ट्र राज्य के पालघर जिले के स्थानीय कार्यकर्ताओं जिन्होंने महा सम्मेलन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई उन सभी समितियों के प्रमुख व सदस्यों मंच पर बुलाया गया उनका स्वागत अभिनंदन किया गया तथा कालूराम धोदडे़ जी द्वारा देश भर से आए हुए तमाम कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया और आदिवासी एकता परिषद की की ओर से ओर पोरलाल खर्ते मध्य प्रदेश द्वारा आभार व्यक्त किया गया । अंत में स्थानीय पारंपरिक वाद्य यंत्र की धुन पर नृत्य किया गया । महासम्मेलन का समापन की घोषणा की गई । महा सम्मेलन में  स्वयंसेवक  की भूमिका निभाने हेतु  प्रतिवर्ष अनुसार मध्यप्रदेश से आदिवासी छात्र संगठन (ACS),मध्य प्रदेश के  200  कार्यकर्ता एवं  अन्य राज्यों से भी  सैकड़ों  नौजवान कार्यकर्ता उपस्थित होकर महासम्मेलन में बैठक व्यवस्था , पानी  तथा भोजन जैसे महत्वपूर्ण  स्थान पर  सेवाएं दी गई । चक्रीय क्रम के अनुसार अगला महासम्मेलन मध्यप्रदेश राज्य में होना है किंतु मध्य प्रदेश राज्य के कार्यकर्ताओं ने मंच से कहा कि महासम्मेलन को पांच राज्य को छोड़कर अन्य कोई राज्य करना चाहता है तो हम देने के लिए तैयार है । इसके लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है । यदि कोई राज्य सामने नहीं आता है तो यह महा सम्मेलन मध्य प्रदेश राज्य में ही  होगा । इस ऐतिहासिक महा सम्मेलन को सफल बनाने में जिन जिन कार्यकर्ताओं ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपनी अहम भूमिका निभाई है उनका हम तहे दिल से शुक्रिया अदा एवं आभार व्यक्त करते हैं ।

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