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Monday, October 21, 2019

एक ऐसा महान नेतृत्व जिसे गैरों के साथ साथ अपनों ने भी दर किनार किया-


एक ऐसा महान नेतृत्व जिसे गैरों के साथ साथ अपनों ने भी दर किनार किया- डॉ. सूरज धुर्वे

दादा हीरा सिंह मरकाम वैसे तो राजनैतिक व्यक्तित्व के तौर पर जाने पहचाने जाते हैं लेकिन उनकी पहचान गोंडवाना क्षेत्र में एक सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना लाने वाले महापुरुष और समाज सेवी के रूप में विकसित हुई है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में उन्हें देवता की तरह पूजा और चाहा जाता है.


मीडिया में उनको बस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में और पूर्व विधायक के रूप में ही जाना समझा गया है . दादा मरकाम छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जनजातियों के लिए वही काम कर रहे हैं जो काम उत्तर प्रदेश में मान्यवर कांशीराम ने अनुसूचित जातियों के लिए किया था .  हजारों लोगों से उनके बारे में कहानिया और बाते सुनने को मिलती हैं लेकिन मीडिया और साहित्य में वो कहीं नहीं दिखते.

मुझे जान कर बड़ा आश्चर्य हुआ कि समाज में इतना अधिक परिवर्तन ले आने वाला व्यक्ति और समाज सेवी आज मुख्य धारा की मीडिया में कहीं नहीं दिखता. जो कुछ भी कहीं थोड़ा बहुत लिखा गया है बस राजनैतिक व्यक्तित्व के हवाले से लिखा गया है.

ऐसे व्यक्तित्व पर तो फिल्में बनायीं जा सकती है और कई किताबें लिखी जा सकती हैं. मैंने जितना भी जाना मुझे लगा कि इस व्यक्ति को समाज और दुनिया के सामने लाना चाहिए . कैसे इतना बड़ा परिवर्तन एक मुट्टी चावल के आन्दोलन से लाया जा सका?

आज कोइतूर समाज में जो भी राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना उभरी है वो सब इस महान व्यक्तित्व के कारण संभव हुई हैं वरना कोइतूरों की सांस्कृतिक पहचान तो बिलकुल ख़त्म हो चुकी थी.

मैंने राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर उनके बारे में जानने समझने के लिए खोज बीन की लेकिन कहीं कुछ आधिकारिक और प्रामाणिक तौर पर कुछ भी नहीं लिखा गया है।  जो कुछ भी लिखा है वह थोड़ा बहुत उनकी रैलियों और राजनीतिक समाचारों के हवाले से है।  उनके बारे में किसी भी राष्ट्रीय या राज्य स्तर के न्यूज़ पोर्टल पर कोई विशेष सूचना उपलब्ध नहीं है और ही ब्राह्मणवादी मीडिया ने कभी ऐसे महान व्यक्तित्व के बारे में कोई अच्छी बात लिखी है। मैं ब्राह्मण वादी मीडिया को ही क्यूँ कोसूँ उनकी पार्टी और उनके चाहने वालों ने भी कभी उनको दुनिया के सामने लाने के बारे में नहीं सोचा, बोला, लिखा।

आइये अपने ही बीच के एक ऐसे महा नायक के बारे में जानने की कोशिश करते हैं और उनके योगदान को समझने का प्रयास  करते हैं ! मेरा आप सभी लोगों से अनुरोध है कि अगर कहीं भी दादा हीरा सिंह मरकाम से संबन्धित कोई प्रामाणिक जानकारी,  सूचना, संस्मरण, जीवनी, कहानी या अन्य कोई रोचक घटना छपी हो या ज्ञात हो तो आप मुझे मेरे ईमेल koitoor2019@gmail.com पर या मेरे मोबाइल /व्हाट्स अप नंबर 8989988767 पर भेज कर सूचित कर सकते हैं। आइये सब मिलकर एक महान इतिहास को सृजित करने का पुनीत कार्य करें।

डॉ सूर्या बालीसूरज धुर्वे

1 नवंबर सन् 1956 की घटना हमें याद है इसलिए हम गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लोग फर्जी संगठनों और फर्जी मुद्दों के जाल पर नहीं फंसा करते हैं माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी। ये सब्जबाग आप आप उन सामाजिक संगठनों और उनके कार्यकर्ताओं को दिखाईये जो मानसिक,बौद्धिक और ऐतिहासिक रूप से नाबालिग हैं तथा वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार के भोंपू का कार्य कर रहे हैं।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी 1 नवंबर को पहले से ही काला दिवस मनाते आई हैं और मनाती रहेंगी,क्योंकि इस दिन भाषावार प्रांतों का गठन हुआ था.......लेकिन हम गोंडी भाषियों को गोंडवाना राज्य नहीं मिला।

अनिल सिंह धुर्वे
राष्ट्रीय अध्यक्ष
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी युवा मोर्चा

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