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Monday, March 16, 2020

गोंडीयन समुदाय का अपना होली मनाने का तरीका औरो से बिलकुल अलग है.


होली_स्पेशल(शिमगा)🌹
गोंडीयन शिमगा शिवमगवरा
🌱गोंडीयन समुदाय का अपना होली मनाने का तरीका औरो से बिलकुल अलग है. जिसे #शिमगा कहा जाता है. शिमगा को #शिवमगवरा नाम से भी जाना जाता है. शिवमगवरा का अर्थ शिव ले जाओ गौरा को”. आप सोचते होंगे होलिका मूलनिवासी महिला हत्या का यह त्यौहार गोंडीयन समुदाय में क्यों मनाते है.

प्राचीन काल में जब आर्यों ने गोंड समुदाय के गंडराज्यों पर आक्रमण किया तो घमासान युद्ध छिड़ गया. हमारे संभु #योग और #तंद्री विद्या में प्रवीण थे जब तक सम्भु योग साधना में लीन रहते थे उनके उपासको को कोई युद्ध में हरा नहीं सकता था.. यह बात आर्यों को गुप्तहेरो द्वारा पता चलने पर सम्भु को जाल में फसाने दक्ष कन्या पार्वती को भेजा गया. लेकिन दक्ष कन्या सम्भु को अपने जाल में फसाने नाकामयाब रही तो क्रोधित होकर राजा ने उसे मारने की योजना बनाई.

षड्यंत्र के तहत राजा ने महापूजा आयोजीत कर अपनी कन्या को निमत्रण भेजा लेकिन सम्भु को निमत्रण ना मिलने से उन्होंने जाना उचित नही समजा. पूजा में पार्वती का घोर अपमान किया गया और विरोध करने पर उसे अग्नि कुंड में धकेल दिया गया. जब यह सम्भु के सेवको को पता चला तो #शिवमगवरा #शिवमगवरा चिल्लाते हुवे सम्भु की और दौड़ पड़े. संभु को खबर मिलते ही क्रोधित होकर उन्होंने दक्ष राजा के महाल को जलाकर भस्म कर दिया.
इस तरह दक्ष राजा के महल की होली सम्भु ने जलाई. उनके सेवको ने शिव गवरा जो हार जो, बनोरियाल फोयाद को, बनोरियाल फोयाद को, ऐसे नारे लगाते हुवे गवरा दाई की राख अपने मस्तक पर लगाकर आर्यों को नामशेष करने की सौगंध खायी.

इसी घटना को याद करते हुवे कोयतूर होली मनाते है. कोयतूर में प्लश के फूलो का रंग एकदूसरे पर डालकर शिमगा मनाया जाता है.

आधुनिक काल में प्लश की जगह रासायनिक रंगों ने ले लिए है. जिसका परिणाम आप सब जानते हो. व्यक्तिगत तौर पर मेरे विचार से लकड़ी जलाकर पर्यावरण को हम नुक्सान ही पोहचते है. होलिका के इतिहास से इस पोस्ट का कोई संबध नही. यह कोयतुर समुदाय का अपना खास त्यौहार है जिसे आज भी पुरे भारत भर के गोंड समुदाय हजारो वर्षो से शिमगा मनाते है.

आज होली में अश्लीलता का खुला प्रदर्शन होता है. कही भांग तो कही शराब, कही शबाब हमारे संस्कृति को ज़िंदा जलाने काफी है. उसपर कीचड़, गुब्बारे, गोबर, अंडे  फेककर बड़ी शान से कहते है बुरा ना मानो होली है
हम कोयतूर शिमगा ही मनाएंगे. प्रकृति के साथ जीने का अपना अलग ही मजा है.

संभु_गौरा ता सेवा सेवा💐💐💐

तिरु किशोरदादा वरखडे
नेशनल गोंडवाना यूथ फ़ोर्स

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