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Friday, October 4, 2019

दोस्तो, नवरात्रि का भव्य सांस्कृतिक कर्मकांड अपने उफान पर है.


दोस्तो, नवरात्रि का भव्य सांस्कृतिक कर्मकांड अपने उफान पर है. भारत के प्रगतिशील सांस्कृतिक संगठनों ने इसके खिलाफ वैज्ञानिक चेतना का कोई अभियान इस नवरात्रि में चलाया हो तो जरूर बताइएगा.

अगर आरक्षण से बड़े बड़े अधिकारी, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर, डॉक्टर बने हुए SCSTOBC साथियों को यह समझ नहीं आया, कि हमें यह पद, प्रतिष्ठा, समाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए मिली है, समाज के दुख दर्द का साथी बनने के लिए मिली है, यह हमारे पूर्वजो के त्याग, बलिदान और संघर्ष के कारण मिली है और समाज ने हमारी इस संवैधानिक सुरक्षा, सम्मान एवं समृद्धि के लिये अपना खून पसीना बहाया है ;  किसी भी तरह की मनुवाद की चाकरी करने के लिए नहीं मिली है l अगर हमें समाज के सरोकारो से मतलब नहीं, और हम मनुवादी घंटा बजाने में ही रुचि रखते हैं या हित समझते हैं, तो समाज भी आपको आईना दिखाने में अब ज्यादा देर नहीं करेगा l
लंबे समय तक अगर यही कृतघ्नता जारी रही, तो आरक्षण बचेगा, ना ही प्रतिनिधित्व, और प्रमोशन का तो सवाल ही पैदा नहीं होता l  आज आप के पास विकल्प नहीं है, जितनी जल्दी हो सके बहुजन क्रांतिकारियों के चलाए आन्दोलन का हिस्सा बनिए, नहीं तो सब तहस-नहस हो जाएगा. और क्योंकि यह सब कुछ (संपत्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा) आपके पास ही है, तो अगर सब कुछ खोयेगा भी आपका ही l यह सोचना, कि मनुवादी आपको पहचानता नहीं, या उसका हृदय परिवर्तन हो गया है या आपके साथ उसने रिश्तेदारी कर ली है वह घाघ है मुंह सुखाकर दम तोड़ेगा l अभी भी देर नहीं हुई है, अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाईये, और समाज की लायक संतानो में अपनी जगह सुनिश्चित कर लीजिए l

समाज ने हमारे आनंद दायक समय, उम्दा हुनर और पर्याप्त धन पर हज़ारों साल निवेश किया है, तब जाकर आज हम सुकून भरा सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, अब हमें आगे बढ़कर मानवतावादी आन्दोलन का नेतृत्व करना होगा, उसकी रीढ़, आँख, नाक, कान बनना होगा.

यही एक मात्र रास्ता है.
संयुक्त राष्ट्र संघ मैं मोदी का बयान

   हमने युद्ध नहीं बुद्ध दिए हैं।

सवाल उठता हैं कि रामभक्त मोदी ने क्यों नहीं कहा कि हमने युद्ध नहीं राम दिये हैं।क्या विदेशों मैं राम का नाम लेने मैं शर्म आती हैं। इसके पीछे कई बजह हैं-
1- दुनिया इंडिया को राम के नाम से नहीं बुद्ध के नाम से जानती हैं।
2- महात्मा बुद्ध भारत ही नहीं पूरी दुनिया के विश्व गुरु शिक्षक माने जाते है।
3- महात्मा बुद्ध दया, करुणा, मानवता, समानता शांति के प्रतीक हैं जबकि राम युद्ध  हत्या भेदभाव के।
4-दुनिया मैं 30 से अधिक देश बौद्धिक है जो महात्मा बुद्ध के नाम से ही भारत को फंडिंग करते हैं।इसको मोदी जानते हैं।

     सवाल उठता हैं कि मोदी या अन्य हिन्दू लोग महात्मा बुद्ध जिन्हें दुनिया अपना पथ प्रदर्शक मानती हैं को भारत मैं क्यों नजरअंदाज करते हैं राम का नाम क्यों जपते हैं क्योंकि इनको पता हैं कि भारत बौद्धिक दृष्टि से इतना पिछड़ा हैं कि यहाँ सत्ता ज्ञान के प्रतीक के नाम  पर नहीं वल्लिक धर्म अंधविश्वास के नाम पर मिलती हैं।


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