डिंडोरी जिले के करंजिया ब्लॉक के ग्राम
बिठलदेह में सिवनी नदी पर प्रस्तावित बांध परियोजना से कई गांव विस्थापित होंगे, जिसमें शत प्रतिशत आदिवासियों की संख्या है, हजारों गरीब परिवार बेघर और बेजमीन हो जाएंगे।
स्थानीय लोगों द्वारा बांध को निरस्त कराने की लड़ाई निरंतर जारी है, आदिवासी क्षेत्रों और पांचवीं अनुसूची
क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की अनुमति लेना आवश्यक है, कई बार प्रशासन को ग्राम सभा द्वारा अनुमति
निरस्त करने का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन
आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की अवहेलना लगातार जारी है,
सवाल यह है कि बांध जैसे परियोजना सिर्फ
आदिवासी क्षेत्रों में ही क्यूं यह अन्य क्षेत्र या सरकारी जगहों में क्यूं
नहीं। गरीब आदिवासियों को प्रताड़ित कर
भगाना आसान होता है, क्योंकि सरकार को पता है कि इनके पास
ना आर्थिक ताकत है ना संवैधानिक जागरूकता, ना
मीडिया इनका आवाज बनेगा ना न्यायिक तंत्र में इनका पकड़ है, आदिवासी सीधे सादे लोग हैं जिन्हें बंदूक के
नोक पर नचाया जा सकता है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी
पहले डिंडोरी जिले का दौरा किया जा चुका है तब स्थानीय और बांध से प्रभावित होने
वाले गांवों के लोगों ने मुख्यमंत्री जी को बांध निरस्त कराने हेतु मांग पत्र
सौंपा था, जिस पर उन्होंने कहा था कि अगर स्थानीय लोग
चाहेंगे तब बांध बनेगा अन्यथा नहीं बनेगा, इसके
बावजूद लोगों पर दबाव बनाया गया, और कार्य शुरू करने हेतु प्रशासन
द्वारा दल बल का प्रयोग किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण
अभी कारी आरंभ नहीं हो सका है।
जयस आदिवासियों के हित की लड़ाई लड़ेगा, डॉ हीरालाल अलावा जी द्वारा राज्यपाल के नाम
सिवनी बांध परियोजना को निरस्त कर आदिवासी संवैधानिक अधिकारों और उनके हितों को
ध्यान में रखे जाने को लेकर पत्र लिखा गया, आज
जयस के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े लोग अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकता है, अपनी आवाज शासन प्रशासन तक पहुंचा सकता है,
जयस आदिवासियों के विस्थापन के खिलाफ लड़ाई
जारी रखेगा, यह आज का युवा ताकत है जो ना बंदूकों की नोक से
डरता है ना सरकारी डंडों से,
अपने अधिकारों के रक्षा के लिए जयस युवा पूरी
ताकत से खड़ा है और यह भविष्य में भी खड़ा रहेगा, जयस
के नेतृत्व में एक क्रांति की लहर दौड़ी है जो अपने हक के लिए लड़ना जानता है जो
जानता है कि हक अधिकार सिर्फ मांगने से नहीं मिलता इसे छीनना पड़ता है।
डिंडोरी जिले में दो दो विधायक हैं लेकिन
उन्हें डिंडोरी जिले के आदिवासियों की कोई चिंता नहीं है वरना जिले के आदिवासी
क्षेत्रों में सरकार ने आदिवासियों को विस्थापित करने के लिए कई बांध परियोजना
प्रस्तावित किया है, जिसके खिलाफ आज तक डिंडोरी जिले के
प्रतिनिधियों ने कुछ नहीं बोला,
जयस हर वर्ग के लोगों के हितों के लिए लड़ाई
लड़ रहा है चाहे वो आदिवासी हो या गैर आदिवासी डिंडोरी जिले में प्रस्तावित बांधों
में से एक सिवनी नदी पर प्रस्तावित बांध
को निरस्त कराने के सम्बन्ध में राष्ट्रीय जयस संरक्षक आदरणीय हीरालाल अलावा जी ने
राज्यपाल महोदय जी को पत्र लिखा, और जयस लोगों के हितों के लिए हमेशा
आवाज उठाता रहेगा। जयस डिंडोरी डिंडोरी जिले में अपने लोगों के हकों और अधिकारों
के लिए संघर्ष करता रहेगा।
आखिर अगर वह अपने क्षेत्र के जनता का हित चाहते
तो वे विधानसभा में मजबूती से आदिवासियों का पक्ष रखते नजर आते लेकिन उनका चुप
रहने का नतीजा डिंडोरी के आदिवासी जनता भुगत रही है, जो
विस्थापन के डर का दंश झेल रही है। आखिर वे विस्थापन जैसे जीवन तबाह कर देने वाले
सरकारी षडयंत्र के खिलाफ अकेले खड़े नजर आते हैं, बांध
परियोजना में विस्थापन के डर से लोग भयभीत हैं।
लेकिन उनके बातों को रखने के लिए जिनको
उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में चुनकर विधानसभा में भेजा वे यदि चुप रहें तो कौन
उनके हक की लड़ाई लड़ेगा।
चुनाव के समय सभी बातों का ध्यान रखें युवा
साथी, इन सब गंभीर विषयों पर पुनर्विचार करना आवश्यक
है, युवा वर्ग अपना नेतृत्व विकसित कर जिले और
प्रदेश के लोगों के हित को लेकर आवाज उठाते रहें।
डिंडोरी जयस युवा नेतृत्व तैयार करने के मुहिम
में हैं, ऐसा नेतृत्व जो दमदारी और मजबूती के साथ लोगों
के हकों के लिए हमेशा खड़ा रहें।
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