दिनांक
13 जनवरी, 2020 को को
प्रातः 11:00 बजे के
लगभग जैसे ही
"आदिवासियत बचाओ यात्रा-2020"
महासम्मेलन स्थल कोलगांव,
जिला पालघर, महाराष्ट्र
पहुंची । वहां
पहले से ही
इंतजार कर रहे
आप कालूराम धोदडे़
जी, संस्थापक अध्यक्ष-आदिवासी एकता परिषद,
भूपेंद्र भाई चौधरी
जी, अध्यक्ष-आदिवासी
एकता परिषद, अशोक
भाई चौधरी जी,
महासचिव-आदिवासी एकता परिषद,राजेंद्र गावित जी,सांसद पालघर,
अमरसिंह भाई चौधरी
जी, पूर्व सांसद
एवं संस्थापक अध्यक्ष-आदिवासी समन्वय मंच,
भारत एवं आदिवासी
एकता परिषद के
अध्यक्ष मंडल के
सदस्य आप साधना
बहन मीणा- राजस्थान,
मोगजीजभाई भगोरा- राजस्थान, जीवराज
जी डामोर- राजस्थान,वाहरु दादा सोनवणे-महाराष्ट्र, रेखा ताई
पाड़वी- महाराष्ट्र, डोंगर भाऊ
बागुल- महाराष्ट्र, प्रभु टोकिया-दादरा नगर हवेली
आदि ने यात्रा
का स्वागत किया
एवं स्वागत द्वार
पर आदिवासी परंपरानुसार
पूजा अर्चना कर
आदिवासी प्रदर्शनी का उद्घाटन
किया गया ।
प्रदर्शनी की प्रमुख
बातें इस प्रकार
है स्वागत गेट
के पास ही
"देवी आंदोलन" की प्रदर्शनी
लगाई गई ।
देवी आंदोलन सन्
1921-22 में पालघर के समुद्र
तटीय इलाके से
चालू हुआ था
। इसमें चेचक
(Small pox) बीमारी के कारण घर
का शुद्धिकरण किया
जाता था ।
जिसमें मांसाहार व शराब
का सेवन करना
पूर्णतः वर्जित होता था
। यह आंदोलन
धीरे-धीरे साउथ
गुजरात की ओर
बढ़ा तथा यह
डांग, उत्तरी नासिक,
व्यारा व सूरत
आदि इलाके में
फैल गया गया
और सामाजिक जागरण
का रूप ले
लिया । जिसमें
लोगों के शरीर
में देवी की
आत्मा आती थी
जो आदेश देती
थी कि नशा
करना बंद करो,
साहुकारों के
काम करना बंद
करो, देश की
आजादी की लड़ाई
चल रही है-
उसमें सभघ लोग
शामिल हो आदि
फरमान शामिल थे
। देवी आंदोलन
की प्रदर्शनी के
सामने की ओर
ग्लोब बनाकर उसके
चारों ओर मानव
श्रृंखला बनायी गयी थी जो
आदिवासी एकता परिषद
के वैचारिक आंदोलन
को दर्शा रहा
था । मानव
श्रृंखला बनाकर आदिवासी एकता
परिषद के कार्यकर्ता
वैचारिक आंदोलन द्वारा अपनी
धरती माता को
बचाने का संदेश
दे रहे थे
। पांडाल के
बाई ओर छोटी-छोटी झोपड़िया
बनाकर उसमें भी
आदिवासी प्रदर्शनी लगाई गई
थी । जिसमें
आदिवासी के दैनंदिनी
में काम आने
वाली वस्तुओं को
दिखाया गया था
।
आदिवासी साहित्य,व्यंजन व
वस्तुओं के स्टाल
:-
आदिवासी
साहित्य एवं पारंपरिक
व्यंजनों के 100 स्टाल पांडाल के बाई
ओर लगाये गये
थी । जिसमें
आदिवासी साहित्य, व्यंजन एवं
वस्तुएं मिल रही
थी ।
आदिवासी
महिला सम्मेलन :-
आदिवासी
एकता परिषद द्वारा
वर्ष 2018 से सम्मेलन
में एक दिवस
बढ़ाया जाकर 13 जनवरी से
कार्यक्रम प्रारंभ किया जाने
हैं जिसमें महिला
नेतृत्व को निखारने
व अवसर देने
हेतु महिला सम्मेलन
का आयोजन किया
जाता है महिला
सम्मेलन की शुरुआत
दोपहर 1:00 बजे से
5:00 बजे तक चला
जिसमें कई राज्य
की महिलाओं ने
भाग लिया ।
महिला सम्मेलन की
शुरुआत में
प्रारंभ में
पांचों राज्य की प्रमुख
महिला कार्यकर्ताओं को
मंच पर बुलाया
गया । 27 वें
आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन
के महिला सम्मेलन
के अध्यक्ष आप
पुजा कुंवरा जी
घोषणा की गई
। महिला सम्मेलन
के अध्यक्ष एवं
प्रमुख महिला कार्यकर्ताओं द्वारा
झलकारी बाई एवं
वीरांगना रानी दुर्गावती,
प्रकृति तथा शहीदों
की पूजा अर्चना
कर सामूहिक रूप
से धरती वंदना
गाकर सम्मेलन की
शुरुवात की गई
। सभी राज्य
से आए हुए
कार्यकर्ताओं के स्वागत
में तारपा नृत्य
किया गया ।
पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा
बहन वसावा द्वारा
अध्यक्ष का स्वागत
किया गया ।
स्वागत भाषण एडव्होकेट
मीना धोदडे़ जी
महाराष्ट्र द्वारा किया गया
। प्रस्तावना आप
साधना बहन सदस्य
अध्यक्ष मंडल आदिवासी
एकता परिषद द्वारा
रखी गयी ।
इसके बाद सभी
राज्य के प्रतिवेदन
रखे गये ।
मध्य प्रदेश -सेवंती
आर्य, सहायक प्राध्यापक
शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय खरगोन
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र-
रंजना पावरा, गुजरात-
दमयंती बहन चौधरी,
दादरा नगर हवेली-
पूनम रेडिया, राजस्थान-
साधना बहन मीणा
द्वारा रखा गया
है । तत्पश्चात
विषय पर प्रबोधन
किया गया ।
जिसमें प्रमुख रुप से
आदिवासी समाज के
अस्तित्व बचाने में महिलाओं
का योगदान और
लिंगभेद पर आदिवासी
महिलाओं के सैद्धांतिक
भूमिका -कुसुम आलाम (महाराष्ट्र),
आदिवासी महिलाओं का नेतृत्व
व स्वावलंबन-डॉ
राधा डामोर (मध्य
प्रदेश), आदिवासी महिलाओं पर
कानूनी व पारंपरिक
अधिकारों का प्रभाव-
एडवोकेट सुमित्रा बहन वसावा
(गुजरात), आधुनिक विकास का
आदिवासी महिलाओं पर प्रभाव-
निता काटकर (महाराष्ट्र),
आदिवासी समाज की
एकता में महिलाओं
की भूमिका-रेखा
ताई पाड़वी सदस्य
अध्यक्ष मंडल आदिवासी
एकता परिषद (महाराष्ट्र),
दादरा नगर हवेली
में आदिवासी महिलाओं
की चुनौतियां -पायल
जी (दादरा नगर
हवेली), आदिवासी ग्रामीण व
शहरी महिलाओं की
समस्याएं- गोरी लहंगे,
पुणे (महाराष्ट्र), आलमा
ग्रेस बारला (दिल्ली)
भावना ईलपाची (महाराष्ट्र),
ललिता लकडा़ (दिल्ली),
श्रेया जेसिका धाम (झारखंड),पुनम भोरिया(दानह) आदि ने
संबोधित किया ।
महिला सम्मेलन का
संचालन-सुमित्रा वसावा (गुजरात),
हेमलता कटारा (मध्य प्रदेश),
निता काटकर (महाराष्ट्र)
तथा आभार सुप्रिया
उराडे़ (महाराष्ट्र) द्वारा किया
गया ।
आदिवासी
सतत भविष्य की
ओर...विचार मंथन
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