एक सवाल क्यों आवश्यक महापंचायत ???
आप भी सोंचे और हम भी विचार करते हैं क्यों का जवाब शायद आपको मिल ही गया होगा या नहीं भी मिला होगा लेकिन आप स्वयं विचार करें आखिर ऐसा क्या है जो अदिवासियों को संगठित होने से रोक रहा है, आखिर क्यों यह समाज आज अजादी 72 वर्ष बीत जाने के बाद भी अपने अस्तित्त्व को बरकरार रखने के लिए संघर्षरत है कुछ तो वजह होगी जो कुछ युवाओं को समाज की व्यथा समझ में आया और हमारे मर्गदर्शक आदरणीय जयस संरक्षक dr हीरा लाल अलवजी विगत 6- 7 वर्षों से लगातार बिना रुके बिना थके निरंतर युवाओं में जोश और जुनून भरते आ रहे हैं , आप सभी को मैं कहना चहता हूं कि सिर्फ़ हमारी अनभिज्ञता के कारण ही आज हमारा समाज पलायन, अशिक्षा, बेरोजगारी, भुखमरी, कुपोषण , जैसे गम्भीर समस्याओ से ग्रसित है, इसका मतलब यह भी नहीं की आदिवासियों के सरक्षण के लिए कोई योजना नहीं है, विगत 72 वर्षों में आदिवासियों के बड़ी बड़ी योजनाएँ बनी मगर उसका असर जमी पर नहीं कागजों तक सिमट कर रह गया, हम बात करते हैं 26 जनवरी 1950 को बाबा साहब द्वारा बनाई गई भारतीय संविधान को अंगीकृत किया गया जो आज भारतीय प्रजातांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देता है, जिसमें बाबा साहब ने एक ऐसा व्यवस्था किया जिसमें आदिवासियों के सुरक्षा एवं संरक्षण जिम्मा है अनुच्छेद 244(1) पाँचवी अनुसूची जो आज तक जमी पर एम्लिमेंट नहीं किया गया आज भी अधिसूचित क्षेत्र अपने मौलिक अधिकारों से वंचित है जिसके वजह से न तो आदिवासियो का विकास हुआ न ही उनकी अर्थव्यवस्था सुधरी जब से मुझे समझ आया कि की कुछ तो गलत हो रहा है तो हमने अध्यन करने का प्रयास किया तो पता चला कि विगत 72 वर्षों से हमारे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व हमारे समाज के लोग ही करते आए हैं लेकीन उनके जुबां का चाबी किसी और के पास होता है यहां बैठे लोग गुन्गे और बहरे ही सदन तक जाते हैं और वहाँ पर जाकर जी हुजूरी में लग जाते हैं की कहीं उनका टिकट न कट जाय हम आप सभी को विश्वाश दिलाना चाहते हैं कि आप सदन में जाएं जाने का जरिया कोई भी हो लेकिन आप अपनी और अपने समाज की बात सदन पर डंके की चोट रखेंगे क्योंकि आप समाज से चुनकर जाएंगे जयस कोई राजनैतिक दल नहीं मगर युवाओं में जोश और जुनून भरने का दवा है जो इसे समझ गया समाज की बात करेगा और आज पूरे देश में जयस अपनी अवाज खुलकर रखता है और आप भी अपनी बात खुलकर रख सकें इसलिए जयस महापंचायत आवश्यक है तो आइए 16 फरवरी 2020 को पुष्पराजगढ में एक जोश लेकर निकलते हैं जिससे हम जब भी किसी को चुने यह निर्णय कर सकें की क्या यह बन्दा समाज के लिए योग्य है या नहीं जयस सिर्फ एक विचार है जो लोगों को सोंचने के लिए मजबूर करता है आप भी सोंचे आप क्या करना चाहते हैं।
जय आदिवासी जय सेवा
दिनेश श्याम प्रभारी अनूपपुर

No comments:
Post a Comment
you have any dauts, Please info me know