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Sunday, October 13, 2019

गोँडवाना शब्द,गोँडवाना विचार का विरोध क्यों ?


गोँडवाना शब्द,गोँडवाना विचार का विरोध क्यों ?

               सांथियों यदि आप पढ़े और लिखे ,जागरूक हैं,और देश दुनिया में आज जो सामाजिक,पारम्परिक,आर्थिक,राजनैतिक,वैचारिक,सांस्कृतिक और धार्मिक उन्माद चल रहा है।यह आदिवासियों,मूलनिवासियों को गुलाम बनाए रखने का एक सोची समझी षड्यंत्र है। इसको दुसरे के चश्मे से नही अपने आदिवासियत चश्मे से देखना पड़ेगा,वेद,पुराण,रामायण,गीता,भागवत,महाभारत इत्यादि का रचना जब नही हुआ था।इसके पूर्व का इतिहास हिस्ट्री को अच्छी तरह से अध्ययन करना पड़ेगा तब गोँडवाना शब्द अर्थ,गोँडवाना विचार का मतलब समझ में आएगा।जिनके पास इतिहास पड़ने का समय नही है उनको गोँडवाना की गहराई समझे बिना  गोँडवाना विचार का विरोध करना अपराध है,उनको हक नही है।
               गोँडवाना आंदोलन एक सत्य सोधक आंदोलन है।इस वर्तमान भारत भूमि जब से बनी है तब से क्या रीतिरिवाज रहा है,क्या संस्कृति रही है।इस भारत भूमि में इसका खोजकर्त्ता आंदोलन,गोँडवाना आंदोलन है।
           बिना सच्चाई जाने टीका टिप्पड़ी करना मूर्खता है।

                   बीरेंद्र सिंह मरावी अनूपपुर(,प्र,) : चाहे कोई भी संगठन हो,जिनके पास समाज के अंदर आर्थिक समृद्धि की योजना नही है।तो समझो वह बकवास संगठन है  ऐसे संगठनों का समर्थन नही करना चाहिए।हर संगठनों का एक ही उद्देश्य होना चाहिए की अधिकार वंचित,शोषित,पीड़ित,और निर्धन समाज को समृध्द बनाना।
बीरेंद्र सिंह मरावी अनूपपुर (, प्र,)
: हमारे असदिवासी समाज के लोग पढ़े लिखे है,बड़े-बड़े सरकारी पद  में कार्यरत है।डॉक्टर,इंजिनियर, मास्टर,पटवारी, सरपंच,सचिव,विधायक,सासंद तथा मंत्री है। इनके पास हर महीने पैसे का आवक है।अन्य आदिवासी से। फिर भी ये लोग आदिवासी कर्मचारी संगठन बनाके  विशेष आदिवासी शैक्षणिक संस्थान गोटूल संस्कार केंद्र क्यों नही खुलवाते है।
   क्या उनकी मति मारी गई है।

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