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Monday, August 30, 2021

आर्थिक सशक्तिकरण-अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग समझिये इस बात को

 आर्थिक सशक्तिकरण-अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग समझिये इस बात को



आर्थिक सशक्तिकरण-

डॉ दिग्विजय सिंह मरावी ( जयस प्रदेश सचिव, म.प्र.)

 

हमारी सबसे बड़ी समस्या आर्थिक तंगी और गरीबी है, इसे दूसरे के ऊपर मढ़ने के अलावा हमें ही कुछ शुरू करने की जरूरत है, युवाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण बेहद जरूरी है,

    हम आपसी सहयोग, सहकारिता से आर्थिक क्रांति ला सकते हैं, अगर हम बेरोजगारी, पलायन, गरीबी, से लड़ना है, तो आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संगठित होना सबसे आवश्यक है,

हमारे युवा शुरुआत करने से घबराते हैं, कोई छोटा स्वरोजगार से जुड़ा व्यवसाय  हम कम लागतों में कर सकते हैं, अगर मेहनत और पूरे प्रतिबद्धता से कार्य करें तो यह बेहद अच्छा परिणाम भी देता है,

अगर आज हमारे युवाओं को देखें तो किसी को बाल काटते भी आता है तो सैलून का छोटा व्यवसाय भी शुरू नहीं कर सकते, मैं यह कहना चाहता हूं कि किसी भी काम में किसी का अधिकार नहीं है, कोई जाति वर्ग का इसपर एकरूप अधिकार नहीं है, हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है।

 

      हम युवाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रयास कर रहे हैं, और सफल जरूर होंगे अगर हमने गरीबी के लिए संगठित होकर पहले ही लड़ लेते तो आज यह नहीं झेलना पड़ता। लेकिन हमें निराशा और आरोपित भाव को छोड़कर नई शुरुआत करने की जरूरत है

सभी आदिवासी भाई और बहनों  से गुजारिश है कि अपने परिवार में एक मीटिंग करके माता पिता बच्चो को समझाये कि   ये ज़रूर करे:-

1) नेता आदिवासी चुनिए

2) वकील आदिवासी चुनिए

3) इंजीनियर आदिवासी चुनिए

4) सी.. आदिवासी चुनिए

5) सब्जी वाला आदिवासी चुनिए

6) मोबाइल रिचार्ज  आदिवासी चुनिए

7) मेडिकल स्टोर आदिवासी चुनिए

8) दूध डेरी आदिवासी चुनिए

9) प्रिटिंग प्रेस आदिवासी  चुनिए

10) दूधवाला आदिवासी चुनिए

11) स्टेशनरी स्टोर्स आदिवासी चुनिए

12) कपडे का शोरूम दुकान आदिवासी चुनिए

13) इलेक्ट्रॉनिक इलेक्ट्रीकल स्टोर आदिवासी चुनिए

14)  कृषि सेवा केंद्र आदिवासी चुनिए

15) ट्रेवल बुकिंग आदिवासी चुनिए

16) फ्लोर मिल आदिवासी चुनिए

17) किराना स्टोअर्स आदिवासी चुनिए

18) हार्डवेअर दुकान आदिवासी चुनिए

19) Xerox सेंटर आदिवासी चुनिए

20) होटल आदिवासी कि चुनिए

21) सब्जी और फ्रूट वाला आदिवासी चुनिए

22) राज मिस्त्री आदिवासी चुनिए

23) मिठाई की दुकान आदिवासी चुनिए

24) और सभी  चीजों के लिए  आदिवासी व्यापारी चुनिए

चाहे कुछ महंगी ही क्यो दे

 

आप अपनी आने वाली पीढी के लिए इतना तो कर सकते हो  यही आपका हथियार है

 

आदिवासी को एक ऐसी सोच रखनी चाहिए क्योंकि एक छोटी सोच आगे चल के बड़ी सोच बन सकती है

एक बार कड़ी से कड़ी मिला कर तो देखिये सब सर ना झुकाएं तो कहियेगा

जय जोहार जय आदिवासी जी

नोट: हर 10 आदिवासी भाई तक यह मेसेज शेयर करो ओर दिन में एक बार ये msg रोज डाले।

जय आदिवासी ..🙏🏹

 

जय  जोहार

अंग्रेज शूद्रों के लिए भाग्य-विधाता साबित हुए

कैसे????

 

 🔸क्या आप लोग जानते हैं :-

 अंग्रेजों ने जब #रेल की पटरी लाईन पूरे देश में बिछाना शुरू किया तो ब्राह्मणों ने हिन्दू समाज को भड़काकर जबरदस्त विरोध किया। यह कहकर कि धरती माता को #लोहे से बांध रहे हैं। अधर्म हो जायेगा,महामारी फैल जायेगी,कोई नहीं बचेगा।कई जगहों पर दिन में लाईन बिछाई जाती थी और रात को उखड़वा देते थे। कहीं कहीं तो धार्मिक भावना भड़काकर देवी -देवता या भगवानों का लाईन उखाड़ कर रातों-रात #मन्दिर बनवा देते थे।

   👉 प्रमाण देखना है तो गाजीपुर ज़िले में दिल्ली-कोलकाता रूट पर, दिलदारनगर जंक्शन स्टेशन पर उखाड़ी लाईन पर ही शायर माई का मंदिर रातों-रात बनवा दिये। जबरदस्त विरोध के कारण #अंग्रेज़ मंदिर नहीं हटा पाएं और ट्रैक को उन्हें मोड़ना पड़ा।आज़ भी दो ट्रैक के बीचो-बीच #दिलदारनगर रेलवे स्टेशन पर मौजूद है।

  जानते हैं ऐसा बिरोध क्यों ? ब्राह्मणों का कहना था कि हम लोग शूद्र के साथ नहीं बैठ सकते हैं। पृथ्वी पर अधर्म हो जाएगा। हम लोगों के लिए अलग बोगी, नहीं तों डब्बे में ही अलग से #ऊंची सीट ब्राह्मणों के लिए बनाना पड़ेगा तभी हिन्दू धर्म की पवित्रता बनीं रहेंगी। अफ़सोस ! अंग्रेजों ने हिन्दू धर्म को अपवित्र करके ही छोड़ा।

     ▪️नरबलि जो कि शूद्रों की दी जाती थी। अंग्रेजों ने इसे रोकने के लिए 1830 में कानून बनाया था।

   ▪️सन 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के #जज बनने पर रोक लगा दी थी अंग्रेजों ने कहा था कि इनका चरित्र न्यायिक नहीं होता है।

   ▪️शासन व्यवस्था पर ब्राह्मणों का 100% #कब्जा था। अंग्रेजों ने इन्हें 2.5% पर लाकर खड़ा कर दिया था।

   ▪️क्या आप लोग जानते हैं :- अंग्रेजों ने अधिनियम 11 के तहत शूद्रों को 1795 ईस्वी में #संपत्ति रखने का अधिकार दिया था।

   ▪️देवदासी प्रथा अंग्रेजों ने ही बंद कराई, इस प्रथा में यह होता था कि शूद्र समाज की लडकियाँ मंदिरों में #देवदासी के रूप में रहती थीं, पंडा-पुजारी उनके साथ छोटी उम्र में बलात्कार करना शुरू कर देते थे और उनसे जो बच्चा पैदा होता था उसे हरिजन कहते थे।

   ▪️सन 1819 से पहले किसी शूद्र की शादी होती थी तो ब्राह्मण उसका #शुद्धीकरण करने के लिए नववधू को 3 दिन अपने पास रखते थे, उसके उपरांत उसको घर भेजते थे, इस प्रथा को #अंग्रेजों ने 1819 ईस्वी में बंद करवाया।

   ▪️चरक पूजा-अंग्रेजों ने 1863 ईस्वी में बंद कराई, इसमें यह होता था कि कोई पुल या भवन बनने पर शूद्रों की बलि दी जाती थी।

   ▪️ब्राह्मण शूद्रों का पहला लड़का गंगा में #दान करवा दिया करते थे क्योंकि वह जानते थे कि पहला बच्चा हृष्ट- पुष्ट होता है इसीलिए उसको गंगा में दान करवा दिया करते थे।अंग्रेजों ने इस प्रथा को रोकने के लिए 1835 में एक कानून बनाया था।

   ▪️शूद्रों को अंग्रेजों ने 1835 ईस्वी में कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया था, इससे पहले शूद्र #कुर्सी पर नहीं बैठ सकते थे।

   ▪️अंग्रेजों ने सबके लिए शिक्षा का दरवाजा खोले। पहले शूद्र जातियों (आज की ओबीसी,एससी,एसटी) सभी वर्ण की महिलाओं को पढ़ने का अधिकार नहीं था।

   ▪️अंग्रेजों हिन्दू वर्ण की शूद्र जातियों को सरकारी सेवाओं में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट के माध्यम से प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था किया।

    तभी तो हिन्दू (ब्राह्मण) खतरे में पड़ गया।ब्राह्मणों (चित्तपावन/नगपुरिया ब्राह्मणों ने) ने 1920 में ब्राह्मण महासभा 1922 में हिन्दू महासभा 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बनाया। ब्राह्मणों ने अंग्रेजों के खिलाफ भड़काना शुरू किया। अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया। विचारणीय है कि 712 से लेकर अंतिम मुग़ल शासक तक हजार वर्ष से अधिक समय तक #मुसलमानों का शासन रहा, तब हिन्दू खतरे में नहीं रहा, जब अंग्रेज भारतीय हिन्दू समाज की ब्राह्मणी बुराइयों, रूढ़ियों को खत्म कर सबके भलाई का काम शुरू किए तो हिन्दू खतरे में पड़ गया। इसे पिछड़े-अति पिछड़े-आदिवासी वर्ग को समझने की जरूरत है।

    अतः सर्वप्रथम तो अपना इतिहास जाने और ब्राह्मण धर्म की सच्चाई/भेदभावपूर्ण कमियों को जाने।

अपने बच्चों और भावी पीढ़ी का सही मार्गदर्शन करें। उन्हें सही शिक्षा दें जिससे वे अपने भविष्य को उज्वल बना कर समाज को उन्नति के पथ पर अग्रसर कर सकें।

जय भीम

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