समाज को आईना
रावण जलने पर लोग मरते हैं,
गणेश विसर्जन पर लोग मरते हैं,
कांवड़ लाते समय लोग मरते हैं,
सत्संग में लोग मरते हैं,
गंगा स्नान पर लोग मरते हैं
वैष्णोदेवी यात्रा पर लोग मरते हैं,
अमरनाथ यात्रा पर लोग मरते हैं,
केदारनाथ यात्रा पर लोग मरते हैं,
बद्रीनाथ यात्रा पर लोग मरते हैं,
जग्गनाथपूरी यात्रा में लोग मरते हैं
होली पर लोग मरते हैं,
दीवाली पर लोग मरते हैं,
आदि त्योहारों और जगहों पर लोग मरते हैं जबकि ये सब देवी देवता और
ईश्वर की आस्था के केंद्र हैं। जब लोग मरते हैं तो देवी देवता और ईश्वर कहाँ चले जाते
हैं मदद करने क्यो नहीं आते? मीडिया के पत्रकार भाई पुलिस, प्रशासन, मंत्री, मुख्यमंत्री,
प्रधानमंत्री से सवाल करते हैं, और उन्ही को जिम्मेदार ठहराते हैं। जबकि सवाल करने
हैं तो देवी- देवताओं, ईश्वर से करो वही जिम्मेदार हैं हादसों के। अन्यथा लोगों को
बताओ कि देवी देवता ईश्वर कुछ नहीं है दुनिया मे इनके चक्कर मे पड़ के कोई अपनी जान
न गवाएं।
साथियों अब तो समझो और अपने परिवार के सदस्यों को समझाओ कि देवी
देवता ईश्वर सिर्फ काल्पनिक और बनावटी हैं। इनके नाम पर कुछ लोगो का व्यापार और धंधा
चल रहा है। इसलिए ये आपके दुख में कोई साथ नही दे सकते। दुख में सिर्फ आपका साथ पुलिस,
प्रशासन, समाज, परिवार, सरकार, डॉक्टर, पैसा, शिक्षा, और आपकी समझदारी काम आती है।
अंधविश्वास से दूर रहे सतर्क रहें।
संगठन शक्ति बड़े-बड़ों को धूल चटा देती है । क्योंकि....
संगठन में -
नियम नहीं, व्यवस्था होती है।
संगठन में -
सूचना नहीं, समझ होती है।
संगठन में -
क़ानून नहीं,अनुशासन होता है।
संगठन में -
भय नहीं, भरोसा होता है।
संगठन में -
शोषण नहीं, पोषण होता है।
संगठन में -
आग्रह नहीं, आदर होता है।
संगठन में -
संपर्क नहीं, सम्बन्ध होता है।
संगठन में -
अर्पण नहीं, समर्पण होता है।
संगठन में -
मैं"नही
"हम"होता है।
संगठन में-
"आत्मप्रशंसा"
नहीं
"सर्व सम्मान” होता है।
इसलिए स्वयं को संगठन से जोड़े रखें।
संगठन सामूहिक हित के लिए होता है, व्यक्तिगत
"स्पर्धा"
और
"स्वार्थ"
के लिए नही।
प्रशंसा सबकी करो निंदा किसी की नहीं।
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