पृथ्वी पर मनुष्य जाति की बुराई कैसे बढ़ गई?
मनुष्य जाति की दुष्टता
जब मनुष्य भूमि के ऊपर बहुत बढ़ने लगे और उनके बेटियां उत्पन्न हुई तब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्री को दिखाकि वह सुंदर है और उन्होंने जिस जिस को चाहा उनसे विवाह कर लिया तब यहोवा ने कहा मेरा आत्मा मनुष्य से सदा को विवाद करता ना रहेगा क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है उसकी आयु 120 वर्ष की होगी उन दिनों में पृथ्वी पर दानव रहते थे और इसके पश्चात जब परमेश्वर के पुत्र मनुष्य की पुत्री के पास गए तबउनके द्वारा जो पुत्र उत्पन्न हुए वह शूरवीर होते थे जिनकी कीर्ति प्राचीन काल से प्रचलित है
यहोवा ने देखा कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है और उनके मन के विचार में जोकुछ उत्पन्न होता है वह निरंतर बुरा ही होता है और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछतावा और वह मन में अति खेदित हुआ तब यहोवा ने कहा मैं मनुष्य को जिसकी मैं सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूंगाक्या मनुष्य क्या पशु क्या रहने वाले जीव जंतु क्या आकाश के पक्षी सब को मिटा दूंगा क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताते हूं परंतु यहोवा की अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रहे
नूह की वंशावली
नूह की वंशावली यह है नो धर्मी पुरुष और अपने समय के लोगों में खड़ा था और नो परमेश्वर ही के साथ-साथ चलता रहा और नूर से से औरहम और यह में नामक तीन पुत्र उत्पन्न हुए उसे समय पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी और उपद्रव से भर गई थी और परमेश्वर ने पृथ्वी पर जो सृष्टि की तो क्या देखा कि वह बिगड़ी हुई है क्योंकि सब प्राणियों ने पृथ्वी पर अपना अपना चाल चलन बिगाड़ लिया था
तो परमेश्वर ने नो से कहा सब प्राणियों के अंत करने का प्रश्न मेरे सामने आ गया है क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है इसलिए मैं उनको पृथ्वी समेत नष्ट कर डालूंगा इसलिए तू दोपहर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले उसमेंकोटिया बनाना और भीतर बाहर उसे पर लाल लगाना इस ढंग से तो उसको बनाना जहाज की लंबाई300 हाथ चौड़ाई50 हाथ और ऊंचाई 30 हाथ की हो जहाज में एक खिड़की बनाना और उसके एक हाथ ऊपर से इसकी छत बनाना और जहाज की एक और एक द्वारा रखना और जहांपर पहला दूसरा तीसरा खंड बनाना और सुन मैं आप पृथ्वी परजल प्रलय कर की सब प्राणियों को जिम जीवन का प्राण है आकाश के नीचे से नष्ट करने पर भी औरसब जो पृथ्वी पर हैं मर जाएंगे परंतु तेरे संग में वचन बांधता हूं इसलिए तू अपने पुत्रों स्त्री और बहू समेत जहाज में प्रवेश करना औरजीवित प्राणियों में से तो एक-एक जाति के दो दो अर्थात एक नर और एक माता जहाज में ले जाकर अपने साथ जीवित रखना एक-एक जाति के पक्षी और एक-एक जाति के पशु और एक-एक जाति की भूमि पर रहने वाले सब में से दो-दो तेरे पास आएंगे कि तू उनके जीवितउनको जीवित रखें और भांति-भांति का भोज्य पदार्थ जो खाया जाता है उनको तो लेकर अपने पास इकट्ठा कर रखना जो तेरे और उनके भोजन के लिए होगा परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार नो ने किया
जल प्रलय
कैसे हुआ
तब यहोवा नहीं ल से कहा तू अपने सारे घर आने समेत जहाज में जा क्योंकि मैं इस समय के लोगों में से केवल तुझी को अपनी दृष्टि में धार्मिक पाया है सब जाति के शुद्ध पशुओं में से तो तू साथ-साथ जोड़ अर्थात नर और मादा लेना पर जो पशु शुद्ध नहीं है उनमें से दो-दो लेना अर्थात नर और मादा और आकाश के पक्षियों में से भी साथ-साथ जोड़ अर्थात नर और मादा लेना कि उनके वंश बचकर सारी पृथ्वी के ऊपर बना रहे क्योंकि अब 7 दिन और जीतने पर मैं पृथ्वी पर 40 दिन और 40 रात तक जल बरसता रहूंगा और जितने प्राणीमैंने बनाए हैं उन सब को भूमि के ऊपर से मिटा दूंगा यहां यहोवा कीइस आज्ञा के अनुसार नो ने किया
नूह की आयु 600 वर्ष की थी जब जल प्रलय पृथ्वी पर आया नूह अपने पुत्रों पत्नी और बहू समिति जल प्रलय से बचने के लिए जहाज में गया शुद्ध और अशुद्ध दोनों प्रकार की पशुओं में से पक्षियों और भूमि पर रहने वाले जंटियों जंतुओं में से भी दो-दो अर्थात नर और मादा जहाज में नब के पास गए जिस प्रकार परमेश्वर ने नो को आज्ञा दी थी 7 दिन के उपरांत प्रलय कापृथ्वी पर आने लगा
जब अनु की आयु के600 वर्ष के दूसरे महीने का 17 व दिन आया उसी दिन बड़े गहरे समुद्र की सब सोते फुट निकले और आकाश की झरोखे खुल गए और वर्षा 40 दिन और 40 रात निरंतर पृथ्वी पर होती रही ठीक उसी दिन नो अपने पुत्र से हम और यह पेट और अपनी पत्नी और तीनों बहू समेत और उनके संग एक-एक जाति के सब बने ले पशु और एक-एक जाति के सब घरेलू पशु और एक-एक जाति की सब पृथ्वी पर रहने वाले जीव जंतु और एक-एक जाति के सब उड़ने वाले पक्षी जहाज में गए जितने प्राणियों में जीवन का प्राण थाउनकी सब जातियों में से दो-दो लोगों के पास जहाज में गए और जो गए हुए परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार सब जाती थी प्राणियों में से नर और मादा गए तब यहोवा ने जहाज का द्वार बंद कर दिया पृथ्वी पर 40 दिन तक जल प्रलय होता रहा और पानी बहुत बढ़ता ही गया जिससे जहाज ऊपर को उठने लगा और वह पृथ्वी पर से ऊंचा उठ गया जल बढ़ती बढ़ती पृथ्वी पर बहुत ही बढ़ गया और जहाज जल के ऊपर ऊपर जल पृथ्वी पर अत्यंत बढ़ गया यहां तक की सारी धरती पर जितने बड़े-बड़े पहाड़ थे सब डूब गएजल 15 हाथ और ऊपर बढ़ गया और पहाड़ भी डूब गए और क्या पक्षी क्या घरेलू पशु क्या बनाई ले पशु और पृथ्वी पर सब चलने वाले प्राणी और जितने जंतु पृथ्वी में बहुतायत से भर गए थे वह सब और सब मनुष्य मर गए जो जो स्थल पर थे उनमें से चित्रों के नथनों में जीवन का स्वास्थ्य था सब मर मीठे और क्या मनुष्य क्या पशु क्या रहने वालेजीव जान और क्या मनुष्य क्या पशु क्या रहने वाली जंतु क्या आकाश की पक्षी जो जो भूमि पर थे सब पृथ्वी पर से मिट गएकेवल नूह और जितने उसके संग जहाज में थे वही बच गए और जलपरी पर 150 दिन तक प्रलय करता रहा

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