टीचर ने भी कहा कि, जब तुम बड़े हो जाओगे तब समझोगे | आज सोनू बड़ा हो गया है फिर भी इन बातो को समझने मे उसे मुश्किल हो रही है की, किसे सच माने और किसे झूठ !
आकांक्षा सायन्स की छात्रा थी। एक दिन उसकी माँ ने उस से कहा "तुम नहा कर रोजाना सूर्य भगवान को जल चढ़ाया करो।इस से तुम्हें हर चीज मे कामयाबी मिलेगी।” इस पर आकांक्षा बोली, “माँ आप को पता नहीं है कि सूर्य भगवान नहीं है | सूर्य सौर्य मण्डल का एक तारा है जो धरती से कई गुना बड़ा है।”
इस पर आकांक्षा की माँ बोली , “ क्या वे सभी लोग बेवकूफ हैं जो सूर्य देवता को जल चढ़ाते है ?” आकांक्षा समझ नहीं पाई कि किताब की बाते सच माने या अपनी माँ की !
एक बार जब भूकम्प और तूफान आया तो उदयवीरवीर के दादा जी ने बताया कि, " धरती शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और जब शेषनाग करवट बदलता है तो वह हिलने लगती है। " उदयवीर ने अपने दादा को जवाब दिया की, " दादा जी ! मेरी किताब मे लिखा हुआ है की, धरती धुरी पर 23 डिग्री पर झुकी हुई है । जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस मे टकराती है तो भूकंप आता है।” दादा जी ने नन्हे उदयवीर को डाँट लगाईं! इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हमारे समाज मे देखने को मिलते है जो नई पीढ़ी को परेशानी में डाल देते हैं।
विज्ञान तर्क के आधार पर किसी भी बात को पुख्ता करता है ताकि विद्यालय मे पढ़ने वाले उसे समझे और अपनी जिंदगी मे उतारे। जबकि धर्म से जुड़ी किताबे यहां-वहां से इकठ्ठा की गई बातों का पुलिंदा होती हैं जिन मे अंधविश्वास भरा होता है | इस से बच्चो को समझ मे नहीं आता वह किस पर विश्वास करें।
कुछ लोग कहते है हमारे पूर्वज इसे मानते थे इसलिए हम भी मानेंगे। भाई ! तो हमारे पूर्वज जंगल मे नंगे भी घूमते थे ।तो आप अब क्यों नहीं घूमते ? क्यों शूट बूट पहनना पसंद करते है!!
तर्कशील बने।
विज्ञानवादी बने।
भारत को सामर्थ्यशाली बनाएँ !
-- अज्ञात
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