गुलामी किसे कहते है?
》1.
सही मायने में गुलामी उसे कहते हैं की बिना सत्य की खोज किए, किसी भी बात पर बिना बहस
किए उसे स्वीकार कर लेना।
》2.
संसार की किसी भी घटना के पीछे कोई ना कोई कारण होता है, बिना कारण के कोई भी घटना
घट नहीं सकती लेकिन उस कारण का पता ना लगाते हुए काल्पनिक बातों पर विश्वास कर लेना
गुलामी है।
》3.
संसार को बनाने वाली कोई चमत्कारिक दिव्य शक्ति है इस बात को मान लेना गुलामी हैै।
》4.
जिन पत्थरों में जान नहीं होती ऐसे निर्जीव पत्थरों को सर्वशक्तिमान मानकर उनके आगे
सिर झुकाना गुलामी है।
》5.
कागज पर, पत्थर पर, लकड़ी पर या किसी धातु पर कलाकारों द्वारा बनाई गई मूर्तियों के
आगे सिर झुकाना, उन्हें अपना दुखड़ा सुनाना, उनके सामने याचना करना गुलामी है।
》6.
दुनिया में जितनी भी जरूरत की चीजें हैं सभी विज्ञान ने दी हैं, विज्ञान को ना मानते
हुए काल्पनिक शक्तियों पर भरोसा करना गुलामी हैै।
》7.
छह विकारों जैसे ''काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ और मत्सर" इनके पीछे सारी जिंदगी
भागते रहना गुलामी है।
इन सभी गुलामी को मानसिक गुलामी कहती है।
मानसिक गुलाम व्यक्ति जानवर की भांति जिंदगी जीता है। मानसिक रुप
से गुलाम व्यक्ति समाज में प्रेम, मानवता और भाईचारे की जगह नफरत, हिंसा और दुश्मनी
ही पैदा करता हैं और फैलाता है।
अपना विवेक जगाओ...अंधविश्वास भगाओ
#मानवताअपनाओजातिअधर्म_दफनाओ#गुलामीकिसेकहतेहै?
》1.
सही मायने में गुलामी उसे कहते हैं की बिना सत्य की खोज किए, किसी भी बात पर बिना बहस
किए उसे स्वीकार कर लेना।
》2.
संसार की किसी भी घटना के पीछे कोई ना कोई कारण होता है, बिना कारण के कोई भी घटना
घट नहीं सकती लेकिन उस कारण का पता ना लगाते हुए काल्पनिक बातों पर विश्वास कर लेना
गुलामी है।
》3.
संसार को बनाने वाली कोई चमत्कारिक दिव्य शक्ति है इस बात को मान लेना गुलामी है।
》4.
जिन पत्थरों में जान नहीं होती ऐसे निर्जीव पत्थरों को सर्वशक्तिमान मानकर उनके आगे
सिर झुकाना गुलामी है।
》5.
कागज पर, पत्थर पर, लकड़ी पर या किसी धातु पर कलाकारों द्वारा बनाई गई मूर्तियों के
आगे सिर झुकाना, उन्हें अपना दुखड़ा सुनाना, उनके सामने याचना करना गुलामी है।
》6.
दुनिया में जितनी भी जरूरत की चीजें हैं सभी विज्ञान ने दी हैं, विज्ञान को ना मानते
हुए काल्पनिक शक्तियों पर भरोसा करना गुलामी है।
》7.
छह विकारों जैसे ''काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ और मत्सर" इनके पीछे सारी जिंदगी
भागते रहना गुलामी है।
इन सभी गुलामी को मानसिक गुलामी कहती है।
मानसिक गुलाम व्यक्ति जानवर की भांति जिंदगी जीता है। मानसिक रुप
से गुलाम व्यक्ति समाज में प्रेम, मानवता और भाईचारे की जगह नफरत, हिंसा और दुश्मनी
ही पैदा करता हैं और फैलाता है।
अपना विवेक जगाओ...अंधविश्वास भगाओ
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