9-अगस्त 2021 को निम्नलिखित विषय चर्चा के लिए रखे गए हैं - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Thursday, August 5, 2021

9-अगस्त 2021 को निम्नलिखित विषय चर्चा के लिए रखे गए हैं

 

9-अगस्त 2021 को निम्नलिखित विषय चर्चा के लिए रखे गए हैं ।।

 


1) युनिफॉर्म सिविल कोड / समान नागरिक संहिता का कानून लागू होने से क्या आदिवासियों के संवैधानिक मौलिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे ?--एक चिंतन

 

2) BHU का प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे द्वारा संथाल, मुंडा, गोंड, भिल एवम अन्य आदिवासी जनजातियों को विदेशी कहना और ब्राह्मणों को भारत का मूलनिवासी कहना एक भयानक षडयंत्र है--

 (DNA के आधार पर पर्दाफाश)

 

एच एन रेकवाल

राष्ट्रीय अध्यक्ष

राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद

नई दिल्ली

 

पूरा पढ़ना पढ़े लिखे हों तो.. 🙏 🙏

 

ब्राह्मण और आदिवासी का विवाद 🙅🏻‍🤷🏻‍

 

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  जय श्रीराम...

🤷🏻‍ आदीवासी-   जय जोहार ...

 

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  अरे..तुम्हे एक दिन जय श्रीराम बोलना ही होगा..तुम्हारा नारा नहीं चलेगा।

 

🤷🏻‍ आदीवासी-  क्यो नहीं चलेगा..?

पिछले 70 सालसे हमारे बाबासाहब के संविधान से भारत देश चल रहा है तो हमारा ही नारा चल रहा है और आगे भी चलेगा।

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  (हा..हा..हा) अरे! अज्ञानी..

 हमारे पूर्वज 5000 साल से पूरे भारत पर राज कर रहे है, तुम  सिर्फ 70 साल की बात कर रहे हो।

1925 से हमने ब्राह्मण राष्ट्र को बनाने की शुरूआत की है जो ब्राह्मण राष्ट्र 2025 को हम इस संविधान को तोड़ कर बनाऐंगे..। तुम देखते रह जाओगे...

 

🤷🏻‍ आदीवासी- (गुस्से में आकार) ऐसे कैसे हम चुप बैठेंगे..अगर भारत के संविधान को कोई हाथ भी लगायगा तो हम उसका हाथ तोड देंगे..।।

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  अरे बावले.. अभी तो संविधान हमारे ही हाथ मे है, तू हाथ लगाने की बात कर रहा है...।।

 जिस दिन राज्यसभा पर कब्जा हो जाएगा हम संविधान को पूरा बदलेंगे और "ब्राह्मण राष्ट्र" का निर्माण होगा..।।

 

🤷🏻‍ आदीवासी- लेकिन तुम तो "हिंदू राष्ट्र" बनाना चाहते हो ना..?

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  यही तो हमारी चाल है,हिंदू समाज हमारा गुलाम था, गुलाम है और गुलाम रहेगा

तुम आदिवासी बनकर छूट गये लेकिन जब धर्म पर आधारित ब्राह्मण राष्ट्र बनेगा तब हम तुम्हे फिर से हिंदू जैसा ही गुलाम बनाएगे..।।

 

🤷🏻‍ आदीवासी- हम यह होने नहीं देंगे..।।

🙅🏻‍ ब्राह्मण- क्या कर लोगे..?

तुम लोग आपस में लड़कर एक-दुसरे से झगड रहे हो,तुम मे कभी भी एकता नहीं हो सकती,तुम लोग समाज और देश के बारे में कभी नहीं सोचते, सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे में सोचते हो, हमारे हजारो-लाखो लोग सबसे पहले ब्राह्मण समाज के बारे में ही सोचते है, हम आपस में कभी नहीं लड़ते बल्कि तुम जैसो को आपस मे लड़ाने का प्रबंध करते है।

 

🤷🏻‍ आदिवासी -  कितने दिन हमें लड़वाओगे हमारे नेता तुम्हे ठीक कर देगे...

🙅🏻‍ ब्राह्मण - (जोरो से हँसता है) तुम्हारे नेता...? कौन है तुम्हारे नेता..? तुम्हारा एक ही नेता था..जो हम पर बहुत भारी पडा,जिसने 5000  साल से चलने वाली हमारी व्यवस्था को जला दिया। बाकी तुम्हारे नेता हमें उनका बंदोबस्त करना आता है.जाओ उनमें से बहुत सारे नेता हमारे "घरजमाई" है

और घरजमाई ससुराल वालों से झगडा किया तो भी हमें फर्क नहीं पडता,तुम्हारे नेताओं के घर में एक "भक्त प्रहलाद" हम पैदा करते है।सिर्फ तुम्हारे बाबासाहब का बंदोबस्त करने मे हमे बहुत देर हो गई,वरना तुम आज मुझसे बात भी नहीं कर पाते..।

 

🤷🏻‍ आदिवासी *-  बाबासाहब के विचारों से ही हम तुम्हे रोकेंगे।

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  अरे हटो..तुम्हे बाबासाहब पढने के लिए फुरसत कहाँ है।तुम तो अपनी बीवी,बच्चे,रिश्तेदार, गाडी,बंगला, बडी-बडी प्रापर्टी बनाने में लगे हो..। बाबासाहब को हमने पढ़ा है..और सिर्फ पढ़ा ही नहीं बल्कि अमल मे भी लाते है।

उन्होने कहा-शिक्षित बनो..आज भारत में सबसे ज्यादा शिक्षित हम है। उन्होने कहा-संघटित रहो आज काश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और पश्चिम बंगाल से लेकर गुजरात तक ब्राह्मण संघटित है। बाबासाहब ने कहा-संघर्ष करो..हम तुम्हारे खिलाफ संघर्ष करते है।तुम्हारे जैसे आपस मे संघर्ष नहीं करते समझे...।

 

🤷🏻‍ आदिवासी *- हम भी संघर्ष करते

 है..मोर्चा-आंदोलन,रास्ता रोको करते है।

🙅🏻‍ ब्राह्मण- और फिर जेल जाते हो...फिर मोर्चा निकालते हो.. यही करते रहो..हम भारत पे राज करते है...।

 

🤷🏻‍ आदिवासी *-  हम भी भारत पे राज करेगे।

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  अरे..अकल के दुश्मन गली में बैठकर राजा नहीं बनता,हमारी पार्टी- एक,हमारा झंडा-एक,हमारा नेता-एक. तुम्हारी पार्टी अनेक, तुम्हारे झंडे-अनेक,तुम्हारे नेता अनेक. राज करना कोई बच्चों का खेल नहीं,जाओ हमारी सेवामें मग्न रहो।

और हाँ...बाबासाहब को कभी भी पढना मत...क्योकि जिस दिन बाबासाहब को पढोगे और अमल करोगे उस दिन हमे तुम्हारी सेवा में लगना पडेगा। मुझे  पूरा भरोसा है, तुम बाबासाहब का नाम लेकर नाचते रहो,उनके बडे-बडे पुतले बनाते रहो,अपने समाज की परेशानी पर कुछ मत करो...खाओ..पिओ..मजा करो..।।।

 

🤷🏻‍ *आदिवासी *- मै तुम्हारी बात को समझ रहा हूँ..लेकिन तुम भी मेरी बातको समझ जाओ,अब हम बाबासाहब को पढेगे जरूर.. बस हो गया.. नाच-गाना.. मै अपने समाज और देशको तुम्हारे चंगुल से जरूर बचाऊँगा..।।।          

🙅🏻‍ ब्राह्मण-  (जोर जोर से हँसता है)

    तुम्हारा सपना अच्छा है...लेकिन यह सिर्फ सपना ही रहेगा..।।।

में जानता हूँ मेरी पोस्ट को शेयर करने लाइक करने में  मेरे आदिवासी भाई लोग भी डरते इस प्रकार की पोस्ट से हमेशा दुर भागते हे

मनुवादीयो का डर दिमाग मे अच्छी तरह से घर कर गया है

🙏🙏 जय जोहार

  👏 *जय आदिवासी *

पढ़ने के बाद सोच समझ कर मंथन कीजिए,,

 

 

👉 क्या अंग्रेज बुरे थे?

              या फिर

( मुख्य कारण ब्राह्मणों ने अंग्रेजों के खिलाफ राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन छेड़़ दिया और शूद्र अतिशूद्र को वापस गुलाम बनाने के लिए 1920 में ब्राह्मण महासभा,1922 में हिन्दू महासभा व 1925 में RSS की स्थापना की।)

 

१ . #नरबलि :-

 जो कि शूद्रों की दी जाती थी। अंग्रेजों ने इसे रोकने के लिए 1830 में #कानून बनाया था।

 

२ #ब्राह्मणजजपर_रोक :-

 सन 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी,अंग्रेजों ने कहा था कि इनका चरित्र न्यायिक नहीं होता है।

 

३ #शासनमेंब्राह्मण :-

शासन व्यवस्था पर ब्राह्मणों का 100% कब्जा था।अंग्रेजों ने इन्हें 2.5% पर लाकर खड़ा कर दिया था।

 

४ #सम्पत्तिकाअधिकार :-

 अंग्रेजों ने अधिनियम 11 के तहत शूद्रों को 1795 ईस्वी में संपत्ति रखने का अधिकार दिया था।

 

५ #देवदासी_प्रथा :-

 अंग्रेजों ने ही बंद कराई,इस प्रथा में यह होता था कि शूद्र समाज की लडकियाँ #मंदिरोंमेंदेवदासी के रूप में रहती थीं,पंडा-पुजारी उनके साथ छोटी उम्र में बलात्कार करना शुरू कर देते थे और उनसे जो बच्चा पैदा होता था उसे हरिजन कहते थे।

 

६ नववधूशुद्धिकरणप्रथा :-

 सन 1819 से पहले किसी शूद्र की शादी होती थी तो ब्राह्मण उसका शुद्धीकरण करने के लिए नववधू को 3 दिन अपने पास रखते थे उसके उपरांत उसको घर भेजते थे।इस प्रथा को अंग्रेजों ने 1819 ईस्वी में बंद करवाया।

 

७. #चरक_पूजा :-

 अंग्रेजों ने 1863 ईस्वी में बंद कराई।इसमें यह होता था कि कोई पुल या भवन बनने पर शूद्रों की बलि दी जाती थी।

 

८. #गंगादान_प्रथा :-

 शूद्रों के पहले लड़के को ब्राह्मण गंगा में दान करवा दिया करते थे क्योंकि वह जानते थे कि पहला बच्चा #हृष्ट_पुष्ट होता है इसीलिए उसको गंगा में दान करवा दिया करते थे। अंग्रेजों ने इस प्रथा को रोकने के लिए 1835 में एक कानून बनाया था।

 

९. #कुर्सीकाअधिकार :-

 शूद्रों को अंग्रेजों ने 1835 ईस्वी में कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया था।इससे पहले शूद्र कुर्सी पर नहीं बैठ सकते थे।

 

१०. शिक्षाकाअधिकार :-

 अंग्रेजों ने सबके लिए शिक्षा के दरवाजे खोले।पहले शूद्र जातियों (आज की ओबीसी, एससी,एसटी) व सभी वर्ण की महिलाओं को पढ़ने का अधिकार नहीं था।

 

११. #सरकारीसेवाओंमें_प्रतिनिधित्व :-

अंग्रेजों ने शूद्र वर्ण की जातियों को सरकारी सेवाओं में #गवर्नमेंटऑफइंडिया_ऐक्ट के माध्यम से प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की थी।

 

अतः अंग्रेजों ने शूद्र/अतिशूद्र जातियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अनेक सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक सुधार किये थे।1st इंडिया एक्ट, 2nd इंडिया एक्ट,अंत में संविधान को बनवाने में अंग्रेजो की काफी अहम भूमिका रही थी।महात्मा ज्योतिबा फुले ने तो यहाँ तक कह दिया था कि शूद्र/अतिशूद्र के लिए #अंग्रेज_भगवान बनकर आए हैं।

 

नोट

मेरा उद्देश्य किसी धर्म और वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं है परंतु सच्चाई को अवगत कराना है।

 

धरती की खुदाई में लाखो साल पहले के डायनासोर के कंकाल मिल गयें, डायनासोर के अंडे मिल गयें,  जीव जंतु मिल गए❓

 

बुद्ध की मुर्तिया मिल गई, सिंधु घाटी सभ्यता मिल गई, मिश्र की सभ्यता मिल गई, मसोपोटेमिया  की सभ्यता मिल गई, जो जो अस्तित्व में थे सब मिल गए . .

 

*लेकिन अभी तक की खुदाई में

ना ब्रम्हा मिला,*

*ना विष्णु मिला,

ना शिव मिले,

ना राम मिला*

 *ना कृष्ण

ना ही 33 करोड देवी देवताओं का कोई अस्तित्व*❓

 

  इन्हें आसमान निगल गया या धरती❓

 

यही तो सभी जागृत भारतीयों को सोचना चाहिए कि इन्हें किन लोगो ने रचा, बनाया और इनके  अस्तित्व से किनको फायदा है❓

 

 जानो, छानो ,फिर मानों

 

 इन्सान ने ही भगवान का निर्माण किया है इसके तार्किक सबूत निम्नलिखित है:👇

 

1. मनुष्य के अलावा दुनिया का एक भी प्राणी भगवान को नहीं मानता❗

 

2. जहाँ इन्सान नहीं पहुँचा वहाँ एक भी मंदिर मस्जिद या चर्च नहीं मिला❗

 

3. अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग देवता है। इसका मतलब इन्सान को जैसी कल्पना सूझी वैसा भगवान बनाया❗

 

4. दुनिया में अनेक धर्म पंथ और उनके अपने-अपने देवता हैं। इसका अर्थ भगवान भी एक नहीं❓

 

5. दिन प्रतिदिन नये नये भगवान तैयार हो रहे हैं❓

 

6. अलग-अलग प्रार्थनाएं हैं❓

 

7. " माना तो भगवान, नहीं तो पत्थर "...यह कहावत ऐसे ही नहीं बनी🤔

 

8. दुनिया में देवताओं के अलग-अलग आकार और उनको प्रसन्न करने की लिए अलग-अलग पूजा❗

 

9. अभी तक किसी इन्सान को भगवान मिलने के कोई प्रमाण नहीं हैं❓

 

10. भगवान को मानने वाला और न मानने वाला भी समान जिंदगी जीता है❓

 

11. भगवान किसी का भी भला या बुरा नहीं कर सकता❓

 

12. भगवान भ्रष्टाचार अन्याय, चोरी, बलात्कार आतंकवाद, अराजकता रोक नहीं सकता❓

 

13. छोटे मासूम बच्चों पर बंदुक से गोलियाॅ दागने वालों के हाथ भगवान नहीं पकड़ सकता❓

 

14. मंदिर मठ आश्रम प्रार्थना स्थल जहाँ माना जाता है कि भगवान का वास होता है वहाँ भी बच्चे महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं❓

 

15. मंदिर मस्जिद चर्च को गिराते समय एक भी भगवान ने सामने आकर विरोध नहीं किया❓

 

16. बिना अभ्यास किये एक भी छात्र को भगवान ने पास किया हो ऐसा एक भी उदाहरण आज तक सुनने को नहीं मिला❓

 

17. बहुत सारे भगवान ऐसे हैं जिनको 25 साल पहले कोई नही जानता था! वह अब प्रख्यात भगवान हो गये❓❓

 

18. खुद को भगवान समझने वाले अब जेल की हवा खा रहे हैं❓

 

19. दुनिया में करोडों लोग हैं जो भगवान को नहीं मानते फिर भी वह सुख चैन से रह रहे हैं❓❓

 

20. हिन्दू अल्लाह को नहीं मानते।

मुस्लिम भगवान को नहीं मानते।

इसाई भगवान और अल्लाह को नहीं मानते।

हिन्दू मुस्लिम गाॅड(christ) को नहीं मानते।

 

फिर भी भगवानों ने एक दुसरे को नहीं पूछा कि ऐसा क्यों❓❓

 

21. एक धर्म कहता है कि भगवान का आकार नहीं❓

 

दूसरा धर्म भगवान को आकार देकर फैन्सी कपड़े पहनाता है❓

 

तीसरा धर्म अलग ही बताता है । मतलब सच क्या है❓

 

22. भगवान है तो लोगों में उसका डर क्यों नहीं❓

 

23. मांस भक्षण करने वाला भी जी रहा है और नहीं करने वाला भी जी रहा है । और जो दोनों खाता है वह भी जी रहा है🤔❓❓

 

24. रूस, अमेरिका भगवान को नहीं मानते फिर भी वे महासत्ता हैं❓❓

 

25. जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो फिर चार वर्ण की व्यवस्था सिर्फ भारत में क्यों पाई जाती है ? अन्य देशों में क्यों नही पाई जाती है❓

 

जब पिछले जन्म के कर्म के आधार पर जातियों का निर्माण किया गया है तो भारतीय जातियां अन्य देशों में क्यों नहीं पायी जाती है❓

 

26. जब वेद ईश्वर की वाणी है तो भारत के अलावा अन्य देशों में वेद क्यों नहीं हैं ? तथा वेद सिर्फ ब्राह्मणों की भाषा संस्कृत में क्यों है अन्य भाषाओं जैसे बंगाली, उड़िया, उर्दू, अंग्रेजी, मलयालम, तेलगू, फारसी, आदि में क्यों नहीं है❓

 

ATM कार्ड जैसा होगा राशन कार्ड: अंगूठा लगाने का झंझट खत्म अब कोई नहीं डकार सकेगा गरीब का निवाला

 

प्रदेश में राशन वितरण की स्मार्ट व्यवस्था जल्द लागू हो सकती है खाद्यान वितरण में गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही अब एटीएम कार्ड की तरह उपभोक्ताओं को स्मार्ट कार्ड दिए जाने की योजना बनाई जा रही है इसके पहले गड़बड़ियां रोकने के लिए पीओएस डिवाइस से ऑनलाइन और ऑफलाइन राशन वितरण की व्यवस्था की गई थी लेकिन इसका भी खास असर नहीं हुआ

 

SMART CARD से बनेगा स्मार्ट एमपी

 

उचित मूल्य की दुकानों से राशन लेने वालों की अक्सर शिकायतें रहती हैं कि उस महीने का राशन तो हमें मिला ही नहीं, फिर कागजों में एंट्री कैसे हो गई. कई उपभोक्ताओं की शिकायतें होती हैं कि पिछले महीने राशन कम मिला. ऐसी ही शिकायतों को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार नई व्यवस्था करने जा रही है. सरकार चाहती है कि ATM कार्ड की तर्ज पर उपभोक्ताओं को भी राशन के लिए कार्ड मिले. ये कार्ड उपभोक्ता के मोबाइल से जुड़ा होगा. राशन मिलते ही मोबाइल पर इसका मैसेज आएगा. माना जा रही है कि इससे राशन वितरण की व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी. गड़बड़ी की आशंका कम होगी. उपभोक्ताओं को पता होगा, कि कब उन्होंने राशन लिया है और कितना लिया है. क्योंकि कार्ड और मोबाइल में ये सब प्रमाण के रूप में सेव रहेगा

 

कोई नहीं डकार सकेगा गरीब का निवाला

 

प्रदेश में 25 हजार 209 उचित मूल्य की दुकानें हैं. इनके जरिए करीब 1 करोड़ 11 लाख परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत रियायती दरों पर राशन का वितरण किया जाता है. इन दुकानों का संचालन करीब 16 हजार सहकारी समितियां, साढ़े 4 हजार उपभोक्ता सहकारी भंडार और डेढ़ सौ वनोपन समितियां कर रही हैं. अभी तक इन उचित मूल्य की दुकानों पर राशन का वितरण POS मशीनों से किया जाता रहा है.कई बार मशीनें तकनीकी कारणों से खराब हो जाती हैं. फिर कई जगहों पर ऑफलाइन ही राशन बांटा जाता है. यहीं से गड़बड़ी शुरु होती है सरकार भी कई बार राशन वितरण में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त एक्शन लेने की चेतावनी दे चुकी है.गड़बड़ियों को रोकने के लिए ही स्मार्ट कार्ड की व्यवस्था लागू करने की तैयारी हो रही है

 

सरकार ने स्व-सहायता समूह और निजी क्षेत्र को भी दुकानें संचालित करने के लिए दी हैं. इन दुकानों का स्वरूप भी बदलने की तैयारी हो रही है

 

ये बदलाव करने की है तैयारी

 

सरकार राशन की दुकान का नाम बदलने का सोच रही है

 

सरकार चाहती है कि इसका नाम अक्षयपात्र योजना, अन्नपूर्णा या इसी तरह कुछ और दिया जा सकता है

 

ज्यादातर दुकाने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां चलाती हैं. इसलिए इसका नाम कृषि से जुड़ा हो सकता है

 

राशन की दुकानों का ठिकाना स्थायी और निर्धारित किया जाएगा

 

ग्रामीण इलाकों में राशन की दुकानों का स्थान निश्चित नहीं है. समय-समय पर दुकान शिफ्ट होती रहती हैं

 

सहकारिता विभाग, पंचायत विभाग के साथ मिलकर इनके लिए स्थान सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है

 

राशन दुकानों का रंग-रूप भी बदला जाएगा

 

राशन की सभी दुकानों का रंग एक जैसा किया जा सकता है

 

राशन की दुकानों पर अन्य खाद्य सामग्री भी बेचने की योजना है

 

 

पौराणिक आरक्षण

 

🚫संसार की समस्त धन संपत्ति का मालिक ब्राम्हण के सिवा कोई दुसरा नहीं है!!मनु.1/100

 

🚫ब्राह्मण शूद्र की संपत्ति को जबरन छीन सकता है क्योंकि शूद्र का अपना कुछ भी नहीं है!!मनु.8/417

 

🚫शूद्र को संपत्ति इकट्ठा नहीं करना चाहिए इससे ब्राह्मण को दुख होता है!!मनु.10/129

 

🚫जो शूद्र अपने प्राण, धन और स्त्री ब्राह्मण को अर्पित कर दे, उस शूद्र का भोजन ग्रहण करने योग्य है!!

विष्णु पुराण 5/11

🚫मनुष्यों में ब्राह्मण तेजी में सूर्य और संपूर्ण शरीर में मष्तिष्क के समान सब धर्मों में श्रेष्ठ है!!मनु.8/82

 

🚫मूर्ख ब्राह्मण का भी श्रेष्ठता में उच्च स्थान है!!मनु.9/317

🚫पूजिय विप्र सकल गुण हीना, शूद्र न गुनगन ज्ञान प्रवीना!!रामचरित मानस अरण्य कांड

 

🚫जो वरणाधम तेलि कुम्हारा, स्वपच किरात कोल कलवारा तथा अभीर यमन किरात खस, स्वपचादि अति अघरुप जे!!

अर्थात : तेली, कुम्हार, भंगी, आदिवासी, कलवार, अहीर, मुसलमान और खटिक नींच और पापी कौमें होती है!!रामचरित मानस उत्तर कांड

 

🚫ब्राह्मण दुश्चरित्र हो तब भी पूजनीय है और शूद्र जितेन्द्रिय होने पर भी नहीं!पराशर स्मृति 8/33

🚫ब्राह्मण की किसी बात पर शंका नहीं करना चाहिए क्योंकि यह वेद की आज्ञा है!!ऋग्वेद8/4/10

 

🚫जिन ब्राम्हणों ने क्रुद्ध होकर अग्नि को सर्वभक्षी बना दिया, समुद्र का जल खारा कर दिया तथा चंद्रमा को तपेदिक का रोगी बना दिया, उनको कुपित करके कौन ऐसा है जो नष्ट नहीं हो जाएगा?मनु.9/314

 

🚫ब्राह्मण यदि शूद्र को गाली दे तो कोई दंड न दे परंतु यदि शूद्र ब्राह्मण को गाली दे तो प्राणदंड दिया जाए!!गौतम धर्म शूत्र 12/8/31तथा मनु.8/268

 

🚫ब्राह्मण यदि दुसरे के धन को चोरी करे या किसी का बलात्कार भी करे तो राजा उसे कोई दंड न दे!!मनु.11/9

🚫भले बुरे किसी भी कर्म को करते हुए ब्राह्मण का तिरस्कार नही करना चाहिए!!महाभारत आदि पर्व199/13

 

🚫यदि कोई शूद्र किसी द्विज को गाली देता है अथवा मारता है तो उसका वह अंग काट देना चाहिए, झूठा दोष लगाने पर उसकी जीभ के टुकड़े टुकड़े करके उसे सूली पर चढ़ा दें,अपमान करने पर उसकी जीभ काट दें उच्च वर्ण का नाम घृणा से लें तो दस अंगुल की कील गरम करके जीभ में ठोक दी जाए, ब्राह्मण को धर्म सिखाने पर मुख तथा कान में गर्म तेल भरवा दिया जाए!!

नारद स्मृति412/414

 

🚫शूद्र द्वारा अपने को ब्राह्मण कहने पर उसकी आंखों में तेजाब डालकर उन्हें फोड़ देना चाहिए, किसी राजा के राज्य में शूद्र यदि मुकदमा करता है तो उसका राज्य कीचड़ में फंसी गाय की तरह दुखित होता है!!मनु.2/11

 

🚫बिल्ली, नेवला, नीलकंठ, मेंढक, कुत्ता, गोहू, उल्लू कौआ इनमें से किसी एक को मारकर शूद्र हत्या का प्रायश्चित करें!!मनु.11/131

 

🚫ब्राह्मण विहीन क्षत्रिय कभी वृद्धि नहीं कर सकता और ब्राह्मण भी क्षत्रिय के बिना वृद्धि नहीं पा सकता। ब्राह्मण और क्षत्रिय यदि मिलकर रहते हैं तो इस लोक परलोक दोनों में अपार सुख पाते हैं!!मनु.9/322

 

🚫राजा को चाहिए कि वैश्यों और शूद्रों से अपना अपना कार्य करवाता रहे क्योंकि वे अपने कार्यों को छोड़ देंगे तो ये दुनिया तबाह कर देंगे!!मनु.8/418

 

आज ये हमारे आरक्षण और संविधान का विरोध इसीलिए करते हैं,ये संविधान को खत्म कर अपना आरक्षण फिर से बहाल करना चाहते हैं

एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था,  उसको सभी जानते थे ,बड़ा मान सम्मान मिलता था; अचानक किसी कारण वश वह निष्क्रीय रहने लगा , मिलना - जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया।

 

       कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस संगठन के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया । मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।

 

        दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया। और फिर से शांत बैठ गया।

 

      मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने संगठन के मुखिया के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुई लकड़ी की आग की लौ धीरे धीरे कम हो रही है। कुछ देर में आग बिल्कुल बुझ गई। उसमें कोई ताप नहीं बचा। उस लकड़ी से आग की चमक जल्द ही बाहर निकल गई।

 

          कुछ समय पूर्व जो उस लकड़ी में उज्ज्वल प्रकाश था और आग की तपन थी वह अब एक काले और मृत टुकड़े से ज्यादा कुछ शेष न था।

 

          इस बीच.. दोनों मित्रों ने एक दूसरे का बहुत ही संक्षिप्त अभिवादन किया, कम से कम शब्द बोले। जाने  से पहले मुखिया ने अलग की हुई  बेकार लकड़ी को उठाया और फिर से आग के बीच में रख दिया। वह लकड़ी फिर से सुलग कर लौ बनकर जलने लगी और चारों ओर रोशनी तथा ताप बिखेरने लगी।

 

         जब आदमी, मुखिया को छोड़ने के लिए दरवाजे तक पहुंचा तो उसने मुखिया से कहा मेरे घर आकर मुलाकात करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

 

आज आपने बिना कुछ बात किए ही एक सुंदर पाठ पढ़ाया है कि अकेले व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता, संगठन का साथ मिलने पर ही वह चमकता है और रोशनी बिखेरता है ; संगठन से अलग होते ही वह लकड़ी की भाँति बुझ जाता है।

 

        मित्रों संगठन से ही हमारी पहचान बनती है, इसलिए संगठन हमारे लिए सर्वोपरि होना चाहिए ।

 

 संगठन के प्रति हमारी निष्ठा और समर्पण किसी व्यक्ति के लिए नहीं, उससे जुड़े विचार के प्रति होनी चाहिए ।

 

         संगठन किसी भी प्रकार का हो सकता है , पारिवारिक , सामाजिक, व्यापारिक (शैक्षणिक संस्थान, औधोगिक संस्थान )  सांस्कृतिक इकाई , सेवा संस्थान आदि।

 

 संगठनों के बिना मानव जीवन अधूरा है , अतः हर क्षेत्र में जहाँ भी रहें संगठित रहें 

डालडा और नेहरू

 

आप सोच रहे होंगे

डालडा और नेहरू का क्या सम्बन्ध है?

उत्तर है, बहुत गहरा।

 

डालडा हिन्दुस्तान लिवर का देश का पहला वनस्पति घी था

 

जिसके मालिक थे स्वतन्त्र भारत के उस समय के सबसे धनी सेठ रामकृष्ण डालमिया

 

और यह लेख आपको अवगत कराता है कि

नेहरू कितना दम्भी, कमीना , हिन्दू विरोधी और बदले के दुर्भाव और मनोविकार से ग्रसित इन्सान था।

 

#टाटा #बिड़ला और #डालमिया

ये तीन नाम बचपन से सुनते आए है।

 

मगर डालमिया घराना अब न कही व्यापार में नजर आया और न ही कहीं इसका नाम सुनाई देता है।

 

#डालमिया घराने के बारे में जानने की बहुत इच्छा थी -

 

लीजिए आप भी पढ़िए की #नेहरू के जमाने मे भी

१ लाख करोड़ के मालिक डालमिया को साजिशो में फंसा के #नेहरू ने कैसे बर्बाद कर दिया।

 

ये तस्वीर है राष्ट्रवादी खरबपति सेठ रामकृष्ण डालमिया की ,

जिसे नेहरू ने झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया तथा कौड़ी-कौड़ी का मोहताज़ बना दिया।

 

 वास्तव में डालमिया जी ने स्वामी करपात्री जी महाराज के साथ मिलकर गौहत्या एवम हिंदू कोड बिल पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर नेहरू से कड़ी टक्कर ले ली थी।

 

लेकिन नेहरू ने हिन्दू भावनाओं का दमन करते हुए गौहत्या पर प्रतिबंध भी नही लगाई तथा हिन्दू कोड बिल भी पास कर दिया और प्रतिशोध स्वरूप हिंदूवादी सेठ डालमिया को जेल में भी डाल दिया तथा उनके उद्योग धंधों को बर्बाद कर दिया।

 

इतिहास इस बात का साक्षी है कि

जिस व्यक्ति ने नेहरू के सामने सिर उठाया उसी को नेहरू ने मिट्टी में मिला दिया।

 

देशवासी प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद और सुभाष बाबू के साथ उनके निर्मम व्यवहार के बारे में वाकिफ होंगे मगर इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं कि

 

उन्होंने अपनी ज़िद के कारण देश के उस समय के सबसे बड़े उद्योगपति सेठ रामकृष्ण डालमिया को बड़ी बेरहमी से मुकदमों में फंसाकर न केवल कई वर्षों तक जेल में सड़ा दिया

बल्कि उन्हें कौड़ी-कौड़ी का मोहताज कर दिया।

 

जहां तक रामकृष्ण डालमिया का संबंध है,

वे राजस्थान के एक कस्बा चिड़ावा में एक गरीब अग्रवाल घर में पैदा हुए थे और मामूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने मामा के पास कोलकाता चले गए थे।

 

वहां पर बुलियन मार्केट में एक salesman के रूप में उन्होंने अपने व्यापारिक जीवन का शुरुआत किया था।

 

भाग्य ने डटकर डालमिया का साथ दिया और कुछ ही वर्षों के बाद वे देश के सबसे बड़े उद्योगपति बन गए।

 

उनका औद्योगिक साम्राज्य देशभर में फैला हुआ था जिसमें समाचारपत्र, बैंक, बीमा कम्पनियां, विमान सेवाएं, सीमेंट, वस्त्र उद्योग, खाद्य पदार्थ आदि सैकड़ों उद्योग शामिल थे।

 

डालमिया सेठ के दोस्ताना रिश्ते देश के सभी बड़े-बड़े नेताओं से थी और वे उनकी खुले हाथ से आर्थिक सहायता किया करते थे।

 

इसके बाद एक घटना ने नेहरू को डालमिया का जानी दुश्मन बना दिया।

 

कहा जाता है कि डालमिया एक कट्टर सनातनी हिन्दू थे और उनके विख्यात हिन्दू संत स्वामी करपात्री जी महाराज से घनिष्ट संबंध थे।

 

करपात्री जी महाराज ने १९४८ में

एक राजनीतिक पार्टी

'राम राज्य परिषद' स्थापित की थी।

 

१९५२ के चुनाव में यह पार्टी लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और उसने १८ सीटों पर विजय प्राप्त की।

 

हिन्दू कोड बिल और गोवध पर प्रतिबंध लगाने के प्रश्न पर डालमिया से नेहरू की ठन गई.

 

पंडित नेहरू हिन्दू कोड बिल पारित करवाना चाहते थे जबकि स्वामी करपात्री जी महाराज और डालमिया सेठ इसके खिलाफ थे।

 

हिन्दू कोड बिल और गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्वामी करपात्रीजी महाराज ने देशव्यापी आंदोलन चलाया जिसे डालमिया जी ने डटकर आर्थिक सहायता दी।

 

नेहरू के दबाव पर लोकसभा में हिन्दू कोड बिल पारित हुआ जिसमें हिन्दू महिलाओं के लिए तलाक की व्यवस्था की गई थी।

 

कहा जाता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद हिन्दू कोड बिल के सख्त खिलाफ थे

 इसलिए उन्होंने इसे स्वीकृति देने से इनकार कर दिया।

 

ज़िद्दी नेहरू ने इसे अपना अपमान समझा और इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पुनः पारित करवाकर राष्ट्रपति के पास भिजवाया।

 

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति को इसकी स्वीकृति देनी पड़ी।

 

इस घटना ने नेहरू को डालमिया का जानी दुश्मन बना दिया।

 

कहा जाता है कि नेहरू ने अपने विरोधी सेठ राम कृष्ण डालमिया को निपटाने की एक योजना बनाई।

 

नेहरू के इशारे पर डालमिया के खिलाफ कंपनियों में घोटाले के आरोपों को लोकसभा में जोरदार ढंग से उछाला गया।

 

इन आरोपों के जांच के लिए एक विविन आयोग बना।

 

बाद में यह मामला स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिसमेंट (जिसे आज सी बी आई कहा जाता है) को जांच के लिए सौंप दिया गया।

 

नेहरू ने अपनी पूरी सरकार को डालमिया के खिलाफ लगा दिया।

 

उन्हें हर सरकारी विभाग में प्रधानमंत्री के इशारे पर परेशान और प्रताड़ित करना शुरू किया।

उन्हें अनेक बेबुनियाद मामलों में फंसाया गया।

 

नेहरू की कोप दृष्टि ने एक लाख करोड़ के मालिक डालमिया को दिवालिया बनाकर रख दिया।

 

उन्हें टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिन्दुस्तान लिवर और अनेक उद्योगों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा।

 

अदालत में मुकदमा चला और

डालमिया को तीन वर्ष कैद की सज़ा सुनाई गई।

 

तबाह हाल और अपने समय के सबसे धनवान व्यक्ति डालमिया को नेहरू की वक्र दृष्टि के कारण जेल की कालकोठरी में दिन व्यतीत करने पड़े।

 

व्यक्तिगत जीवन में डालमिया बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे।

 

उन्होंने अच्छे दिनों में करोड़ों रुपये धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए दान में दिये।

 

इसके अतिरिक्त उन्होंने यह संकल्प भी लिया था कि जबतक इस देश में गोवध पर कानूनन प्रतिबंध नहीं लगेगा वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।

 

उन्होंने इस संकल्प को अंतिम सांस तक निभाया।

 

गौवंश हत्या विरोध में १९७८ में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

 

साभार🙏🏻

 

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