गणतंत्र ' के जनक कौन?
अमेरिकन या ब्रिटिशर?
उत्तर होगा : दोनों नहीं ।..
तो कौन?
इस कौन का उत्तर जानने के लिए इस शब्द के उत्पत्ति व इतिहास को जानता होगा।
गण= लोक,प्रजा, जन,पब्लिक।
परिभाषा = लोगों के समूह को लोक, प्रजा,जन या पब्लिक कहते है।
तंत्र = व्यवस्था या सिस्टम ।(तंत्र : तंन्तुओ से बुना हुआ जाल जैसा व्यवस्था) जिसमें सब एक दूसरे से जुड़े हुए होते है।
'गण ' शब्द 'गण्ड' शब्द से बना है ।'गण्ड' इस शब्द का अर्थ भी लोगो का समूह होता है ।जन,प्रजा,लोक पर्याय है ।
आइये इस गण्ड शब्द का स्रोत तलाशते है- संभूद्वीप(बिगड़ा नाम जंबू द्वीप) में आदि काल से निवास करने वाले गोंडियन मूलवंशियों में "गण्ड व्यवस्था " पाया जाता था ।इस गण्ड व्यवस्था का विकास क्रमश: कबीलाई व्यवस्था से उत्तरोत्तर नार गण्ड व्यवस्था, कोट गण्ड व्यवस्था व कुल गण्ड व्यवस्था के रूप में (10000ई .पु. से 2230ई .पु. तक ) हुआ ।इसी के परिणाम स्वरूप सिन्धु घाटी की सभ्यता अपनी उन्नत अवस्था को प्राप्त किया ।गोण्डी(कोया) पुनेम के द्वितीय पुनेम प्रणेता 'पारी कुपार लिंगो 'ने 2230 ई .पु.में कोट गण्ड व्यवस्था को परिवर्तित कर कुल गण्ड व्यवस्था की स्थापना की ।यद्पि यह आर्यों के आक्रमण( 1869 ई .पु. -1750. ई. पु.) के कारण काफी हद तक नष्ट हो गया, किन्तु अपनी जान बचाकर वनो में विस्थापित कोयावंशियो मे आज भी यह गण्ड व्यवस्था (गण्ड totem चिन्ह युक्त) दिखाई देता है ।जिसकी संख्या 750 कुल गण्ड चिन्ह(totem) युक्त है।
उदाहरण- नाग कुल(गण्डचिनह :नाग), गोपेत कुल( गण्ड चिन्ह : मकड़ी) ,पुरार कुल (गण्ड चिन्ह : कबूतर) , उरांव कुल (गण्ड चिन्ह : घोरपड़), भील कुल (गण्ड चिन्ह :मगरमच्छ) , याद कुल (गण्ड चिन्ह :गाय) , सांडिल्य कुल (गण्ड चिन्ह:बैल) आदि।
गण्ड चिन्ह का अर्थ : लोगो के समूह का चिन्ह ।अर्थात संभूद्वीप की सभी जन 750 कुल समूह में विभाजित थे ।इनमें स्वयं कुल विवाह निषेध था और अन्य कुल में विवाह ही मान्य था, आज भी यही मान्य है।
यही "गण्ड " शब्द बाद में "गण" बन गया जिसके कारण "गण्ड व्यवस्था "बाद में "गण व्यवस्था" हो गया जिसका अन्य पर्याय : लोक व्यवस्था या लोकतंत्र, जन व्यवस्था या जनतंत्र, प्रजा व्यवस्था या प्रजा तंत्र(public system) हो गया । 750 कुल गण्ड चिन्ह धारकों के बीच परस्पर वैवाहिक पूर्ण रिश्तेदारी संबंध था ।ये आपस में एक संयुक्त संघ (गॊंदोला) के रूप में संगठित थे ।इस संयुक्त संघ के राष्ट्रीयता को "गण्ड वाना "कहा जाता था जो बाद में "गॊण्डवाना" हो गया ।"गण्ड
"शब्द से ही "गोण्ड " शब्द बना जिसका अर्थ अनेक 'गण्डों'(गणों) का समूह होता है ।अनेक गण्ड समूह मिलकर बने एक विशाल गण्डॊं के समूह को' गॊण्ड' कहा जाता था।
गोण्ड : नागरिकता बोधक शब्द है।
गोण्ड :विशाल समुदाय बोधक शब्द।
गोण्ड - जाति बोधक शब्द नहीं है, षडयंत्रकारियों के कारण आज यह विशाल राष्ट्रीयता खंडित होकर महज एक जाति के रूप में दिखाई दे रहा है।
यदि मै कहूं कि आर्यो को छोड़ यहाँ के सभी लोग' हिन्दू' नहीं 'गोण्ड' है तो यह अतिशयोक्ति नहीं बल्कि सच्चाई होगी क्योंकि हिन्दू शब्द वास्तविक नहीं कूट या नकली शब्द है,असली तो सिन्धु शब्द है,और सिन्धु वासी प्राचीन काल में 'गण्ड जीव 'अर्थात् गोण्ड कहलाते थे।हिन्दू शब्द तो अभी मुगल कालीन है वह भी विदेशियों द्वारा प्रदत्त है।स्वयं को हिन्दू कहने वाले मूलवंशियों को यह सोचना चाहिए कि अरब और मुगल काल के पहले आपकी क्या संज्ञा थी?
यदि आप आर्य नहीं हो और सिन्धु काल के गण्ड चिन्ह (totem)धारक गण्ड जीव हो, तो हे समस्त मूलवंशी आपकी प्राचीनतम संज्ञा "गोण्ड "थी।
आपकी राष्ट्रीयता विशाल सामुदायिक संघ "गण्ड वाना "थी । इसी इतिहासिक महत्व के कारण 19वीं सदी में जर्मन व आस्ट्रिया के वैज्ञानिकों ने "Triassic Period "में अस्तित्व में धरती के दक्षिणाखण्ड को' गॊण्डवाना लैण्ड ' कहा ।'गोण्डवाना लैण्ड ' समस्त मूलवंशियो का स्वाभिमान बोधक,पहचान बोधक,इतिहास बोधक व प्राचीन राष्ट्रीयता का बोधक है।
कृपया संकीर्ण विचारधारा, संकीर्ण क्षेत्रीयवाद ,क्षेत्रीय संस्कृति वाद ,जाति व संप्रदाय वाद से ऊपर उठ कर इस इतिहासिक तथ्य को समझें व स्वाभिमान को जगायें ।"आपके पूर्वज सभ्यता के निर्माता ही नहीं बल्कि विश्व 'लोकतंत्र ' के जनक भी है ।"
जय मूलनिवासी जय आदिवासी जय गोंडवाना

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