The constitution of
India भारत का संविधान
हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 जनवरी 1949 ई. नीति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी संवत nks gtkj Ng% विक्रमी को दत्त द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मा समर्पित करते हैं
भारत का संविधान
भाग 1
संघ और उसका राज्य क्षेत्र
1. संघ का नाम और राज्य क्षेत्र-1 भारत अर्थ अर्थ इंडिया राज्यों का संघ होगा
2. राज्य और उनकी राज्य क्षेत्र में होंगे जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं
3 भारत की राज्य क्षेत्र में-
1. राज्यों के राज्य क्षेत्र
2. पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट संघ राज्य क्षेत्र और
3. ऐसे अन्य राज्य क्षेत्र जो अर्जित किए जाएं समाविष्ट होंगे
2. नए राज्यों का प्रवेश किया स्थापना- संसद विधि द्वारा ऐसे निबंधन और शर्तें पर जो वह ठीक समझे संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकेगी
2का सिक्किम का सॉन्ग के साथ संयुक्त किया जाना- संविधान 36 व संशोधन अधिनियम 1975 की धारा 5 द्वारा26-04-1975 से निर्मित
3. नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों की क्षेत्रों सीमा या नामों में परिवर्तन- संसद विधि द्वारा-
A.
किसी राज्य में से उसका राज्य क्षेत्र अलग करके अथवा दो या अधिक राज्यों को या राज्यों के भागों को मिलाकर अथवा किसी राज्य क्षेत्र को किसी राज्य की फाग के साथ मिला कर सकेंगे
B.
किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा सकेंगी
C.
किसी राज्य का क्षेत्र घटा सकेंगे
D.
किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेंगी
E.
किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेंगे
F.
किसी राज्य के नाम में परिवर्तन कर सकेंगे
परंतु इस प्रयोजन के लिए कोई विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना और जहां विधेयक में अंतर बिष्ट स्थापना का प्रभाव---- राज्यों में से किसी की क्षेत्र सीमाओं या नाम पर पड़ता है वह जब तक उस राज्य की विधान मंडल द्वारा उस पर अपने विचार ऐसी अवधि के भीतर जो निर्देश में विनिर्दिष्ट की जाएं या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो राष्ट्रपति द्वारा अनुवाद की जाए प्रकट किए जाने के लिए वह विधेयक राष्ट्रपति द्वारा उसे निर्देशित नहीं कर दिया गया है और इस प्रकार विनिर्दिष्ट या अनुवाद अवधि समाप्त नहीं हो गई है संसद की किसी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जाएगा
स्पष्टीकरण1- इस अनुच्छेद के खंड काशी खंड डा में राज्य के अंतर्गत संघ राज्य क्षेत्र हैं किंतु परंतु में राज्य के अंतर्गत संघ राज्य क्षेत्र नहीं है
1. संविधान सातवा संशोधन अधिनियम 1956 की धारा दो द्वारा खंड 2:00 के स्थान पर प्रतिस्थापित
2. संविधान सातवा संशोधन अधिनियम 1956 की धारा द्वारा उपखंड खाकी स्थान पर प्रतिस्थापित
3. संविधान 35 वा संशोधन अधिनियम 1974 की धारा 2 द्वारा01-03-1975 से अनुच्छेद दो अंतर स्थापित किया गया
4. संविधान वाचवा संशोधन अधिनियम 1955 की धारा 2 द्वारा परंतु के स्थान पर प्रतिस्थापित
5. संविधान 7 व संशोधन अधिनियम 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा पहली अनुसूची की भाग का या घाघरा में विनिर्दिष्ट शब्दों और अक्षरों का लॉक किया गया
6. संविधान 18 व संशोधन अधिनियम 1966 की धारा 2 द्वारा स्थापित
` स्पष्टीकरण 2- खंड का द्वारा संसद को शक्ति के अंतर्गत राज्य किया राज्य क्षेत्र के किसी भाग को किसी अन्य राज्य से राज्य संघ राज्य क्षेत्र के साथ मिलाकर नए राज्य संघ राज्य क्षेत्र का निर्माण कार्य करना है
4. पहली अनुसूची और चौथी अनुसूची के संशोधन तथा अनुपूरक अनुषंगिक और प्रमाणित उपबंध करने के लिए अनुच्छेद2 और अनुच्छेद तीन के अधीन बनाई गई विधियां-1 अनुच्छेद दो या अनुच्छेद 3 में निर्दिष्ट किसी विधि में पहली अनुसूची और चौथी अनुसूची के संशोधन के लिए ऐसे उपबंध अंतर विश्ड होंगे जो उस विधि के उप बंधुओं को प्रभावित करने के लिए आवश्यक हूं तथा ऐसे अनुपूरक अनुषांगिक और प्रमाणित उपबंध भी जिनके अंतर्गत ऐसी विधि से प्रभावित राज्य राज्यों की संसद में और विधानमंडल या विधान मंडलों में प्रतिनिधित्व के बारे में बंद हैं अंतर बिष्ट हो सकेंगे जिन्हें संसद आवश्यक समझे
2. पूर्वोत्तर प्रकार की कोई विधि अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी
दोस्तों जागो इंडिया न्यूज वेबसाइट भारत की संविधान की प्रस्तावना के बारे में यह पहला लेखन प्रस्तुत करने जा रहा है इस वेबसाइट को देखने वाले सभी महानुभाव से निवेदन है कि भारत के हर नागरिक चाहे वह जो भी समुदाय से हो जो भारत में रहता हूं यहां का निवासी है उसे भारत का संविधान मालूम होना चाहिए अपने हक अधिकार को संविधान के माध्यम से ही हम जान सकते हैं कृपया पोस्ट को अपने दोस्त भाई सहपाठी तक पहुंचाएं ताकि सभी लोग जाने ऐसी कोई वेबसाइट नहीं है जो संविधान की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रही हो न्यूज वेबसाइट बहुत सारे भारत में चल रहे हैं लेकिन वह तरह तरह की बातों को सामने रखते हैं मगर संविधान की बात कभी सामने नहीं रखते हैं इसी को ध्यान में रखते हुए जागो इंडिया न्यूज़ वेबसाइट का निर्माण किया गया है जो लोगों को भारत की संविधान तथा उनके हक अधिकारों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएगी मेरा आप सभी से निवेदन है कि इस जानकारी को आगे अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें इस संविधान का भाग 2 मैं अगले पोस्ट में आपकी समक्ष प्रस्तुत करूंगा संविधान की हर जानकारी को मैं यहां पर प्रस्तुत करूंगा इसको आप अध्ययन कर सकेंगे
धन्यवाद
प्रस्तुतकर्ता जागो इंडिया न्यूज़

No comments:
Post a Comment
you have any dauts, Please info me know