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Saturday, July 25, 2020

the constitution of india-मूल अधिकार


भाग -3  मूल अधिकार

 परिभाषा- जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित ना हो राज्य के अंतर्गत भारत की सरकार और संसद तथा राज्यों में से प्रत्येक राज्य की सरकार और विधान मंडल तथा भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन सभी स्थानीय और प्रार्थी का ही है 
असम स्मॉल स्केल इंडस्ट्री डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के कानूनी राय है और संविधान के अनुच्छेद 12 के अर्थ में राज्य आशा लघु उद्योग विकास निगम लिमिटेड बना जेडी फार्मासी क्रिटिकल 2006 एससी
 भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड राज नहीं है क्योंकि वह ना तो वित्तीय क्रियात्मक या प्रशासनिक रूप से सरकार पर आश्रित है और ना ही सरकार के नियंत्रण में है जी टेलीफिल्म्स लिमिटेड बनाम भारत संघ आई आर 2005 एस सी 2677
 एनसीआरटी संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत राज्य नहीं है चंद्रमोहन खन्ना बना एनसीआरटी एआईआर 92806 तक
 एक सरकारी कंपनी भारत पैट्रोलियम निगम भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के अर्थ में राज्य है सोम प्रकाश बनाम भारत संघ आई आर 1981 एस सी 212
 सहकारी समिति स्थानीय प्राधिकारी है और संविधान के अनुच्छेद 12 के अर्थ में राज्य सुखराम बनाम कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एसोसिएट मध्य प्रदेश289

13-मूल अधिकारों से असंगत या उनका अनुकरण करने वाली विधियां-
1   इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत की राज्य क्षेत्र में प्रवर्तक सभी विधियां उस मात्रा तक सून होगी जिस तक भी इस भाग की सुख बंधुओं से असंगत हैं
2 ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा इस भाग द्वारा प्रदत अधिकारी को छूती हैं या न्यून करती हैं और इस खंड के उल्लंघन में बनाए गए प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक सुन होगी
3 इस अनुच्छेद में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित ना
A.          विधि के अंतर्गत भारत के राज्य क्षेत्र में विधि का बल रखने वाला कोई अध्यादेश आदि उपविधि नियम विनियम अधिसूचना  रोड़ी या प्रथा है 
B.          व्रत विधि के अंतर्गत भारत के राज्य क्षेत्र में किसी विधानमंडल या सक्षम अधिकारी द्वारा इस संविधान के प्रारंभ से पहले पारित किया बनाई गई विधि है जो पहले ही निर्मित नहीं कि कर दी गई है चाहे ऐसी कोई विधि या उसका कोई भाग उस समय पूर्णतया या विशिष्ट क्षेत्र में परिवर्तन में नहीं है
इस अनुच्छेद की कोई बात अनुच्छेद 368 के आदमी किए गए संविधान के किस संशोधन को लागू नहीं होगी

समता का अधिकार
14-  विधि के समक्ष समता का अधिकार- राज्य भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा

टिप्पणियां
 प्रथम वाक्य विधि के समक्ष समता ब्रिटिश संविधान से तथा द्वितीय विधियों के समान संरक्षण अमेरिकन संविधान से लिया है
 समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत की मान्यता है कि समान कार्य के लिए समान वेतन में सभी प्रकार की समानता अपेक्षित हैं उत्तर प्रदेश शुगर कारपोरेशन लिमिटेड बनाम संत सिंह अंगार 2006 एसएससी 2296 उच्च जाति की हिंदू महिला 1 अनुसूचित जाति के व्यक्ति से विवाह करने पर संविधान के अनुच्छेद 15.4 एवं 16.4 के अंतर्गत आरक्षण का फायदा प्राप्त नहीं कर सकती है मीरा कांवरिया बनाम सुनीता आई आर 2006 एस सी 597
गैर सहायता प्राप्त व्यवसाय शिक्षण संस्थाओं में राज्य प्रवेश के लिए सीटों का आरक्षण नहीं कर सकती है इस्लामिक एकेडमिक बनाम कर्नाटक राज्य आई आर 2003 एस सी 3324 ईमानदार बनाम महाराष्ट्र आई आर 2005 एस सी 3226
 अनुच्छेद 14 समता का अखंड भारत राज्य क्षेत्र के अधीन विधि की समान संरक्षण क्या विधि के समक्ष समता की गारंटी देता है
स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए काउंसलिंग संबंधी नियम केवल इसी आधार पर आयुक्त नहीं होगा कि अच्छे मेरिट के अभ्यर्थी को उसकी सूची का विषय और पाठ्यक्रम देने से मना करता है सफल नंदवानी बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा आई आर 2002 एस सी 3382

 मत देने का अधिकार मूल अधिकार नहीं माना जाता है यह विधान द्वारा अधुरो की सीमाओं के दिन वैधानिक अधिकार है लेकिन विधान के अधीन निर्वाचन के अधिकार की प्रकृति को अवैध मानकर चुनौती नहीं दी जा सकती है
 अनुच्छेद 14 में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 किया जा सकता इंदिरा नेहरू गांधी बना राज नारायण आई आर 1975 एस सी 2299
 विधि का समान संरक्षण विधि के समक्ष समता का उप सिद्धांत है स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल बनाम अनवर अली सरकार आई आर 1952 एस सी 75
 15- धर्म मूल वंश जाति लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेद या प्रतिषेध-
राज्य किसी नागरिक के गुण केवल धर्म मूल वंश जाति में जन्म स्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा

2 कोई नागरिक केवल धर्म मूल वंश जाति या उनमें से किसी के आधार पर-
A.            दुकानों सार्वजनिक भोजनालय होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश या
B.           पूर्णतया भगत राज्य निधि से पोषित या साधारण जनता की प्रयोग के लिए समर्पित तालाबों में स्नान घाट सड़क सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग के संबंध में किसी भी निर्योग्यता दायित्व निरबंधन या सर के अधीन नहीं होगा
3   इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष को बंद करने से निवारक नहीं करेगी
 इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड 2 की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों की वर्गों की उन्नति के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से बात नहीं करेगी
5 इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खंड एक के उपखंड झांकी कोई बात राजपूत नागरिकों के किसी सामाजिक रूप से और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की प्रगति के लिए या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजातियों के लिए विधि द्वारा किसी विशेष प्रावधान को करने से अनिवार्य नहीं करेगी जहां तक ऐसा विशेष प्रावधान अनुच्छेद 30 के खंड 1 में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के अतिरिक्त अन्य शैक्षणिक संस्थानों में गैर सरकारी संस्था में सरकार द्वारा सहायता प्राप्त हुआ उनके प्रवेश से संबंधित है

दोस्तों इस लेखन के माध्यम से आज हम मूल अधिकार और समता का अधिकार के बारे में जानने की कोशिश किए हैं इस प्रकार भारत के सभी नागरिकों को मूल अधिकार और समता का अधिकार प्राप्त है संविधान हर एक व्यक्ति को समता का अधिकार कानून के समक्ष प्रदान करता है चाहे वह किसी भी जाति धर्म का हो उनके साथ किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा चाहे वह भारत के किसी राज्य में निवास करता हूं आगे की लेखन में हम स्वतंत्र अधिकार के बारे में जानेंगे आप सभी से निवेदन है कि इस लेखन को आगे अपने परिवार दोस्तों तक पहुंचाएं ताकि संविधान के जो मूल अधिकार है वह लोगों तक पहुंचे हो सभी लोग अपने हक अधिकार जिससे एक विशिष्ट समाज का निर्माण होगा किसी भी व्यक्ति के साथ जाति धर्म को लेकर अत्याचार नहीं होगा

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