सवाल है कि भारतीयो मे सौदेबाजी का ऐसा कल्चर क्यो है जबकि जहाँ तमाम सभ्य देशो मे ये सौदेबाजी का कल्चर नही है
3- भारतीय इस सिद्धांत मे विश्वास नही करते कि यदि वो सब नैतिक रूप से व्यवहार करेंगे तो सभी तरक्की करेंगे क्योंकि उनका “विश्वास/धर्म” ये शिक्षा नही देता। उनका कास्ट सिस्टम उन्हे बांटता है। वो ये हरगिज नही मानते कि हर इंसान समान है। इसकी वजह से वो आपस मे बंटे और दूसरे धर्मो मे भी गये। कई हिंदुओ ने अपना अलग धर्म चलाया जैसे सिख, जैन बुद्ध, और कई लोग इसाई और इस्लाम अपनाये। परिणामतः भारतीय एक दूसरे पर विश्वास नही करते। भारत मे कोई भारतीय नही है, वो हिंदू ईसाई मुस्लिम आदि हैं। भारतीय भूल चुके हैं कि 1400 साल पहले वो एक ही धर्म के थे। इस बंटवारे ने एक बीमार कल्चर को जन्म दिया। ये असमानता एक भ्रष्ट समाज मे परिणित हुई, जिसमे हर भारतीय दूसरे भारतीय के विरुद्ध है, सिवाय भगवान के जो उनके विश्वास मे खुद रिश्वतखोर है
लेखक-ब्रायन,
गाडजोन न्यूजीलैंड
( समाज की बंद आँखों को खोलने के लिए इस मैसेज को जितने लोगो तक भेज सकते हैं भेजने का कष्ट करें ।)
हज़ारो वर्ष बाद भारत में तथागत बुद्ध को डॉ बाबा साहेब अंबेडकर ने जीवित किया और डॉ बाबा साहेब को उत्तर भारत में मान्यवर कांशीराम ने जीवित किया !
डॉ बाबा साहेब अंबेडकर के कारण भारत दुबारा बुद्ध और बौद्ध धम्म को जान पाया नही तो लोगों ने बुद्ध के विचारों को साहित्य को दफना दिया था !
पूरी दुनिया डॉ अंबेड़कर और उनके आंदोलन को जान चुकी थी, लेकिन उत्तर भारत में ब्राह्मणों ने अंबेड़कर के विचारों को रोके रखा था, कांशीराम नाम के मसीह ने उत्तर भारत के गांव गांव में डॉ आंबेडकर को पहुंचा दिया !
बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर कोटि कोटि नमन !
[6:54 PM, 10/9/2019]
+91 70673 59588: ✍कलम का सही प्रयोग बाबासाहब डा-भीमराव अम्बेडकर जी ने किया था,
🚴साइकिल का सही प्रयोग मान्यवर कांशीराम साहब ने किया था
अगर हम सभी ने मिलकर इस मोबाइल का सही प्रयोग कर लिया तो अपने बहुजन समाज में परिवर्तन लाने से दुनिया की कोई ताकत हमे नहीं रोक सकती।
।। जय भीम जय भारत ।।
कृष्ण कहते है कर्म करो पर फल की चिंता ना करो
बुद्ध कहते है यदि कर्म करते हो और फल नहीं मिलता तो उसका कारण खोजो
यह आप पर निर्भर करता है कि आप किसकी बात मानते है ।

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