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Monday, May 18, 2020

गोबरधन मिश्रा , चतुरनाथ पांडे , और गिरजानंद तिवारी , तीन अलग-अलग पार्टी से मुखिया के चुनाव में खड़े होते है ,


गोबरधन मिश्रा , चतुरनाथ पांडे , और गिरजानंद तिवारी , तीन अलग-अलग पार्टी से मुखिया के चुनाव में खड़े होते है ,
मिश्रा का चुनाव चिन्ह ""तिलक छाप"" है , पांडे का चुनाव चिन्ह ""जेनउ छाप"" है और तिवारी का चुनाव चिन्ह ""शिखा"" (टिक्की) छाप है.......
तीनो ब्राह्मण , मिश्रा , पांडे और तिवारी अलग-अलग समय पर अलग-अलग जातियों के बीच वोट मांगने जाते है ,
सुबह-सुबह , सबसे पहले दुसाध (पासवान) समुदाय के बीच आता है , मिश्रा आता है और ""घोल्टन पासवान"" को 5 हजार दे देता है कहता है , सभी का वोट ""तिलक छाप"" को मिलना चाहिए ,
दोपहर में यादव समुदाय के बीच पांडे आता है , पांडे को पता है कि ""घोल्टन पासवान"" को मिश्रा ने पहले ही पैसा दे दिया है , पांडे ने ""मंटू यादव"" को 5 हजार देता है और कहता है सारा वोट ""जेनउ छाप"" को मिलना चाहिए ,
शाम को मलहाह (चौधरी) समुदाय के बीच तिवारी आता है , उसे पता है कि पहले ही पासवान और यादव को पैसा मिल चुका है , तिवारी ने ""घोकू चौधरी"" को 5 हजार देता है , कहता है सभी का वोट ""शिखा छाप"" को मिलना चाहिए.......
मिश्राजी के पीछे , ""घोल्टन पासवान"" और उसके समर्थक जिंदाबाद , जिन्दाबाद करते चलते है ,
पांडेजी के पीछे , "" मंटू यादव"" और उसके समर्थक जिंदाबाद , जिंदाबाद करते हुए चलते है ,
तिवारीजी के पीछे , ""घोकू चौधरी"" और उसके समर्थक जिंदाबाद , जिंदाबाद करते हुए चलते है ,
चुनाव प्रचार-प्रसार के दौरान , ""घोल्टन पासवान"", ""मंटू यादव"" और ""घोकू चौधरी"" में विवाद हो जाता है , नौबत जातीय झगड़े तक पहुँच जाता है ,
विवाद को बढ़ता देख , गाँव में पुलिस तैनात कर दिया जाता......
चुनाव होता है , तीनों में एक ब्राह्मण जीत जाता है , जाहिर है , चुनाव में ब्राह्मण ही है तो जीतेगा ब्राह्मण ही ,
चुनाव जीत कि पार्टी होती है , तीनो ब्राह्मण परिवार खुशी-खुशी एक दूसरे से गले मिलता है , बधाई , मुबारकबाद देता है.......
इधर चुनाव समाप्त भी हो गया और ब्राह्मण विजयी भी हुआ , मगर तीनो """पासवान , यादव और चौधरी"" अभी भी एक दूसरे का दुश्मन बना बैठा है , जैसे जान लेकर ही मानेगा.......
चलते-चलते बताता चलूँ ,
आगे चलकर मिश्राजी और पांडेजी रिश्तेदार बन जाते है , मिश्रजी का बेटा और पांडेजी कि बेटी कि शादी हो जाती है , पता चला है कि दोनो के बीच रिश्तेदारी करवाने में तिवारीजी का ही अहम रौल था.......



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