भारत में न कोई अयोध्या है और न ही कभी कोई भगवान राम पैदा हुए और
न कहीं उनके वंशज है।
अयोध्या का पहले नाम साकेत था और यह सारनाथ की तरह एक प्रसिद्ध बौद्ध
तीर्थ स्थान था। यहाँ पर तथागत बुद्ध ने 16 सालों तक वास किया व शिक्षाऐं दी थी। सातवीं
शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग के अनुसार यहाँ 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु
रहते थे। बावरी नामकी उनकी एक उच्च कोटि की बौद्ध भीक्षु थी जिनके नाम पर एक बड़ा और
भव्य "बावरी बौद्ध विहार" बनाया गया था जिसे लगभग 170 BC में ब्राह्मण राजा
पुष्यमित्र शुंग ने तोड़ कर हिंदू मंदिर बना दिया था जिसे बाद में राम मंदिर कहने लगे।
बाबर के सेनापति मीर बकी ने 1528 में उसी मंदिर को फेरबदल कर मस्जिद बना दिया और बावरी
को बाबरी बना दिया। इसीलिए इसे बाबरी मस्जिद कहते हैं।
भारत यूनेस्को में राम का केस
थाईलैंड से हार चुका है। भारत अपने पक्ष में एक भी सबूत पेश नहीं कर सका जबकि
थाईलैंड ने 100 से भी ज्यादा शबूत पेश किए थे कि असली अयोध्या और राम थाईलैंड के हैं,
भारत के नहीं। थाईलैंड ने यह भी साबित किया था कि भारत की वाल्मीकि रामायण थाईलैंड
की रामायण की कॉपी है और रामायण के सारे पात्र थाईलैंड के ही हैं।
भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जब कभी विदेशो में जाते हैं
तो वे यह कहते हैं कि "मैं बुद्ध की धरती से आया हूँ"। अगर वे यह कह दे कि
मैं राम की धरती से आया हूँ तो थाईलैंड उनके ऊपर इंटरनेशनल कोर्ट में केस ठोक देगा।
ज्ञात रहे कि थाईलैंड की अयोध्या, राम का महल, आदि यूनेस्को में वर्ल्र्ड हेरिटेज के
रूप में दर्ज है। और इनका किसी भी रूप में
उपयोग करने का अधिकार सिर्फ थाईलैंड को है।
आज देश में अघोषित इमरजेंसी या तानाशाही आई है तो कुछ भी देश के
भीतर बदल दो, पलट दो, बना दो, गिरा दो मगर देश के बाहर मूँह नहीं खोल सकते और और ना
ही विदेश में मूँह खोलने की औकात है।
ज्ञात रहे, भारत की संसद और राष्ट्रपति भवन में भी तथागत बुद्ध की
ही फोटो/मूर्ति लगी हुई है, किसी राम, कृष्ण,आदि काल्पनिक भगवान की नहीं।
एक बार विचार - विमर्श जरूर करे
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