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Friday, October 4, 2019

अनुसूचित क्षेत्रो में पारम्परिक रूढ़िगत ग्रामसभा अति आवश्यक क्यों है जानिये ? राम लक्ष्मण नहीं.....अम्बेडकर चाहिए।


अनुसूचित क्षेत्रो में पारम्परिक रूढ़िगत ग्रामसभा अति आवश्यक क्यों है जानिये ?
राम लक्ष्मण नहीं.....अम्बेडकर चाहिए।

मनुस्मृति नहीं.....संविधान चाहिए।
धर्म नहीं.....अधिकार चाहिए।
मन्दिर नहीं.....स्कूल चाहिए।
भगवान नहीं.....विज्ञान चाहिए।
भाषण नहीं.....रोजगार चाहिए।
पूंजीवाद नहीं.....समाजवाद चाहिए।
धर्मतन्त्र नहीं.....लोकतंत्र चाहिए।
असमानता नहीं.....समानता चाहिए।
अनेकता नहीं......एकता चाहिए।
अन्याय नहीं.....न्याय चाहिए।
भीख नहीं.....हक चाहिए।
गुलामी नहीं.....आज़ादी चाहिए।
जय भीम जय संविधान जय मूलनिवासी।
आगे भेजो ताकी लोग जागरूक हो।

              आदिवासी समाज में प्रचलित रूढ़ि एवं प्रथा (Customary law) को भारतीय संविधान में विधि की मान्यता प्रदान की गई है। संविधान के अनुच्छेद 13(3) के अनुसार ‘‘ विधि ‘‘  (law) के अंतर्गत भारत के राज्य क्षेत्र में विधि का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम , अधिसूचना, रूढ़ि या प्रथा (Custom  or Usages) है।

2- माननीय न्यायालय एवं विभिन्न कानूनो में भी जनजाति वर्ग में प्रचलित रूढ़ि एवं प्रथाओं के कानून की मान्यता दी गई है।

3- अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पराम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 एवं 2008 के तहत जनजाति वर्ग के रूढ़िगत अधिकारों को मान्यता प्रदान की गई है जो कि राज्य में लागू है।

                इसलिए अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियो को अपनी संस्कृति एवं संवैधानिक हक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए पारम्परिक ग्रामसभाओं को गठन किया जाना चाहिए। पारम्परिक रूढ़िगत ग्रामसभा के माध्यम से अपने गांव की प्रत्येक समस्याओं पर चर्चा कर ग्राम पंचायत एवं कलेक्टर के माध्यम से निराकरण किया जाना चाहिए।
लिखने की ताकत देखिए............


🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, महामूर्ख कालीदास को भी विश्वविख्यात कवि बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, अंधे सूरदास को भी महान कवि बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, विष्णुगुप्त मौर्य को, भी ब्राम्हण चाणक्य बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, बुद्ध के पंचतंत्र को, बिष्णु शर्मा का पंचतंत्र बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, ब्राह्मण बीरबल को, अकबर बादशाह से भी बड़ा बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, महाडरपोक सावरकर को भी, वीर सावरकर बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, ब्राह्मणों को, छत्रिय, वैश्य, शूद्र, अवर्ण से, भी ज्यादा बड़ा ज्ञानी और पूजनीय बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, भगबान से भी बड़ा, ब्राह्मण को बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, अपने विरोधियों को भी, अपना बना दिया।

🏻 झूठ लिखकर ब्राह्मणों ने, काल्पनिक कहानियों को भी, सच बना दिया।

        अब आप ही बताइए, जब झूठ लिखकर, ब्राह्मण करोड़ों लोगों को अपना गुलाम बना सकता है........ तो क्या हम सच लिखकर लाखों लोगों को इस गुलामी से आजाद नहीं कर सकते क्या........???
।।तलवार से इतिहास नहीं बदलता।।

 अगर आपको इतिहास बदलना है तो कलम चलाइये...

       उन्होंने काल्पिनिक चीजों को भी फेमस कर दिया और आप हकीकत की चीजों को, भी फेमस नहीं कर पा रहे, यही हमारी हर स्तर पर विफलता का कारण है।

     अगर आप लिख नहीं सकते तो जो लिख रहे हैं, उनकी बातों को शेयर करके, दूसरे लोगों तक पहुंचाने का काम तो कर ही सकते हो।

       जब तक आप सच नहीं लिखोगे, तब तक आप झूठ की गुलामी से लोगों को आजाद नहीं करा सकते हैं मेरे बहुत से मित्र तो किसी भी तरह का रिस्पॉन्स नहीं देते हैं


    उन मित्रों को मेरा धन्यवाद जो रिस्पॉन्स देते हैं, और जो नहीं देते उनको भी दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।

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