दिनांक 13 जनवरी,2020 को दोपहर 1:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक आदिवासी सतत् भविष्य की ओर.. प्रमुख थीम पर 10 अलग-अलग विषयों पर देश विदेश के विद्वानों द्वारा चिंतन मंथन किया गया । प्रमुख विषय इस प्रकार है :- - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Wednesday, January 22, 2020

दिनांक 13 जनवरी,2020 को दोपहर 1:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक आदिवासी सतत् भविष्य की ओर.. प्रमुख थीम पर 10 अलग-अलग विषयों पर देश विदेश के विद्वानों द्वारा चिंतन मंथन किया गया । प्रमुख विषय इस प्रकार है :-


      दिनांक 13 जनवरी,2020 को दोपहर 1:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक आदिवासी सतत् भविष्य की ओर.. प्रमुख थीम पर 10  अलग-अलग विषयों पर देश विदेश के विद्वानों द्वारा चिंतन मंथन किया गया प्रमुख विषय इस प्रकार है :-

1आदिवासी लैंगिक मुद्दे
2आदिवासी शिक्षा प्रणाली। 3आदिवासी स्वास्थ्य सेवा 4आदिवासी युवा जीवन चौराहे  पर
5आदिवासी संस्कृति और अन्य धर्मों का प्रभाव
6आदिवासी राजनीतिक नेतृत्व का भविष्य
7आदिवासी स्वशासन और अधिकार
8स्थिरता के लिए आदिवासी आर्थिक प्रणाली
9प्राकृतिक संपदा पर अधिकार स्वामित्व
1⃣0⃣ पारिस्थितिक लोकतंत्र और वैकल्पिक विकास
     उक्त विषयों पर चिंतन मंथन हेतु विषय विशेषज्ञ एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा हैदराबाद विश्वविद्यालय के लगभग 20 शोधार्थियों ने भाग लिया विशेष रुप से फुलमान चौधरी, उपाध्यक्ष- यूनाइटेड नेशंस परमानेंट फोरम ऑन इंडिजिनियस पीपुल्स इश्यूज, अन्ना बेले भाषविद अमेरिका, बेंजामिन न्यूजीलैंड, भूपेंद्र चौधरी अध्यक्ष-आदिवासी एकता परिषद, अशोक भाई चौधरी, महासचिव-आदिवासी एकता परिषद, उवासु गांवकर गोवा ,प्रदेश अध्यक्ष-ऑल इंडिया ट्राइबल एंप्लाइज फेडरेशन गोवा, रमेश तावड़कर, पूर्व कैबिनेट मंत्री गोवा सरकार, एडवोकेट पापाराव तेलंगाना, टीकाराम प्रधान- नेपाल, जगत बहादुर- नेपाल, प्रोफेसर विपिन जोजो, टाटा सोशल इंस्टीट्यूट, मुंबई, डॉ अभय खाखा जेएनयू दिल्ली, डॉक्टर ल्युक मेंडिज,मुंबई,पोम्पी होजांग आसाम, स्टालिन एनजिटी आसाम, के सी मारड़ी झारखंड, विंसेंट एक्का इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट दिल्ली, वाहरू सोनवाने, साहित्यकार एवं संस्थापक सदस्य, आदिवासी एकता परिषद, अमरसिंह भाई चौधरी पूर्व सांसद एवं संस्थापक अध्यक्ष -आदिवासी समन्वय मंच, भारत, एडवोकेट निकोलस बारला उड़ीसा, प्रभु टोकिया दादरा नगर हवेली आदि सहित लगभग 100 से अधिक विद्वानों ने भाग लिया

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