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Saturday, September 28, 2019

संविधान में आदिवासी को अनुसूचित जनजाति लिखा हुआ है । आदिवासी dका मतलब होता है -


संविधान में आदिवासी को  अनुसूचित जनजाति लिखा हुआ है     

  आदिवासी dका मतलब होता है -
आदिकाल के निवास करने वाली ~जातियां आदिवासी का मतलब होता है ~ देशज ,
 प्रथम राष्ट्र,


1. जिस दिन हम शूद्रों (OBC,SC,ST) ने इनको पंडित जी, ठाकुर साहब , सेठ जी और बाबू साहब  कहना छोड़ दिया उसी दिन इनकी "सम्मानित मौत" हो जायेगी।

2. जिस दिन हमने इनकी रैलियों में जाना छोड़ दिया उसी दिन इनकी "राजनैतिक मौत" हो जाएगी।

3. जिस दिन हमने इनके मंदिरो में जाना छोड़ दिया उसी दिन इनकी "धार्मिक मौत" हो जायेगी।

4. जिस दिन हमने इनके त्योहारों को मनाना छोड़ दिया उसी दिन इनकी "आर्थिक मौत" हो जायेगी।

5. जिस दिन हमने इनकी दुकानों से सामान लेना छोड़ दिया उसी दिन इनकी "व्यवसायिक मौत" हो जायेगी

6. जिस दिन हमने इनको अछूत मानना शुरू कर दिया उसी दिन इनकी "सामाजिक मौत" हो जायेगी।

7. और अन्तिम बात है, जिस दिन इनको वोट देना बंद कर दिया, उस दिन इनका संपूर्ण अंत हो जाएगा और हम बहुजन स्वयं सत्ता के मालिक होंगे !

अपनी संस्कृति और परम्पराओं को ना भूलें
                     
 संविधान में आदिवासी को  अनुसूचित जनजाति लिखा हुआ है     
  आदिवासी dका मतलब होता है -
आदिकाल के निवास करने वाली ~जातियां आदिवासी का मतलब होता है ~ देशज ,
 प्रथम राष्ट्र,
यहाँ की धरती पर आदिकाल से निवास करने वाले लोग l
आदिवासी का मतलब होता है ~इंडिजिनस पीपुल्स
अनुसूचित जनजाति का मतलब~ ऐसी जातियां जो अनुसूची में कभी भी शामिल किया जा सकता है और कभी अनुसूची से बाहर किया जा सकता है
  अनुसूची में शामिल करने के लिए संविधान में जो पांच विशेष मापदंड तय किये है ~
 विशेष संस्कृति,
  आदिम विशेषतायें,
  दुसरो के संपर्क में आने से हिचक,
  भौगोलिक अलगाव  
 सामाजिक शैक्षणिक पिछड़ेपन
  जिनके आधार पर संविधान ने हमें अनुसूचित जनजाति कहा है अगर अनुसूचित जनजाति के इन पैमानों पर हम खरा नहीं उतरते है तो राष्ट्रपति को विशेष अधिकार है कि वह हमें कभी भी अनुसूचित जनजाति से बाहर कर सकता है l
  जैसे -गुजरात में राठवा समुदाय, छत्तीसगढ़ में भारिया जनजाति और झारखंड के तमाड़िया को अनुसूचित जनजाति से बाहर कर दिया गया है l क्योंकि उनकी धार्मिक परम्परायें जनजातीय समुदाय से मेल नहीं खाकर हिन्दू समुदाय से मेल खा रही थी इसलिए अपनी संस्कृति और धार्मिक परम्पराओं को ना छोड़े l अन्यथा  अनुसूचित जनजाति से भी बाहर किया जा सकता है l  इसलिए अनुसूचित क्षेत्रो में किसी भी गैर आदिवासी धार्मिक संगठनो को रोके l ये हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराओं पर सीधे सीधे हमला कर रहे है और जैसे- जैसे आप अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक, परम्पराओं को छोड़कर गैर जनजातीय परम्पराओं को अपनायेंगे तो हमारी संस्कृति परंपरा दूर हटते जाएगी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराओं को ना भूलें  जिससे   हमारे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य सुरक्षित हो•••


अपनी गोत्र-टोटम, संस्कृति,रीति- रिवाजों, रुढ़ी-परम्पराओं एवं प्रथाओं को संजोकर रखियेगा। नहीं तो अनुसूचित जनजाति के लिस्ट से अंदर-बाहर कभी भी संविधान के अनुच्छेद-342 के तहत हो सकता है।
       
  "आदिवासी तब तक आदिवासी है, जब तक उसका धर्म और संस्कृति जीवित है"
 .......
                                                 
🙏 जय भीम जय भारत जय संविधान🙏

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