फेंको घर की सभी मूर्ति, मुंह पे भीम का नाम रहे।
क्या है काली क्या है दुर्गा, सब का काम तमाम रहे।
इन महेश और ब्रह्मा, विष्णु, सीताराम के नारों को।
ख़त्म करें मनुवाद सभी हम, दूर करें अंधियारों को।
जब जब जली चिता हमारी, कोई नहीं तब आया है।
देख हमारी ऐसी हालत, पाखंडवाद मुस्काया है।
ना शिक्षा ना अधिकार दिए थे, मेरी कौम के प्यारों को।
ख़त्म करें मनुवाद सभी हम, दूर करें अंधियारों को।
हमसे मैला उठवाया, बहू बेटी का ना मान रहा।
ना थी कोई इज्जत बाकी, ना कोई सम्मान रहा।
दलित रह गया बन के जूती, पूज के इन मक्कारों को।
ख़त्म करें मनुवाद सभी हम, दूर करें अंधियारों को।
जन्म हुआ फिर एक शेर का बाबा साहेब जिसको हम कहते हैं।
उसके दिए अधिकार भोगकर, हम हंसी ख़ुशी से रहते हैं।
भूल गए हम आज उसी को, और भूल गए उपकारों को।
ख़त्म करें मनुवाद सभी हम, दूर करें अंधियारों को।
पूछ रहा है भीम राव, तुमने फिर क्या काम किया।
जहाँ छोड़ा था मैंने कारवां, क्या उसको अंजाम दिया.?
सुनकर उसके बोल सभी ये, ना शर्म आई नक्कारों को।
ख़त्म करें मनुवाद सभी हम, दूर करें अंधियारों को।
चल कुछ ऐसा काम करें, कि उससे आँख मिला पाएं।
जातिमुक्त हो पीढ़ी अपनी, कुछ ऐसा हम कर जाएँ।
लेकर ताकत संविधान की, सिखा सबक गद्दारों को।
ख़त्म करें मनुवाद सभी हम, दूर करें अंधियारों को।
जय भीम जय संविधान जय भारत
..संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं ......
..आवाज दो हम एक हैं .........
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