सूचना का अधिकार क्या है what is the right to information - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Friday, October 29, 2021

सूचना का अधिकार क्या है what is the right to information

 

सूचना का अधिकार  क्या है  what is the right to information



अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न frequently Asked question

1.            यह कब से लागू हुआ ?

2.            सूचना का क्या मतलब है ?

3.            सूचना अधिकार का अर्थ

4.            अधिकारी और उनके कर्त्तव्य

5.            उपलब्ध सूचनाएं

6.            सूचना आग्रह की विधि

7.            संबंधित स्त्रोत

यह कब से लागू हुआ ? Since when did it come into force?

यह 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ (15 जून, 2005 को इसके कानून बनने के 120 वें दिन)। इसके कुछ प्रावधान तुरन्त प्रभाव के साथ लागू किए गए यानि लोक प्राधिकारियों की बाध्यता [एस. 4(1)], लोक सूचना अधिकारियों और सहायक लोक सूचना अधिकारियों का पदनाम [एस. 5(1)], केन्द्रीय सूचना आयोग का गठन, (एस. 1213), राज्य सूचना आयोग का गठन (एस. 1516), अन्वेषण/जाँच एजेंसी और सुरक्षा संगठनों पर अधिनियम का लागू न होना (एस. 24) और इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार।

सूचना का क्या मतलब है ? What is meant by information?

सूचना का मतलब है- रिकार्ड, दस्तावेज़, ज्ञापन, ई-मेल, विचार, सलाह, प्रेस विज्ञप्तियाँ, परिपत्र, आदेश, लॉग पुस्तिकाएँ, ठेके, टिप्पणियाँ, पत्र, उदाहरण, नमूने, डाटा सामग्री सहित कोई भी सामग्री, जो किसी भी रूप में उपलब्ध हों। साथ ही, वह सूचना जो किसी भी निजी निकाय से संबंधित हो, किसी लोक प्राधिकारी के द्वारा उस समय प्रचलित किसी अन्य कानून के अंतर्गत प्राप्त किया जा सकता है, बशर्तें कि उसमें फाईल नोटिंग शामिल नहीं हो। (एस.-2 (एफ))

सूचना अधिकार का अर्थ

इसके अंतर्गत निम्न चीजें आती है- It includes the following things-

1.            कार्यों, दस्तावेज़ों, रिकार्डों का निरीक्षण,

2.            दस्तावेज़ों या रिकार्डों की प्रस्तावना/सारांश, नोट्स व प्रमाणित प्रतियाँ प्राप्त करना,

3.            सामग्री का प्रमाणित नमूने लेना,

4.            रिंट आउट, डिस्क, फ्लॉपी, टेपों, वीडियो कैसेटों के रूप में या कोई अन्य ईलेक्ट्रॉनिक रूप में जानकारी प्राप्त करना (एस- 2(ज़े))

अधिकारी और उनके कर्त्तव्य officers and their duties



लोक अधिकारी के कर्त्तव्य Duties of Public Officer

 

1. इस कानून के लागू होने के 120 दिन के भीतर निम्न सूचना प्रकाशित कराना अनिवार्य होगा-

2. अपने संगठनों, क्रियाकलापों और कर्त्तव्यों के विवरण।

3. अधिकारियों और कर्मचारियों के अधिकार और कर्त्तव्य।

4. अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनाई गई विधि, पर्यवेक्षण और ज़िम्मेदारी की प्रक्रिया सहित।

5. अपने क्रियाकलापों का निर्वाह करने के लिए इनके द्वारा निर्धारित मापदण्ड।

6. अपने क्रियाकलापों का निर्वाह करने के लिए इनके कर्मचारियों द्वारा उपयोग किए गए नियम, विनियम, अनुदेश, मापदण्ड और रिकार्ड।

7. इनके द्वारा धारित या इनके नियंत्रण के अंतर्गत दस्तावेज़ों की कोटियों का विवरण।

8. इनके द्वारा गठित दो या अधिक व्यक्तियों से युक्त बोर्ड, परिषद्, समिति और अन्य निकायों के विवरण। इसके अतिरिक्त, ऐसे निकायों में होने वाली बैठक की ज़ानकारी आम जनता की पहुँच में है या नहीं।

9. इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका।

10. इसके प्रत्येक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा प्राप्त की जाने वाली मासिक वेतन, इसके विनियमों के अंतर्गत दी जाने वाली मुआवज़े की पद्धति सहित।

11. इसके द्वारा संपादित सभी योजनाएँ, प्रस्तावित व्यय और प्रतिवेदन सहित सभी का उल्लेख करते हुए प्रत्येक अभिकरण को आवंटित बज़ट विवरण।

12. सब्सिडी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विधि, आवंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के विवरण और लाभान्वितों की संख्या को मिलाकर।

13. इसके द्वारा दी जाने वाली रियायत, अनुमतियों या प्राधिकारियों को प्राप्त करने वालों का विवरण।

14. इनके पास उपलब्ध या इनके द्वारा धारित सूचनाओं का विवरण, जिसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में छोटा रूप दिया गया हो।

15. सूचना प्राप्त करने के लिए नागरिकों के पास उपलब्ध सुविधाओं का विवरण, जनता के उपयोग के लिए पुस्तकालय या पठन कक्ष की कार्यावधि का विवरण, जिसकी व्यवस्था आम जनता के लिए की गई हो।

16. जन सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य विवरण (एस. 4 (1)(बी))।

लोक प्राधिकारी का क्या मतलब है-

इसका अर्थ है कोई भी स्थापित या गठित प्राधिकारी या निकाय या स्वशासी संस्थान [एस-2(एच)] जिसका गठन निम्न रीति से हुआ है –

It means any established or constituted authority or body or autonomous institution [S-2(h)] constituted in the following manner

             संविधान द्वारा या उसके अंतर्गत

             संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा

             राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी अन्य कानून के द्वारा

उपयुक्त शासन द्वारा जारी अधिसूचना या आदेश द्वारा जिसमें निम्न दो बातें शामिल हों-

1.            वह सरकार द्वारा धारित, नियंत्रित या वित्त पोषित हो।

2.            उक्त सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धन प्राप्त किया हो।

लोक सूचना अधिकारी (पी.आई.ओ) कौन हैं ? Who are the Public Information Officers (PIOs)?

पीआईओ वह अधिकारी है जिन्हें सभी प्रशासनिक ईकाईयों या कार्यालयों में लोक अधिकारियों द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त किया गया हो और उसे यह दायित्व दिया गया हो कि वे सूचना प्राप्ति के लिए आग्रह करने वाले सभी नागरिकों को सूचना प्रदान करेंगे। पीआईओ द्वारा अपने कर्त्तव्यों के उचित निर्वाह के लिए माँगी गई अन्य अधिकारियों की सहायता उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी और इस अधिनियम के तहत कार्य करने वाले अन्य अधिकारियों को भी पीआईओ के रूप में माना जाएगा।

लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) के क्या कार्य हैं ?

             पीआईओ, सूचना पूछने वाले व्यक्तियों से आग्रहपूर्वक व्यवहार करेंगे और जहाँ आग्रह लिखित रूप में नहीं किया जा सकता, वहाँ उसे लिखित रूप में आग्रह करने के लिए किसी व्यक्ति की उचित सुविधा उपलब्ध करानी होगी।

             यदि आग्रह की गई सूचना रोकी गई हो या इसका संबंध किसी अन्य लोक अधिकारी से हों तो पीआईओ आग्रह को, 5 दिन के भीतर संबंधित लोक अधिकारी के पास भेजकर, तुरन्त आवेदक को सूचित करेगा।

             पीआईओ अपने कार्यों के उचित निर्वाह के लिए किसी अन्य अधिकारी की सहायता ले सकते हैं।

             पीआईओ सूचना के लिए आग्रह प्राप्ति पर ज़ल्द से ज़ल्द ज़वाब देंगें और किसी भी मामले में अनुरोध के 30 दिनों के भीतर निर्धारित मानदंड के अनुसार शुल्क के भुगतान पर या तो सूचना प्रदान करें या एस-8 या एस-9 में विनिर्दिष्ट किसी कारण के आधार पर आग्रह को रद्द कर दें।

             जहाँ सूचना का आग्रह व्यक्ति की ज़िंदगी या स्वतंत्रता की चिंता के लिए की गई हो, तो आग्रह की तिथि से 48 घंटों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना होगा।

             यदि लोक सूचना अधिकारी विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर आग्रह पर निर्णय देने में असफल रहता है तो उसे आग्रह को ठुकरा देने का अधिकार होगा।

लोक सूचना अधिकारी द्वारा आग्रह को रद्द करने की स्थिति में वह आग्रहकर्त्ता को निम्न सूचना दें -

1. ऐसे रद्द करने के कारण

2. ऐसे रद्द करने की अवधि के भीतर अपील करने को प्राथमिकता दें, और

3. अपील किए जाने वाले प्राधिकार के विवरण।

             लोक सूचना अधिकारी को सूचना ऐसे रूप में उपलब्ध करानी होंगी जिसमें वह माँगी गई हो अन्यथा इससे अनावश्यक रूप से लोक प्राधिकारी के संसाधनों का दुरुपयोग होगा या इससे रिकार्ड की सुरक्षा या संरक्षण को क्षति पहुँचने की संभावना रहेगी।

             यदि सूचना के आंशिक उपयोग की अनुमति दी गई हो तो लोक सूचना अधिकारी आवेदक को यह सूचित करते हुए एक सूचना देना होगा कि-

1. सूचना की गंभीरता के कारण आग्रह किए गए रिकार्ड के मात्र आंशिक भाग को उपलब्ध कराया गया है

2. किसी भी सामग्री पर उपलब्ध जानकारी एवं सत्यता के प्रश्न सहित अन्य कोई सामग्री की जानकारी उपलब्ध कराना जिसपर वह निर्णय आधारित हो

3. निर्णय देने वाले व्यक्ति का नाम और पदनाम

4. गणना की गई शुल्क का विवरण और शुल्क की राशि जो आवेदक को जमा करना है

5. सूचना के अंश को न बताने के सन्दर्भ में, निर्णय की समीक्षा के संबंध में उनके अधिकार और ली गई शुल्क की राशि या प्रयोग के रूप की जानकारी।

यदि माँगी गई सूचना तीसरे पक्ष द्वारा दिया जाना है या तीसरे पक्ष द्वारा उसे गोपनीय माना जा रहा, तो लोक सूचना अधिकारी आग्रह प्राप्ति से 5 दिनों के भीतर तीसरे पक्ष को लिखित सूचना देगा और उसकी पक्ष सुनेगा

तीसरी पार्टी को ऐसी सूचना प्राप्ति के 10 दिनों के भीतर लोक सूचना अधिकारी के समक्ष अपना प्रतिवेदन देना।

उपलब्ध सूचनाएं

 

1. बताने के लिए क्या नहीं है ?

निम्नलिखित सूचनाओं को आम जनता को उपलब्ध कराने की मनाही है (एस-8)-

1. ऐसी सूचना प्रदर्शन जिससे भारत की स्वतंत्रता और अखण्डता, राज्य की सुरक्षा, कार्य योज़ना, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों, विदेशों से संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हों या अपराध के लिए उत्तेजित करता हों।

2. सूचना जिसे किसी भी न्यायालय या खण्डपीठ द्वारा प्रकाशित किए जाने से रोका गया है या जिसके प्रदर्शन से न्यायालय का उल्लंघन हो सकता है।

3. सूचना, जिसके प्रदर्शन से संसद या राज्य विधानसभा के विशेषाधिकार प्रभावित होती हों

4. वाणिज़्यिक गोपनीयता, व्यापार गोपनीयता या बौद्धिक संपदा से संबंधित सूचना, जिसके प्रकाशन से तीसरी पक्ष की प्रतिस्पर्द्धात्मक स्तर को क्षति पहुँचने की संभावना हों, जब तक कि सक्षम प्राधिकरी इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाता कि ऐसी सूचना का प्रकाशन जनहित में है

5. व्यक्ति को उनके न्यासी संबंध में उपलब्ध जानकारी, जब तक कि सक्षम प्राधिकरी संतुष्ट नहीं हो जाते कि ऐसी सूचना का प्रदर्शन जनहित में हैं

6. ऐसी सूचना जो विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त की गई हो

7. सूचना, जिसके प्रदर्शन से किसी व्यक्ति की ज़िन्दगी या शारीरिक सुरक्षा को खतरा है या कानून के कार्यान्वयन या सुरक्षा उद्देश्यों के लिए विश्वास में दी गई सूचना या सहायता

8. सूचना जिससे अपराधी की जाँच करने या उसे हिरासत में लेने या उस पर मुकदमा चलाने में बाधा उत्पन्न हो सकती हो

9. मंत्रिपरिषद्, सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श से संबंधित मंत्रिमंडल के दस्तावेज़

10. ऐसी सूचना जो किसी व्यक्ति के निजी जिंदगी से संबंधित है उसका संबंध किसी नागरिक हित से नहीं हो और उसके प्रकाशन से किसी व्यक्ति के निजी जिंदगी की गोपनीयता भंग होती हों

11. उपरोक्त बातों से परे सूचना को लोक सूचना अधिकारी सुलभ कराने की इज़ाजत दे सकते है।

12. क्या आँशिक प्रदर्शन की अनुमति है ?

रिकार्ड का केवल वही भाग जो ऐसी कोई सूचना धारण नहीं करता हो जिसके प्रदर्शन पर रोक नहीं हों, तो लोक सूचना अधिकारी वैसी सूचना के प्रदर्शन की इज़ाजत दे सकता है। (एस-10)

13. इससे किसे बाहर रखा गया है ?

दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट केन्द्रीय सतर्कता और सुरक्षा एजेंसी जैसे आईबी, रॉ (रीसर्च एंड एनालिसिस विंग), राज़स्व सतर्कता निदेशालय, केन्द्रीय आर्थिक सतर्कता ब्यूरो, कार्यान्वयन निदेशालय, नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो, उड्डयन अनुसंधान केन्द्र, विशेष सीमा बल, सीमा सुरक्षा बल, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, असम राइफल्स, विशेष सेवा ब्यूरो, विशेष शाखा (सीआईडी), अंडमाम एवं निकोबार अपराध शाखा- सीआईडी- सीबी, दादरा और नगर हवेली तथा विशेष शाखा, लक्षद्वीप पुलिस। राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचना के माध्यम से विनिर्दिष्ट एजेंसियों को भी छोड़ दिया गया है।

इस अधिनियम से इन संगठनों को छूट दे दिये जाने के बावज़ूद इन संगठनों को घूस और मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित आरोपों से के बारे में सूचना प्रदान करने की बाध्यता होगी। इसके अतिरिक्त, मानव अधिकार के उल्लंघन के आरोप से संबंधित सूचना केन्द्र या राज्य सूचना आयोग के अनुमोदन के बाद दिया जा सकता है। (एस-24)

सूचना आग्रह की विधि method of request for information

1. सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन की प्रक्रिया

             जन सूचना अधिकारी के पास जरूरी सूचना के लिए लिखित रूप में या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (ई-मेल) के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। अपना आवेदन अँग्रेज़ी, हिन्दी या संबंधित राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त भाषा में भरकर करें।

             माँगी गई सूचना के लिए कारण बताना आवश्यक नहीं है।

             राज्य या केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमानुसार आवेदन शुल्क का भुगतान करें (गरीबी रेखा के नीचे आने वाले वर्ग के लोगों को शुल्क नहीं जमा करना है)।

2. सूचना प्राप्त करने के लिए समय सीमा

             आवेदन जमा करने की तिथि से 30 दिन के भीतर।

             यदि सूचना किसी व्यक्ति के जीवन व स्वतंत्रता से संबंधित है तो 48 घण्टे के भीतर।

             उपरोक्त दोनों मामलों में 5 दिन का समय जोड़ा जाए यदि आवेदन, सहायक लोक सूचना अधिकारी के कार्यालय में जमा किया गया हो।

             यदि किसी मामले में तीसरे पक्ष की संलग्नता या उसकी उपस्थिति अनिवार्य है तो सूचना प्राप्ति की समय-सीमा 40 दिन होगी (अधिकतम अवधि+ तीसरे पक्ष को उपस्थित होने के लिए दिया गया समय)।

             विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर सूचना प्रदान करने में असफल रहने पर उसे सूचना देने से इंकार माना जाएगा।

3. सूचना प्राप्त करने के लिए शुल्क

             निर्धारित आवेदन शुल्क निश्चित रूप से तार्किक होनी चाहिए।

             सूचना के लिए यदि अतिरिक्त शुल्क की आवश्यकता हो तो, आवेदक को पूर्ण आँकलन विवरण के साथ लिखित रूप में सूचित किया जाए।

             जन सूचना अधिकारी द्वारा निर्धारित शुल्क के बारे में पुनर्विचार के लिए उचित अपीलीय प्राधिकार से आवेदन किया जा सकता है।

             गरीबी रेखा से नीचे आने वाले समुदाय के लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

यदि जन सूचना अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध कराने में असफल रहते हैं तो आवेदक को सूचना निःशुल्क उपलब्ध करानी होगी।

4. आवेदन रद्द करने के क्या आधार हो सकते हैं ?

यदि इसके अंतर्गत ऐसी सूचना माँगी जा रही हो जिसके प्रदर्शन नहीं करने की छूट हो। (एस-8)

यदि यह राज्य के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के कॉपीराइट अधिकार का उल्लंघन करता हो। (एस-9)

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