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Friday, October 4, 2019

सवाल ये है कि क्या वो लड़की सेंगर पर आरोप लगाने से पहले भाजपा ज्वाइन कर लेती तो उसे न्याय मिल जाता?


सवाल ये है कि क्या वो लड़की सेंगर पर आरोप लगाने से पहले भाजपा ज्वाइन कर लेती तो उसे न्याय मिल जाता?

कठुआ केस
तीसरा मामला 2018 में जम्मू-कश्मीर में बकरवाल समुदाय की नन्हीं सी बच्ची आसिफा के रेप और मर्डर का है. इस जघन्य अपराध के आरोपियों को बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर भाजपा के नेता और तत्कालीन भाजपा मंत्री भी सामने गये थे और तमाम रैलियां निकाली थीं. ऐसा लग रहा था कि जम्मू-कश्मीर के नाम पर उस बच्ची आसिफा से कोई बदला लिया जा रहा है.


सवाल ये है कि क्या आसिफा के मां-बाप पहले भाजपा ज्वाइन करते और फिर मामला खोलते तो कार्रवाई होती?

क्योंकि तीनों ही मामलों में भाजपा के नेताओं ने अपनेसमर्थकों और पार्टी के लोगों के लिए एक अलग ही संवेदना प्रकट की है.

राष्ट्रनिर्माण में व्यस्त देश की नेत्रियां
ये संवेदना भाजपा की महिला नेताओं में भी दिखाई देती है. आश्चर्यजनक रूप से भाजपा में कई महिला नेता हैं, जो कैबिनेट मंत्री हैं. स्मृति ईरानी महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं. निर्मला सीतारमन पहले रक्षामंत्री थीं, इस बार वित्तमंत्री हैं. पर दोनों ही मंत्रियों ने इन मामलों पर चुप्पी साध रखी है. दोनों ही भाजपा द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरा करने में इतनी व्यस्त हैं कि रेप जैसे छोटे मामलों को देखने के लिए फुर्सत नहीं है.

ये अच्छी बात है कि महिला नेताओं को देश के पुलिस तंत्र और न्याय तंत्र पर पूरा यकीन है कि न्याय तो होगा ही और दोषी को सजा भी मिलेगी. गिरती जीडीपी को संभालते हुए भाजपा नेत्री निर्मला सीतारमण को भी ऐसी घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए. हमारी नेत्रियां राष्ट्रनिर्माण में इतनी व्यस्त हैं कि ऐसे मामलों पर एक ट्वीट तक नहीं कर सकतीं.

सवाल ये है कि क्या देश की पचास करोड़ महिलाएं भाजपा ज्वाइन कर लें तो उन्हें किसी तरह के रेप थ्रेट से मुक्ति मिल जाएगी? जैसा कि गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि युद्ध करना पड़े तो करेंगे और भाजपा के लोगों नेअपने लोगों के लिए युद्ध तो किया ही है. क्या भारत की औरतों की सुरक्षा बस एक मिस्ड कॉल के लिए रूकी है? एक मिस्ड कॉल दें राष्ट्रनिर्माण के लिए और रेप थ्रेट से मुक्ति पा जाएं?
अँग्रेज शुद्रों के भगवान बनकर आये
              - : ज्योतिबा फूले

 ब्राह्मणों ने जिनको शिक्षा, सत्ता, सम्पत्ति, सम्मान से दूर रखा, जिनका हजारो साल तक शोषण किया, अँग्रेजों ने उन्हें ब्राह्मणों के चंगुल से मुक्त करने की शुरूआत की

      इसलिए भारत के शातिर ब्राह्मणों ने आजादी के नाम पर अँग्रेजों को भारत से भगाने का आंदोलन चलाया, जिसे धर्म, आस्था, विश्वास के दलदल में अकंठ डुबे शुद्र समझ नहीं पाये और अँग्रेजों को भगाने में ब्राह्मणों का साथ दिया।

आईये अंग्रेजों ने कितने पाखंडों पर रोक लगाई उसपर एक नजर डालें ...

) रथयात्रा :- जगन्नाथ में हर तीसरेवर्ष यह यात्रा निकाली जाती है जिसमें स्वर्ग पाने के चक्कर में रथ के पहिये के नीचे आकर सैकडों लोगों की जान चली जाती थी, कानून बनाकर बंद की

) काशीकरबट :- काशी धाम में ईश्वर प्राप्ति हेतु विश्वेश्वर के मंदिर के पास कुए में कूद कर जान देते थे बंद कराई गयी

) चरक पूजा :- काली के मोक्षाभिलाषी उपासक की रीड की हड्डी में लोहे की हुक फसा कर चर्खी में घुमाया जाता है जबतक कि उसके प्राण निकल जायें इसे 1863 में कानून बनाकर बंद कराया

) गंगा प्रवाह :- अधिक अवस्था बीत जाने पर भी संतान होने पर गंगा को पहली संतान भेट करने की मनोती पूरी होने पर निष्ठुर होकर जीवित बच्चे को गंगा में बहा देना कितना कठोर काम है 1835 में कानून बनाकर बंद किया
) नरमेध यज्ञ:- रिग्वेद के आधार पर अनाथ या निर्धन बच्चे की यज्ञ में बली चढाने की प्रथा को 1845 मे एक्ट 21 बनाकर बंद किया गया

) महाप्रस्थान :- पानी में डूब कर या आग मे जलकर ईश्वर प्राप्ती की इच्छा से जान देने की प्रथा भी कानून बनाकर बंद की।

) तुषानल :- किसी पाप के प्रायश्चित के कारण भूसा या घास की आग में जलकर मरने की प्रथा कानुन बनाकर बंद की

) हरिबोल :- यह प्रथा बंगाल में प्रचलित थी। मरणासन्न व्यक्ति को जब तक गोते खिलाये जाते थे तब तक वह मर जाये और हरिबोल के नारे लगाते थे यदि वह नही मरा तो भी उसे वहीं तड़फने के लिए छोड़ देते थे उसे फिर घर नहीं लाते थे 1831 में कानून से बंद की

) नरबलि :- अपने इष्ट की प्राप्ती पर अपने ईष्ट को प्रसन्न करने के लिए मानव की सीधी बली को भी अंग्रेजों ने बंद किया पर यह प्रथा यदाकदा आज भी चालू है

१०) सतीदाह :- पति के मरने पर पति की चिता के साथ जल करमरने की प्रथा को 1841 में बंद किया

११) कन्यावध :- उडीसा राजपूताना से कुलीन क्षत्रिय कन्या पैदा होते ही मार देते थे इस भय से कि इसके कारण उन्हे किसी का ससुर या साला बनना पडेगा 1870 में कानून बनाकर बंद की

१२ ) भृगुत्पन्न :- यह गिरनार या सतपुडा में प्रचलित थी
अपनी माताओं की मनौती की कि हे- महादेव! हमें संतान हुई तो पहली संतान आपको भेंट देंगे और इसके तहत नव- युवक अपने को पहाड़ से कूदकर जान देते थे कानून बनाकर बंद की . —
ये है कथित हिन्दू धर्म की ब्राह्मणों द्वारा बनाई कुछ प्रथाए।

obc जागो ब्राह्मणवाद को त्यागो

"कहीं हम भूल जाएँ


हिन्दू धर्म में वर्ण, वर्ण में शूद्र, शूद्र में जाति, जाति में क्रमिक उंच नीच... और ब्राह्मण के आगे सारे नींच.. अब गर्व से कैसे कहें कि हम हिन्दू हैं
      
       शूद्र(obc), अवर्ण(sc/st)
       जाति तोड़ो...समाज जोड़ो

       हमें मन्दिर नहीं, स्कूल चाहिए
       हमें धर्म नहीं, अधिकार चाहिए

जय विज्ञान, जय संविधान !

हमारा सपना ब्राह्मणवाद मुक्त हो भारत अपना

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