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Monday, October 21, 2019

चांद भी क्या खूब है, न सर पर घूंघट है, न चेहरे पे बुरका,


चांद भी क्या खूब है,
सर पर घूंघट है,
चेहरे पे बुरका,

कभी करवाचौथ का हो गया,
तो कभी ईद का,
तो कभी ग्रहण का

अगर

ज़मीन पर होता तो
टूटकर विवादों मे होता,
अदालत की सुनवाइयों में होता,
अखबार की सुर्ख़ियों में होता,


लेकिन

शुक्र है आसमान में बादलों की गोद में है,
इसीलिए ज़मीन में कविताओं और ग़ज़लों में महफूज़ है
अनूपपुर :- मध्यप्रदेश में अनुपपुर जिले के अमरकंटक के समीप ग्राम पोडकी में बने मां शारदा कन्या विद्यापीठ आश्रम की कहानी बहुत ही दिलचस्प है यह मध्यप्रदेश सरकार के कई नुमाइंदे चुके और लंबा लंबा चौड़ा चौड़ा फेक कर चले गए यही नही यहाँ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी एक रात रुक चुके है आज दिनांक 18 /10/2019 तक में आश्रम के कर्ता धर्ता डॉ. प्रवीण सरकार राष्ट्रपति श्री .पी.जे. अब्दुल कलाम से लेकर राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी तक जमीन के लीज के लिए चक्कर लगा चुके है लेकिन अभी तक कोई इस आश्रम को जमीन का लीज नही दिला सके जबकि स्थानीय दानदाता ने अपने पट्टे की जमीन को दान देकर .प्र.शासनए के नाम लगभग 15 वर्ष पहले कर चुके है यहाँ मंत्री से संत्री तक आते है और कोरे वादे करके जाते है जबकि यहाँ के कर्ता धर्ता डॉ. प्रवीण सरकार सेंट्रल गवर्मेन्ट की नोकरी छोडकर 25 वर्षो से बैगा आदिवासी क्षत्राओ की जिंदगी से सवारने में लगे है 70 वर्ष की उम्र में भी गजब का साहस और सत्य की उम्मीद लिए बैठे थे कि एक दिन इनके आश्रम में पहुचे अनुपपुर कलेक्टर श्री चंद्रमोहन ठाकुर जिन्होंने उनकी उम्मीद की दीपक में घी डालकर उम्मीद को दीपक की रोसनी को तेज करने का हरसंभव प्रयास करने की ठान लिए है !!

अनुकरणीय शिक्षण का संदेश💐

एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है।

वे बड़े प्यार से पुछती है, 'अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?'

' मैं भी एक टीचर बन गया हूं ' वह व्यक्ति बोला,' और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।'

उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,' मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??'

वो व्यक्ति कहने लगा कि ....

'यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी  चोरी होने की आपसे शिकायत की थी।
आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।
टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भी आपने अपने व्यवहार से मुझे यह नही लगने दिया कि मैंने एक गलत कार्य किया था।
आपने बगैर कुछ कहे मुझे क्षमा भी कर दिया और दूसरे बच्चे मुझे चोर कहते इससे भी बचा लिया था।'

ये सुनकर टीचर बोली, ' मुझे भी नही पता था बेटा कि वो घड़ी किसने चुराई थी।'

वो व्यक्ति बोला,'नहीं टीचर, ये कैसे संभव है ? आपने स्वयं अपने हाथों से चोरी की गई घड़ी मेरे जेब से निकाली थी।'

टीचर बोली.....
'बेटा मैं जब सबके पॉकेट चेक कर रही थी, उस समय मैने कहा था कि सब अपनी आंखे बंद रखेंगे , और वही मैंने भी किया, मैंने स्वयं भी अपनी आंखें बंद रखी थी।'

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