साथियों हूल जौहार..जय सेवा.जय गोंडवाना !!
1 नवंबर मूलनिवासियों के लिए काला दिवस हैं और हर साल मनाते रहेंगे कब तक.? ? जब तक गोंडवाना राज्य ना बन जाऐं तब तक 🌷🌻🌼🌺 जब गोंडवाना प्रदेश बन जाऐगा तब हमे वा गोंडवाना वालों को खुशी होगी 🌺🌼🌻🌷
बड़े दुःख के साथ गोंडवाना के सभी मूलनिवासियों को सूचित किया जाता हैं कि गोंडवाना राज्य का गठन इस प्रकार से होना था लेकिन सत्ता के दिगूओ ने उसका नाम हटाकर मध्यप्रदेश कर दिया ये बड़ी विडंबना हैं !
चलो कोई बात नही मध्यप्रदेश से हट कर अब भी गोंडवाना राज्य बन सकता हैं 53 जिला में से 24 जिला को शामिल कर गोंडवाना प्रदेश बन सकता हैं !
मंडला.डिंडोरी.बालाघाट.सिवनी.उमरिया.शहडोल.
जबलपुर.अनूपपुर.होशंगाबाद.हरदा.बैतूल.छिंदवाड़ा.
कटनी.सीधी.सिंगरौली.रायसेन.टीकमगढ़.छत्तरपुर.रीवा.
पन्ना.बरहानपुर.सतना.खंडवा.दमोह.नरसिंगपुर !!
आप सभी जानते हैं कि भारत को आजाद हुऐ कई वर्ष बीत चुके परंतु जैसे ही भारत सन 1947 को आजाद हुआ और स्वतंत्र भारत वर्ष सन 1956 में भाषा वार राज्यों का गठन कर राज्यों का बंटवारा तो हुआ जैसे :- बंगालियों को ..बंगाल मिला ? ? तमिल को ..तमिलनाडु मिला ? ? मद्रासियों को ...मद्रास मिला ? ? पंजाबियों को ..पंजाब मिला ? ? मराठियों को ...महाराष्ट्र मिला ? ? गुजरातियों को ..गुजरात मिला ? ? बिहारियों को ..बिहार मिला ? ? उडियां को ..उड़ीसा मिला ? ?
लेकिन मध्यप्रदेश में 25 लाख से अधिक गोंडी भाषा बोलते हैं ! उसी भाषा के हिसाब से गोंडवाना राज्य का गठन होना था !
सत्ता में चूर रहने वाले नकबूजरे लोगों ने आदिवासी बाहुल्य राज्य को मध्यप्रदेश राज्य नाम दे दिया जो इस क्षेत्र में रहे रहे मूलनिवासियों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया !!
मध्यप्रदेश राज्य बनने के बाद.फिर पृथक गोंडवाना राज्य कि मांग होनी लगी 24 जिलों को लेकर.तो ये फिर हरामखोरी करके आनन फानन में मध्यप्रदेश से काटकर छत्तीसगढीयों के लिए 1 नवंबर 2000 को नया राज्य बनवा दिया ..छत्तीसगढ़ राज्य !!
अब गोंडवाना वालों को क्या मिल रहा हैं जबकि जिस प्रदेश में 80%जनता गोंडी बोली बोलते हैं ! यहाँ तक कि बाहर से आकर बसे हुऐ अदर कौम के गैर लोग भी अपना धंधा.व्यापार.करोबार चलाने के लिए गोंडी बोली का इस्तेमाल करते हैं !
और आज भी कई यैसे गाँव हैं जिसमें गैर गोंड भी गोंडी भाषा सीखकर पढ़कर अपना करोबार चला रहा हैं !
1 नवंबर मूलनिवासियों के लिए काला दिवस हैं और हर साल मनाते रहेंगे कब तक.? ? जब तक गोंडवाना राज्य ना बन जाऐं तब तक 🌷🌻🌼🌺 जब गोंडवाना प्रदेश बन जाऐगा तब हमे वा गोंडवाना वालों को खुशी होगी 🌺🌼🌻🌷
बड़े दुःख के साथ गोंडवाना के सभी मूलनिवासियों को सूचित किया जाता हैं कि गोंडवाना राज्य का गठन इस प्रकार से होना था लेकिन सत्ता के दिगूओ ने उसका नाम हटाकर मध्यप्रदेश कर दिया ये बड़ी विडंबना हैं !
चलो कोई बात नही मध्यप्रदेश से हट कर अब भी गोंडवाना राज्य बन सकता हैं 53 जिला में से 24 जिला को शामिल कर गोंडवाना प्रदेश बन सकता हैं !
मंडला.डिंडोरी.बालाघाट.सिवनी.उमरिया.शहडोल.
जबलपुर.अनूपपुर.होशंगाबाद.हरदा.बैतूल.छिंदवाड़ा.
कटनी.सीधी.सिंगरौली.रायसेन.टीकमगढ़.छत्तरपुर.रीवा.
पन्ना.बरहानपुर.सतना.खंडवा.दमोह.नरसिंगपुर !!
आप सभी जानते हैं कि भारत को आजाद हुऐ कई वर्ष बीत चुके परंतु जैसे ही भारत सन 1947 को आजाद हुआ और स्वतंत्र भारत वर्ष सन 1956 में भाषा वार राज्यों का गठन कर राज्यों का बंटवारा तो हुआ जैसे :- बंगालियों को ..बंगाल मिला ? ? तमिल को ..तमिलनाडु मिला ? ? मद्रासियों को ...मद्रास मिला ? ? पंजाबियों को ..पंजाब मिला ? ? मराठियों को ...महाराष्ट्र मिला ? ? गुजरातियों को ..गुजरात मिला ? ? बिहारियों को ..बिहार मिला ? ? उडियां को ..उड़ीसा मिला ? ?
लेकिन मध्यप्रदेश में 25 लाख से अधिक गोंडी भाषा बोलते हैं ! उसी भाषा के हिसाब से गोंडवाना राज्य का गठन होना था !
सत्ता में चूर रहने वाले नकबूजरे लोगों ने आदिवासी बाहुल्य राज्य को मध्यप्रदेश राज्य नाम दे दिया जो इस क्षेत्र में रहे रहे मूलनिवासियों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया !!
मध्यप्रदेश राज्य बनने के बाद.फिर पृथक गोंडवाना राज्य कि मांग होनी लगी 24 जिलों को लेकर.तो ये फिर हरामखोरी करके आनन फानन में मध्यप्रदेश से काटकर छत्तीसगढीयों के लिए 1 नवंबर 2000 को नया राज्य बनवा दिया ..छत्तीसगढ़ राज्य !!
अब गोंडवाना वालों को क्या मिल रहा हैं जबकि जिस प्रदेश में 80%जनता गोंडी बोली बोलते हैं ! यहाँ तक कि बाहर से आकर बसे हुऐ अदर कौम के गैर लोग भी अपना धंधा.व्यापार.करोबार चलाने के लिए गोंडी बोली का इस्तेमाल करते हैं !
और आज भी कई यैसे गाँव हैं जिसमें गैर गोंड भी गोंडी भाषा सीखकर पढ़कर अपना करोबार चला रहा हैं !
साथियों देश आजाद हुऐ कई पीढ़ी गुजर गया.समाज के बेटा गैर दलों से विधायक.सांसद.राज्यसभा सांसद.मंत्री सब बने और आज भी बने हुऐ लेकिन गोंडवाना राज्य के लिए इन्होने कभी अपना मुहँ तक नही खोला सदन में.? समाज के रहते इनको डर किस बात की ? ? ये समझ में नही आ रहा हैं !
कई राज्यों से कटकर .उत्तराखंड.तेलंगाना.झारखंड राज्य बना ..? ? ? ?
लेकिन कुछ राजनैतिक गुलाम गिरी लोगों के कारण इस भूमि के मालिकों के साथ धोखा किया गया.और गोंडी भाषा को कही जगह नही दी गई यह साजिश हैं गोंडवाना भूमि के मूल संस्कृति और भाषा कों विलुप्त करने के साथ साथ आप सभी के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ हैं इसलिए 1नवंबर मूलनिवासियों के लिए काला दिवस हैं !!
सादर हूलजौहार.पुरुड जौहार.उलगुलान जारी रहें !
सम्पूर्ण कोयवंशी कोयतुर मुलनिवासी समाज


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