प्रभु यीशु मसीह के वचन -याकूब का मलयुद्ध - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Thursday, February 12, 2026

प्रभु यीशु मसीह के वचन -याकूब का मलयुद्ध

 

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याकूब का मलयुद्ध

उसी रात वह उठा और अपनी दोनों स्त्रियों औरदोनों उदासियों और 11 लड़कों को संग लेकर घाट सेया बुक नदी के पार उतर गया उसने उन्हें उसे नदी के पार उतार दिया वर्णन अपना सब कुछ पर उतार दिया और याकूब आप अकेलारह गया तब कोई पुरुष आकर पांव फटने तक उसे मल युद्ध करता रहा जब उसने देखा कि मैं याकूब पर प्रबल नहीं होता तब उसकी जांघ की नस को छुए और याकूब की जंग की नस उसे मल युद्ध करते ही करते चढ़ गईतब उसने कहा मुझे जाने दे क्योंकि भोर होने वाला है याकूब ने कहा जब तक तू मुझे आशीर्वाद ना दे तब तक मैं तुझे जाने नहीं दूंगा और उसने कहा याकूब उसने कहा तेरा नाम अब याकूब नहीं परंतु इसराइल होगा क्योंकि तू परमेश्वर से और मनुष्यों से भी युद्ध करके प्रबल हुआ है याकूब ने कहा मैं विनती करता हूं मुझे अपना नाम बता उसने कहा तू मेरा नाम क्यों पूछता हैतब उसने उसको वही आशीर्वाद दिया तब याकूब ने यह कहकर उसे स्थान का नाम  रखा परमेश्वर को आमने-सामने देखने पर भी मेरा प्राण बच गया हैपनवेल के पास से चलते-चलते सूर्य उदय हो गया और वह जंग से लड़खड़ाता था इजरायली जो पशुओं की जान को जोड़ वाले जगन्नाथ को आज के दिन तक नहीं खाते इसका कारण यही है कि उसे पुरुष ने याकूब की जंग की जोड़ में गंगानस को छुआ था

याकूब और एसाव का मिलन

याकूब ने आंखें उठाकर यह देखा किऐसा कर सो पुरुष सॉन्ग लिए हुए चला आता है तब उसने बच्चों को अलग-अलग बताकर लिया और राहुल और दोनों राशियों को सौंप दिया और उसने सबसे आगे लड़कों समेत दशन को उसके पीछे लड़कों समेट लिया को और सब के पीछे रहे और यूसुफ को रखा और आप उन सबके आगे बढ़ा और सात बार भूमि पर गिर के दंडवत की और अपने भाई के पास पहुंचा तब ऐसा हो उसे भेंट करने को दौड़ा और उसको हृदय से लगाकर गले से निपट कर चुम्मा फिर भी दोनों रो पड़े तब उसने आंखें उठाकर स्त्रियों और बच्चों को देखा और पूछा यह जो तेरे साथ हैं वह कौन है उसने कहा यह तेरे दास के लड़के हैं जिन्हें परमेश्वर ने अनुग्रह करके मुझको दिया है तब लड़कों समेत दशन ने निकट आकर दंडवत किया फिर लड़कों समेट लिया निकट आई और उन्होंने भी दंडवत कियाअंत में युसूफ और राहुल ने भी निकट आकर दंडवत किया तब उसने यह शुभ तेरा यह बड़ा दल जो मुझको मिला उसका क्या प्रयोजन है उसने कहा यह कि मेरे प्रभु की अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो पेशाब ने कहा है मेरे भाई मेरे पास तो बहुत है जो कुछ तेरा है वह तेरा ही रहे याकूब ने कहा नहीं नहीं यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो तो मेरी भेंट ग्रहणकर क्योंकि मैं तेरा दर्शन पाकर मानो परमेश्वर का दर्शन पाया है और तू मुझसे प्रश्न हुआ हो इसलिए यह भेंट जो तुझे भेजी गई है ग्रहण कर क्योंकि परमेश्वर ने मुझ पर अनुग्रह किया है और मेरे पास बहुत है जब उसने उसे बहुत आग्रह किया तब उसने भेंट को ग्रहण किया

फिर ऐसा होने कहा हम बढ़ चले और मैं तेरी आगे चलूं या खूब ने कहा है मेरे प्रभु तू जानता ही है कि मेरे साथ सुकुमार लड़के और दूध देने हरि भेड़ बकरियां और गए हैं यदि ऐसे पशु एक दिन भी अधिक आगे जाए तो सब के सब मर जाएंगे इसलिए मेरा प्रभु अपने दास के आगे बढ़ जाए और मैं इन पशुओं की गति के अनुसार जो मेरे आगे हैंऔर बच्चों की गति के अनुसार धीरे-धीरे चलकर सहराई में अपने प्रभु के पास पहुंचूंगा ऐसाओं ने कहा तो अपने साथियों में से मैं कई एक तेरे साथ छोड़ जाऊं उसने कहा यह क्यों इतना ही बहुत है कि मेरे प्रभु के अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे तब ऐसा आपने उसी दिन सहराई जाने को अपना मार्ग लिया परंतु याकूब वहां से निकलकर सुक्कोट को गया और वह अपने लिए एक घर और पशुओं के लिए झोपड़ी बनाई इसी कारण उसे स्थान का नाम सुकोट पड़ा

याकूब जो बादल राम से आया था उसने कनान देश के सकीम नगर के पास कुशलक्षेत्र से पहुंचकर नगर के सामने देरी खड़े किया और भूमि के जी खंड पर उसने अपना तंबू खड़ा किया उसको उसने सकीम के पिता हम और के पुत्रों के हाथ से 100 का सीटों में माल लिया वहां उसने एक बेदी बनाकर उसका नाम इसराइल रखा

 

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