फॉरेस्ट विभाग के द्वारा किसान की नष्ट की गई धान की फसल और जान से मारने की धमकी दी गई;-
मेरा सभी से निवेदन है की इस पोस्ट को भारत के हर राज्य में फैलाया जाए ताकि पिछड़े समाज के लोग हैं कि उनके समाज के साथ क्या किया जा रहा है जात पात और समाज का बंटवारा हो चुका है ऐसे में एक इंसान को उसके समाज का व्यक्ति साथ देगा दूसरा कोई व्यक्ति उसके लिए आगे नहीं आएगा और खासकर भारत जैसे देश में जहां पर छुआछूत जातिवाद ऊंच-नीच की भावना ज्यादा हो वहां पर किसी भी इंसान से दया की भावना की उम्मीद नहीं की जा सकती है
आज दिनाँक 22/07/2020 को मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में पुष्पराजगढ़ ब्लॉक के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बेंदी का मामला है, यहां पे बैगा आदिवासी लगभग 10 -15 वर्षों से102 एकड़ जमीन पे खेती कर रहे हैं. वहां आज फारेस्ट विभाग के द्वारा फसल नष्ट कराया जा रहा है, और वहां पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। यहां के बैगा आदिवासी पढ़े लिखे नहीं हैं, उन्हें गोली मारने की धमकी दी जा रही है. वे भोले-भाले बैगा आदिवासी वर्दी देख कर डर जाते हैं. वहां पूरे धान का फसल लगा हुआ है, खडी़ फसल में मवेशियों को चरने के लिए छोड़ देते हैं। पूरे जमीन पे बाउंडरी करा दिया गया है.
आज लगभग100 बीट गार्ड बंदूकें लेकर ड्यूटी लगा दिया है। दूसरे अदिवासियों को उनके खिलाफ खड़े कर रहे हैं। और आपस मे लड़वा रहे हैं।
सरकार को पांचवीं अनुसूची (अनुसूचित क्षेत्र) और सामान्य क्षेत्र में फर्क नहीं लगता जो बैगा आदिवासियों को इस तरह से जंगल से खदेड़ा जा रहा है. और आज इस मामले को लेकर जयस युवा मोर्चा अनूपपुर जिला अध्यक्ष रोहित सिंह मरावी, व (आदिवासी छात्र संगठन) इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, के तरफ से मोहन मीणा, अनिरुद्ध सिंह, नवीन उरैती, चिन्टू खाटी, योगनारायण सिंह, और समस्त बैगा आदिवासी ग्रामीण जन ने अपनी जब अपनी पक्ष रखने की कोशिश की तो
(SDO)वन विभाग द्वारा अभद्रता पूर्वक व्यवहार किया. व उनकी बात सुने बिना अपनी कार्यवाही के साथ बल प्रयोग करते रहे.
मध्य प्रदेश जिला अनूपपुर ग्राम बेदी की घटना फर्स्ट विभाग के द्वारा किसान की फसल नष्ट किया जा रहा है फर्स्ट विभाग को क्या इसकी खबर नहीं थी की किसान विश्वकर्मा अगर की बुराई करता है वह फॉरेस्ट विभाग की है या शासन-प्रशासन की है यदि जमीन शासन की है तो किसान को इसकी सूचना फसल बुवाई करने की पहली दी जानी थी ताकि उस किसान की मेहनत और समय बर्बाद नहीं होता अब जब किसान ने उस जमीन पर फसल की बुवाई कर दी है तब फर्स्ट विभाग के द्वारा उसे नष्ट किया जा रहा है यह बहुत ही दुखद घटना है या फिर फर्स्ट विभाग को फसल कटाई के बाद कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए थी उस किसान का जो नुकसान होगा उसकी भरपाई फर्स्ट में भाग लिया शासन के द्वारा किया जाएगा
दोस्तों इस समाचार को आप कम से कम 5 लोगों पर आगे पहुंचाएं ताकि अनुसूची क्षेत्र में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लोगों के ऊपर शासन प्रशासन के द्वारा किस प्रकार से अत्याचार किया जाता है अभी तक पहुंचना चाहिए क्योंकि यह समाज काफी पिछड़ा हुआ है और उन्हें ही सबसे ज्यादा दबाया जाता है हो सकता है किसी का जमीर जाग जाए कोई समाज के प्रति काम करने के लिए आगे आ जाए और खासकर जो पढ़े लिखे युवा हैं उनको अपने समाज के प्रति जागना होगा तभी आप सामाजिक रूप से आर्थिक रूप से एक मुख्य धारा पर आगे आप आएंगे सिर्फ जनसंख्या लेने से कुछ नहीं होता चलती उसी की है जिसके हाथ में पावर होता है सत्ता में बैठे सत्ताधारी लोग जो 1--2 समाज के लोगों को हमेशा से प्रताड़ित करते आए हैं उन्हें डराते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यह बहुत कमजोर है आर्थिक रूप से मानसिक रूप से सामाजिक रुप से सभी दृष्टि से बहुत कमजोर है
रही बात फॉरेस्ट विभाग और पुलिस प्रशासन की तो उन्हें तो अपनी ड्यूटी करनी है सरकारी नौकरी करते हैं दबाव में नौकरी करते हैं आगे जो आदेश मिलता है उसकी वह पालन करते हैं लेकिन आगे बैठे हैं समाज विरोधी और देश विरोधी काम करते हैं लेकिन जो शासन प्रशासन की कर्मचारी है या अधिकारी हैं उन्हें किसी भी गरीब को डराने धमकाने मारने पीटने का कोई अधिकार नहीं है सिर्फ गरीब के ही साथ ऐसा क्यों किया जाता है वहीं पर जो आर्थिक रूप से मजबूत है जिसकी पहुंच ऊपर तक है उन्हें यही कर्मचारी आदर सम्मान के साथ देश आते हैं और कोई गरीब व्यक्ति है तो उसे जल्दी मारने पीटने पर उतारू हो जाते हैं क्योंकि उसकी गरीबी और कमजोरी का फायदा यह अपने रुतबा दिखाने आजमाते हैं के लिए आते हैं
रही बात फॉरेस्ट विभाग और पुलिस प्रशासन की तो उन्हें तो अपनी ड्यूटी करनी है सरकारी नौकरी करते हैं दबाव में नौकरी करते हैं आगे जो आदेश मिलता है उसकी वह पालन करते हैं लेकिन आगे बैठे हैं समाज विरोधी और देश विरोधी काम करते हैं लेकिन जो शासन प्रशासन की कर्मचारी है या अधिकारी हैं उन्हें किसी भी गरीब को डराने धमकाने मारने पीटने का कोई अधिकार नहीं है सिर्फ गरीब के ही साथ ऐसा क्यों किया जाता है वहीं पर जो आर्थिक रूप से मजबूत है जिसकी पहुंच ऊपर तक है उन्हें यही कर्मचारी आदर सम्मान के साथ देश आते हैं और कोई गरीब व्यक्ति है तो उसे जल्दी मारने पीटने पर उतारू हो जाते हैं क्योंकि उसकी गरीबी और कमजोरी का फायदा यह अपने रुतबा दिखाने के लिए आजमाते हैं
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