सर्वहारा की अधिनायकशाही का स्वप्न
लेकर जो आंदोलन चले वे भारत मे न जातियों के प्रश्न से जूझे न जनजातियों के प्रश्न
से जूझे।
उन्होंने दलितों और ट्राइब्स को सिर्फ
गरीब और मजदूर की तरह देखा, ऐसे लोगों की तरह देखा जिनका कोई अपना संस्कृति धर्म और इतिहास नहीं
है।
उन्होंने यह मान लिया कि दलितों, ट्राइबल्स के शोषकों का धर्म ही दलितों
ट्राइबल्स का भी धर्म है।
इस तरह इन आंदोलनों ने जल जंगल जमीन
मजदूर और मजदूरी की तो खूब बात की लेकिन संस्कृति, धर्म और भाषा के मुद्दों को होशियारी
से दबा दिया।
आज न केवल कम्युनिस्ट खेमे से बल्कि
अन्य विचारधाराओं से आने वाले आंदोलन भी ट्राइबल धर्म, संस्कृति भाषा और इतिहास की पुनर्खोज
और उसको प्रचारित करने से कतराते हैं।
दुर्भाग्य से सभी पार्टियां उभरते
ट्राइबल लीडर्स को हाइजेक करके उन्हें चुनावी राजनीति का और सत्ता का चस्का लगाकर
बर्बाद कर देते हैं।
अब आजकल उभर रहे ट्राइबल लीडर्स की
पहली जिम्मेदारी यह है कि वे सब तरह के षड्यंत्रों और लालच से बचते हुए ट्राइबल
समाज के एक धर्म, एक संस्कृति और एक इतिहास को उजागर करें और पक्का काम करें।
हर लोकसभा चुनाव के पहले बहुत सी
पोलिटिकल पार्टियां जाहिर या छुपे तौर पर अन्ना हजारे स्टाइल कई सारे आंदोलन और
मंच खड़े करती हैं। अक्सर ये किसी न किसी पुराने मंच की ही छुपी हुई शाखा होती है
जो दलितों, ट्राइबल्स, ओबीसी, किसानों, मजदूरों और सब तरह के गरीबों को लुभाकर
उन्हें उनके सांस्कृतिक, राजनीतिक और धार्मिक इतिहास के महत्वपूर्ण काम से भटकाकर दूसरे कामों
में उलझा देती हैं और चुनाव निकलते ही इन लीडर्स को कचरे में डालकर निकल लेती हैं।
ट्राइबल समाज और ट्राइबल लीडर्स को इन
पार्टियों और ऐसे मौसमी आंदोलनों से बचकर अपने धर्म इतिहास और संस्कृति को
लिपिबद्ध करके अपने लोगों में प्रचारित करना चाहिए। यह पहली प्राथमिकता है जिससे
उन्हें बिल्कुल भी नहीं भटकना चाहिए।
अगर वे बार बार भटकते रहे तो वे हर बार
किसी न किसी वैश्विक या राष्ट्रीय विचारधारा के द्वारा इस्तेमाल कर लिए जाएंगे।
बार बार उन्हें जंगल से खदेड़ा जाएगा और उन्ही के नाम पर वोट लेने वाले सत्ता में
पहुंचकर उनके धर्म और संस्कृति के मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालते रहेंगे।
ट्राइबल समाज को याद रखना चाहिए कि वो
ही कौमें दुनिया मे राज करती हैं जिनका अपना धर्म संस्कृति और इतिहास होता है।
जिनके पास अपना धर्म, संस्कृति और इतिहास नहीं होता वे हमेशा गुलाम और गरीब ही बने रहते
हैं।

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