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Tuesday, October 21, 2025

भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर (गुरुवार) kab aur kaise manaye भाई दूज 2025: शुभ मुहूर्त janiye

 भाई दूज 2025: शुभ मुहूर्त kab aur kaise manaye sahi samay kya hai janiye

Yaha ham bat karenge bhaiduj ke bare me.

भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर (गुरुवार) kab aur kaise manaye भाई दूज 2025: शुभ मुहूर्त janiye



भाई दूज भाई और बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक त्योहार है, जिसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

यहाँ भाई दूज मनाने की विधि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी दी गई है (कृपया ध्यान दें कि शुभ मुहूर्त की तिथियाँ और समय साल-दर-साल भिन्न हो सकते हैं। नीचे दी गई जानकारी 2025 के अनुसार है):

भाई दूज 2025: शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, 2025 में भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर (गुरुवार) को मनाया जाएगा।

 

विवरण

समय

द्वितीया तिथि प्रारम्भ

22 अक्टूबर 2025, रात 8:16 बजे

द्वितीया तिथि समाप्त

23 अक्टूबर 2025, रात 10:46 बजे

भाई को टीका करने का शुभ मुहूर्त (श्रेष्ठ समय)

दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक (लगभग 2 घंटे 15 मिनट)

अभिजीत मुहूर्त

सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक

शुभ मुहूर्त में तिलक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, खासकर दोपहर का समय सबसे श्रेष्ठ होता है।


भाई दूज मनाने की विधि

भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफल जीवन की कामना करते हुए विधि-विधान से तिलक करती हैं।

1. तैयारी:

·         स्नान और संकल्प: बहनें सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें। यदि संभव हो, तो इस दिन यमुना नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है।

·         पूजा की थाली: एक थाली तैयार करें जिसमें निम्नलिखित सामग्री रखें:

o    रोली या कुमकुम (तिलक के लिए)

o    अक्षत (चावल)

o    कलावा (रक्षा सूत्र)

o    मिठाई

o    सूखा नारियल (गोला)

o    दीपक (घी का)

o    फूल, सुपारी, पान (कुछ स्थानों पर)

·         चौकी/आसन: घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में आटे या चावल से चौक बनाएं और उस पर लकड़ी की एक साफ चौकी रखें।

2. तिलक की प्रक्रिया:

·         भाई का आसन: शुभ मुहूर्त में भाई को चौकी पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिठाएँ। भाई के सिर पर रुमाल या कोई वस्त्र रखें।

·         पूजन: सबसे पहले भगवान गणेश और यम देव का ध्यान करें।

·         तिलक: बहन, भाई के माथे पर विधिपूर्वक रोली और अक्षत से तिलक लगाएँ।

·         रक्षा सूत्र: तिलक के बाद भाई के हाथ में कलावा या रक्षा सूत्र बाँधें।

·         आरती: दीपक जलाकर भाई की आरती उतारें।

·         मिठाई: भाई का मुंह मीठा करें और कुछ स्थानों पर पान और सुपारी भी भेंट की जाती है।

·         आशीर्वाद और भोजन: बहनें भाई के दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए आशीर्वाद दें। परम्परा के अनुसार, बहनें इस दिन भाई को अपने हाथों से बना भोजन कराती हैं।

3. उपहार:

·         तिलक और पूजन के बाद, भाई अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, उपहार या धन देकर आशीर्वाद लेते हैं और उनकी रक्षा का वचन देते हैं।


भाई दूज का महत्व (पौराणिक कथा)

भाई दूज को 'यम द्वितीया' भी कहा जाता है, जिसके पीछे एक पौराणिक कथा है:

·         मान्यता है कि इस दिन यमराज (मृत्यु के देवता) अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने अपने भाई का आदर-सत्कार किया, तिलक लगाया और उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया।

·         यमराज अपनी बहन के आतिथ्य से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा और उसके हाथ का भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और वह यमलोक की यातनाओं से मुक्त रहेगा।

·         तभी से भाई दूज पर बहन के घर जाकर तिलक करवाना और भोजन करना शुभ माना जाता है।

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