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ग्राम सभा क्या है what is gram sabha
1.
ग्राम
सभा के सदस्य
2.
ग्राम
सभा की तयशुदा बैठकें
3.
ग्राम
सभा का स्थल, समय और स्थान
4.
ग्राम
सभा का गठन कौन करता है
ग्राम सभा एक कॉरपोरेट निकाय है जिसमें ऐसे सभी
लोग सम्मिलित हैं जिनके नाम पंचायत की निर्वाचन सूची में ग्राम स्तर पर शामिल रहते
हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(b) में
इसे परिभाषित किया गया है। ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था का प्राथमिक निकाय है
और सबसे बड़ा निकाय भी। यह एक स्थाई निकाय है। पंचायती राज की अन्य सभी संस्थाएं
जैसे कि ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और जिला परिषद का निर्माण
निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा होता है जबकि ग्राम सभा मतदाताओं से बनती है। ग्राम
सभा द्वारा लिए गए निर्णय किसी अन्य निकाय द्वारा रद्द नहीं किए जा सकते। ग्राम
सभा के निर्णयों को निरस्त करने का अधिकार केवल ग्राम सभा में ही निहित होता है।
ग्राम सभा के सदस्य gram sabha members
18 साल से कम उम्र के लोग ग्राम सभा के सदस्य
नहीं हो सकते। ऐसे लोग जिनकी उम्र 18
साल हो और वे गांव में रहते हों लेकिन ग्राम पंचायत (ग्रा.पं.) के मतदाता सूची में
पंजीकृत नहीं है,
वे भी ग्राम सभा के सदस्य नहीं हो
सकते।
ग्राम सभा की तयशुदा बैठकें Scheduled meetings of Gram
Sabha
राज्य पंचायती राज अधिनियम के अनुसार ग्राम सभा
की बैठकें साल में कम से कम दो बार अवश्य होनी चाहिए। लोगों की सुविधा के लिए, ज्यादातर राज्यों में चार
राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय दिवसों को इन बैठकों के लिए संदर्भ तारीखों के रूप में
माना गया है। ग्राम पंचायत को अपनी सुविधानुसार अन्य तारीखों में भी ग्राम सभा की
बैठकें आयोजित करने का अधिकार है। ग्राम सभा की बैठकों के लिए संदर्भ तारीखें हैं:
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), मजदूर
दिवस (1 मई), स्वतंत्रता
दिवस (15 अगस्त), गांधी
जयंति (2 अक्टूबर) आदि।
ग्राम सभा का स्थल, समय और स्थान Location, time and place
of Gram Sabha
ग्राम सभा का संचालन ग्राम पंचायत क्षेत्र में
ऐसे स्थान पर किया जाना चाहिए जहां सभी सदस्यों के लिए बैठना सुविधाजनक हो। ग्राम
पंचायत में अनेक गांव होने की स्थिति में ग्राम सभा का संचालन एक के बाद एक सभी
गांवों में रोटेशन के आधार पर किया जाना चाहिए। ग्राम सभा का आयोजन दिन के समय
किसी भी समय, यानी सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले
किया जा सकता है।
ग्राम सभा का गठन कौन करता है Who constitutes the Gram
Sabha
सरपंच का अनुमोदन मिलने के बाद पंचायत सचिव को
ग्राम सभा का गठन करना चाहिए। ग्राम सभा के 10%
सदस्यों द्वारा अथवा ग्राम सभा के 50
व्यक्तियों द्वारा (दोनों में से जो भी अधिक हो) ग्राम सभा के आयोजन हेतु अनुरोध
किए जाने पर ग्राम पंचायत का सरपंच ग्राम सभा की बैठक बुलाता है। यद्यपि, उन सदस्यों को बैठक के उद्देश्य की जानकारी
देनी होती है। बैठक के लिए, बैठक की तारीख से 5 दिन पहले कार्य अवधि के दौरान सरपंच के पास एक
लिखित अनुरोध सौंपना पड़ता है। जिस तरीख के लिए अनुरोध किया गया है यदि उस तारीख
को सरपंच बैठक आयोजित कराने में विफल रहता है तो बैठक के लिए अनुरोध करने वाले
सदस्य खुद ही ग्राम सभा की बैठक आयोजित कर सकते हैं।
वार्ड सभा--- वार्ड
सभा क्या है What
is Ward Sabha
Ø वार्ड सभा की संरचना
Ø वार्ड सभा की शक्तियां और जिम्मेदारियां
वार्ड सभा की संरचना Composition of Ward Sabha
हम जानते हैं कि वार्ड सभा पंचायती राज
व्यवस्था की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई है। पंचायत अनेक वार्डों में विभाजित होता
है। प्रत्येक वार्ड का एक निर्धारित निर्वचान क्षेत्र होता है। वार्ड स्तरीय
मतदाता निर्वाचन क्षेत्र के अंदर रहने वाले सभी मतदाता वार्ड सभा के सदस्य होते
हैं। ग्राम सभा की तरह ही वार्ड सभा एक स्थायी निकाय है और पंचायती राज व्यवस्था
का एक महत्वपूर्ण अंग। ओड़ीसा जैसे राज्य में यह किसी राजस्व ग्राम के सभी मतदाताओं
से मिलकर बनती है और पल्ली सभा कहलाती है।
वार्ड सभा ग्राम पंचायत के प्रत्येक सभा में गठित होना चाहिए। ग्राम पंचायत
का निर्वाचित सदस्य जो वार्ड का प्रतिनिधित्व करता है वार्ड सभा की बैठकों का
संयोजन और अध्यक्षता करता है। वार्ड सभा की बैठक प्रत्येक तीन महीने पर होगी ।
यदि
वार्ड प्रतिनिधि किसी भी कारण से बैठक आयोजित करने में विफल रहता है तो ग्राम
पंचायत अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक आयोजित कर सकते हैं और उसकी अध्यक्षता कर सकते हैं।
वार्ड सभा की बैठकों का कोरम (वार्ड सभा के सदस्यों की न्यूतम उपस्थिति
संख्या) का पालन करना अनिवार्य है। कोरम पूरा करने के लिए वार्ड के सदस्यों की
संख्या का दशवां हिस्सा उपस्थित रहना जरूरी है।
वार्ड सभा की शक्तियां और जिम्मेदारियां Powers and
Responsibilities of Ward Sabha
वार्ड सभा के कर्तव्य और कार्य ग्राम सभा के ही
समान हैं। राज्य पंचायती राज अधिनियम के अनुसार वार्ड सभा की शक्तियां और कर्तव्य
इस प्रकार हैं :
प्रस्ताव तैयार करना और वार्ड सभा के क्षेत्र में लागू की जाने वाली
योजनाओं तथा विकास कार्यक्रमों की प्राथमिकता तय करना और फिर उसे ग्राम पंचायत
विकास योजना में शामिल किए जाने के लिए ग्राम सभा के समक्ष रखना।
निर्धारित मानदंडों के आधार पर योजना के लाभार्थी के रूप में सर्वाधिक
उपयुक्त व्यक्तियों की पहचान करना;
पेंशन और अनुदान पाने जैसी विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ पाने वाले
व्यक्तियों की पात्रता का सत्यापन करना;
वार्ड सभा के क्षेत्र से संबंधित ग्राम पंचायत के प्रत्येक निर्णय के
औचित्य पर ग्राम पंचायत से जानकारी प्राप्त करना;
विकास कार्य के लिए स्वैच्छिक श्रम जुटाना और नकद और अंशदान दिलाना तथा
स्वैच्छिक समूहों से ऐसे विकास कार्यों का पर्यवेक्षण करवाना;
यह
सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना कि वार्ड सभा के सदस्य ग्राम पंचायत को करों और
शुल्कों का (यदि कोई हो तो) भुगतान करें;
मुखिया के अनुरोध पर वार्ड सभा के अंदर स्ट्रीट लाइटों, सड़कों के किनारे या सामुदायिक पानी के नल, सार्वजनिक शौचालय तथा ऐसे ही अन्य जनोपयोगी
योजनाओं के लिए स्थान सुझाना;
स्वच्छता,
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण
जैसे सार्वजनिक हित के विषयों पर जागरुकता फैलाना;
वार्ड सभा के क्षेत्र में सफाई की व्यवस्थाओं में ग्राम पंचायतों के
कर्मचारियों की मदद करना और कचरा हटाने में स्वैच्छिक सहयोग देना;
वार्ड सभा के क्षेत्र में वयस्क शिक्षा के कार्यक्रम को बढ़ावा देना;
वार्ड सभा के क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों की गतिविधियों में
सहयोग करना खासकर बीमारियों की रोकथाम और परिवार कल्याण योजना में तथा महामारियों
और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में जल्द सूचना भेजने की व्यवस्था करना;
वार्ड सभा के क्षेत्र में लोगों के विभिन्न समूहों के बीच एकता और भाईचारा
बढ़ाना तथा इलाके के लोगों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर देने हेतु सांस्कृतिक
उत्सवों और खेल आयोजनों का प्रबंधन करना; और
अन्य सभी शक्तियों का उपयोग करना और ऐसे कर्तव्यों का पालन करना जिनका प्रावधान
हो।
वार्ड सभा के सभी निर्णय एकमत होकर अथवा बहुमत के अनुमोदन से लिए जाते हैं।
बैठक में उपस्थिति लोगों के मतदान के आधार पर बहुमत का निर्धारण होता है।
सफल ग्राम सभा-एक केस अध्ययन Successful Gram Sabha - A
Case Study
Ø ग्राम पंचायत पिंपरी गावली
Ø गरिबा ग्राम पंचायत - पूर्वी चंपारण, बिहार
Ø मुख्य बिंदु
Ø सारांश
ग्राम पंचायत पिंपरी गावली Gram Panchayat Pimpri
Gawli
पिंपरी गावली महाराष्ट्र राज्य का एक आदर्श
ग्राम है। इस गांव ने महाराष्ट्र सरकार के आदर्श गांव योजना को प्रभावी रूप से
क्रियान्वित कर बहुत कम समय में ही जल सुरक्षा की स्थिति को प्राप्त कर लिया है यह
गांव महाराष्ट्र के वर्षापोषित क्षेत्र में पड़ता है। वाटर-शेड विकास के कामों में
सहभागिता आधारित कार्यपद्धति के लिए ग्राम सभा ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
। भूगर्भीय जल के दोहन को रोकने के लिए ग्राम सभा द्वारा पारित ‘भूगर्भीय जल नियमन एवं प्रबंधन प्रस्ताव’ नामक प्रस्ताव के जरिए ग्राम पंचायत ने नलकूपों
पर रोक लगाई गयी है। ग्राम सभा ने शराब पर भी प्रतिबंध लगाया,जंगलों को बचाने के लिए खुले स्थान में चराई को
रोका और खुले में शौच को प्रतिबंधित करने जैसे अन्य कार्य भी किए है ।
गरिबा ग्राम पंचायत - पूर्वी चंपारण, बिहार Gariba Gram Panchayat -
East Champaran, Bihar
पटना जिले के कल्याणपुर ब्लॉक में स्थित गरिबा
एक ग्राम पंचायत है जो गरीबी उन्मूलन और ग्रामवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने
को प्रेरित है। पंचायत ने गांव की अधोसंरचना में सुधार लाने के लिए अग्रणी भूमिका
निभाई और साथ ही साथ स्थानीय लोगों को इन गतिविधियों में सहभागी बनाया और उन्हें
काम करने का भरपूर अवसर मुहैया कराया। ग्राम सभा की बैठकों में घोषित उपायों का
लक्ष्य गरिबा गांव का पूर्ण समावेशी और संरचित विकास था। यह बिल्कुल स्वाभाविक है
कि गरिबा पंचायत के द्वारा किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम ने इसकी ग्राम सभा
में अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित किया। लगभग 40%
महिलाएं और 50% से अधिक निर्वाचित पंचायत सदस्य अनेक सरकारी
अधिकारियों के साथ इन बैठकों में उपस्थित होते थे। गरिबा ग्राम पंचायत को संसाधन
के रूप मे अपने स्थानीय लोग ही दिखे जिनका सहयोग गांव की संरचनात्मक आवश्यकताओं को
पूरा करने के लिए किया जा सकता था। ग्राम सभा में उचित चर्चा के बाद कई सारी
निर्माण परियोजनाएं चालू की गईं। क्रॉस ओवर रोड के रूप में एक छोटी पुलिया का
निर्माण किया गया,
गांव के चौराहे तक सड़कों का निर्माण
किया गया और गांव में इस पार से उस पार तक ईंट और मिट्टी का काम हुआ जो पंचायत
द्वारा किए गए विभिन्न प्रकार कार्यों के उदाहरण हैं। खुलापन और पारदर्शी शासन
गवर्नेंस के अति महत्वपूर्ण गुण हैं और ये एक दक्ष प्रशासन की गारंटी देते हैं।
मनरेगा योजना के तहत गरिबा ग्राम सभा द्वारा किए गए कार्यों और गतिविधियों का
ग्राम सभा में विस्तार से विश्लेषण और समीक्षा की गई और उनके संपूर्ण क्रियान्वयन
का समुचित सत्यापन किया गया। ग्राम सभा में भाग लेने वाले विभिन्न विभागों के
वरिष्ठ अधिकारियों ने सदस्यों को मनरेगा के तहत वर्ष 2012-13 के लिए विभिन्न लाभकारी योजनाओं के बार में
जानकारी दी और एक विस्तृत चर्चा तथा परिस्थिति के विश्लेषण के बाद ग्रामीणों की
आवश्यकताओं के आधार पर जरूरी परियोजनाएं और उनका स्व निर्धारण किया गया। गरिबा की
ग्राम सभा ने गांव को स्वच्छ रखने पर बहुत बल दिया है। सुरक्षित पेय जल और स्वच्छ
शौचालय संबंधी मुद्दों की चर्चा और उन पर काम करने के लिए ग्राम स्वच्छता समिति की
स्थापना की गई। इस समिति के सदस्यों ने ग्राम सभा में उपस्थित लोगों से स्वच्छता
पर विशेष बल देने का अनुरोध किया क्योंकि इस मामले में लापरवाही बरतने से
बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा होता है। ग्रामीणों को कुछ आधारभूत स्वच्छता
नियमों के बारे में भी बताया गया और उनके अनुपालन का अनुरोध किया गया। गरिबा ग्राम
सभा ने स्कूलों में बच्चों के नामांकन कराने के लिए बहुत सक्रियता दिखाई और साथ ही
अभिभावकों को भी इस मामले में जागरुक किया है कि शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध
अधिकार है। नेतृत्वकर्ताओं के समर्पित समूह तथा ऐसे ही सहयोगी लोगों के साथ, गरिबा ग्राम पंचायत द्वारा अल्प समय में नई-नई
उपलब्धियां हासिल की जा रही हैं।
मुख्य बिंदु
ü ग्राम सभा में महिलाओं तथा अन्य अल्पसंख्यक
समुदायों की सरहानीय उपस्थिति ।
ü गांव भर में वृक्षारोपण कार्य किए गए ।
ü गांव की आधारभूत संरचनाओं में भरपूर सुधार।
ü वार्ड सभा और महिला सभा की बैठकें सक्रिय रूप
से आयोजित की गईं।
सारांश
प्राचीन काल से ग्राम सभा की भारतीय प्रशासनिक
ढांचे में प्रमुख भूमिका रही है। ऐसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की उपस्थिति प्रशासन की
एक अति विकसित प्रणाली का संकेत करती है। ग्राम सभा प्रत्यक्ष लोकतंत्र की
क्रियाविधि का एक बेहतरीन उदाहरण है। आज की ग्राम सभा विकेंद्रीकरण के इस सिद्धांत
को सिद्ध करती है कि “प्रशासन का अधिकार इस तरह हस्तांतरित
किया जाना चाहिए कि प्रशासन के हर स्तर को ऐसी शक्तियां मिलें जिनके निष्पादन में
वह सक्षम हो।”
संवैधानिक रूप से भी नागरिकों को
सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक
और व्यक्तिगत स्वंत्रता प्रदान करने में ग्राम सभा की महती भूमिका होती है। वह
केवल नागरिक अधिकारों की रक्षक ही नहीं होती हैं बल्कि मौलिक कर्तव्यों की प्रहरी
भी होती है। ग्राम सभा की अवधारणा भरोसे पर आधारित होती है और इसमें सहयोग कर तथा
और इसकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होकर ग्रामीण विकास को साकार किया जा
सकता है।
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