CAA/NRC का बहुजन समाज,आदिवासियों पर प्रभाव को समझिए
1-
CAB एवं CAA क्या है
CAB Citienship Amendment
Bill 2019 या सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल 2019 एक विधेयक है जो संसद में पारित होने के बाद एवं 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति द्वारा अपनी सहमति देने की बात CAAसीसीए या नागरिकता संशोधन कानून 2019 बन गया है
2-
CAA सीसीए का मुख्य उद्देश्य क्या है
नागरिकता संशोधन कानून 2019 में अफगानिस्तान पाकिस्तान एवं बांग्लादेश से आए हिंदू सिख बौद्ध जैन पारसी और ईसाई धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के लिए नियम को आसान बनाया गया है आसान शब्दों में यह कानून गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाता है
3- अवैध प्रवासी कौन है
इस कानून के तहत उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में अवैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा की वजह आए हैं या फिर दस्तावेज के साथ आए हैं लेकिन उसमें उल्लेखित अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुके हुए हैं या रह रहे हैं वे व्यक्ति अवैध या दूसरे देश का माना जाएगा
4-
NRC एनसीआर क्या है
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर एक रजिस्टर है जिसमें विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों का रिकार्ड रखा जाएगा अभी तक सिर्फ असम में लागू हुआ है जिसमें 19 लाख लोगों को अवैध घोषित किया गया है
5-NRC
एनआरसी में शामिल ना होने वाले लोगों का क्या होगा
अगर कोई व्यक्ति कागजों की कमी से NRC एनआरसी में शामिल नहीं हो पाता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में ले जाया जाएगा जैसे कि असम में किया गया है ऐसे डिटेंशन सेंटर केंद्र देशभर में बनाए जा रहे हैं इसके बाद सरकार उन देशों से संपर्क करेगी जहां कि वह नागरिक हैं अगर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों को दूसरे देशों की सरकार मान लेती है तो ऐसे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा वे लोग अपनी जिंदगी डिटेंशन केंद्रों में गुजारनी पड़ेगी
6-
NRC एनआरसी में आदिवासियों की क्या कागज मांगे जाएंगे
भारत को वैध नागरिक साबित होने के लिए एक व्यक्ति के पास पासपोर्ट मतदाता पहचान पत्र राशन कार्ड आधार कार्ड जन्म प्रमाण पत्र शरणार्थी पंजीकरण एलआईसी पॉलिसी या सरकार द्वारा जारी अनुकूल दस्तावेज में से एक होना चाहिए
7-
NPR एनपीआर एवं NRC एनआरसी में क्या संबंध है
NPR एनपीआर को साल 2003 में वाजपेई सरकार ने नागरिकता अधिनियम में बदलाव करके लाया गया नागरिकता संशोधन अधिनियम 2003 के नियमों में यह साफ लिखा है कि एनपीआर के तहत हर एक परिवार और व्यक्ति के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी यह जानकारी की जांच एक सरकारी अधिकारी लोकल रजिस्ट्रार द्वारा की जाएगी दिए गए नियमों के अनुसार एनपीआर जांच का उपयोग एनसीआर एनआरसी करवाने के लिए किया जाएगा
8- क्या आदिवासी यह कागज प्रस्तुत करने में सक्षम हैं
भारत में लगभग 645 आदिवासी समुदाय हैं जिनमें से 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह PVTG है आदिवासियों में शिक्षा का स्तर बहुत कम है कई आदिवासी समूह जैसे अंडमान और निकोबार में जारवा जेनिटल और सॉन्ग पेन लद्दाख गुर्जर चांपा बाल्टी पूरी पास मध्यप्रदेश में बेगा उड़ीसा में बिरहोर एरिया कोड राजस्थान में सहरिया मणिपुर में नागा तमिलनाडु में कट्टू नायकन्न कोटा और और गुजरात में भी घसिया के पास एनआरसी के लिए दस्तावेज मिलना बहुत ही मुश्किल है
9- क्या पहले कभी आदिवासियों से कागज मांगे गए थे जिनको प्रस्तुत नहीं कर पाए
हां वन अधिकार अधिनियम 2006 में आदिवासियों को अपने अधिकार पाने के लिए कागज प्रस्तुत करने थी जिनमें सरकार द्वारा प्रदत मतदाता पहचान पत्र राशन कार्ड पासपोर्ट मांगी गए थे अधिवास प्रमाणपत्र भौतिक विशेषताएं और भूमि पर किए गए स्थाई सुधार और दस्तावेजों को अधिकृत किया एवं अपनों के लिए जरूरी साक्ष्य के रूप में मौखिक बयान लेखन में कमी की अनुमति दी थी दस्तावेज होने पर भी आदिवासियों के द्वारा किए गए 44 लाख दावे में से 19 लाख दावे खारिज कर दिए गए थे इस आधार पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 13 फरवरी 2019 को इन आदिवासियों को जंगल से बाहर निकालने के आदेश दिए थे जिस पर बाद में लिया गया पर अभी भी अधिकार नहीं दिए गए हैं
10-
उसका आदिवासियों पर क्या असर पड़ा
इन दावों की खारिज किए जाने से इन आदिवासियों की जल जंगल और जमीन पर अधिकार छीन लिए जाने इन आदिवासियों की और स्थानीय संस्कृति अधिकार भी नहीं रहेंगे
11- अगर आदिवासी NRCएनआरसी में कागज नहीं दे पाए तो उनके साथ क्या होगा
अगर आदिवासी NRC एनआरसी में कागज नहीं दिखा पाए तो सरकार इस देश के आदिवासियों से नागरिकता छीन सकती है इसके कारण इस देश के मूल निवासी अपने ही जन्मभूमि में अवैध प्रवासियों घुसपैठिए घोषित कर दिए जाएंगे देश से बाहर निकाल दिए जाएंगे
12-
CAA आदिवासियों की नागरिकता लेने में कैसे मदद करेगा
यदि आदिवासी अपनी नागरिकता चाहते हैं तो उनको खुद को अपने ही देश में घुसपैठ के घोषित करना पड़ेगा अवैध प्रवासी घोषित किए गए आदिवासी CAA के माध्यम से द्वितीय श्रेणी की नागरिकता पा सकेंगे जबकि वह इस देश के मूल निवासी हैं
13-
क्या इस देश का आदिवासी नागरिकता लेने के लिए कभी अपने आप को घुसपैठिया घोषित करेगा
इस देश के मूल निवासियों को यह कभी मंजूर नहीं होगा कि वह अपनी मातृभूमि में खुद को घुसपैठिया घोषित करें इस देश के मूल निवासी किसी भी हालात में अपने कागज नहीं दिखाएंगे
14- अगर आदिवासी अपने आपको घुसपैठिए घोषित करता है तो इसका क्या असर होगा
अगर आदिवासी नागरिकता पाने की अपने आप घोषित भी करता है तो फिर उनको यह दिखाना पड़ेगा कि वह CAA में उल्लेखित धर्मों में से किसी एक का अन्याई है आदिवासियों को धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर करेगा
15-
क्या इन्हें 6 धर्म को अपनाना आदिवासियों के लिए सही होगा
इस देश के आदिवासियों की अपनी अलग धार्मिक आस्था एवं विश्वास है तथा अलग-अलग जगह पर आदिवासी अनेक धर्म को मानने वाले हैं इस देश में आदिवासी किसी एक विशेष धर्म का पालन नहीं करते हैं बल्कि अनेक धर्म जैसी हिंदू मुस्लिम ईसाई बौद्ध आदि का पालन करते हैं साथ ही आज अधिकार अधिकतर आदिवासियों का यही मानना है कि वह किसी भी धर्म को नहीं मानते बल्कि उनकी स्थानीय धार्मिक आस्था है और मानव धर्म को मानते हैं जिसको आदि धर्म के नाम से भी जानते हैं अतः इसी आदिवासियों को नागरिकता देने की लालच में उनका धर्म परिवर्तन करने के लिए भी मजबूर करेगा
16-
क्या आदिवासी कभी अपना धर्म परिवर्तन स्वीकार करेगा
आदिवासियों की धार्मिक आस्था के अधिकार संविधान के द्वारा सुरक्षित किए गए हैं आदिवासी अपनी धार्मिक आस्था पर किसी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे कोई भी सरकार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन पर किसी भी धर्म को नहीं छोड़ सकती है
17-
इसका आदिवासियों की किन-किन अधिकारों पर प्रभाव पड़ेगा
अगर आदिवासी नागरिकता पाने के लिए अपना धर्म परिवर्तन कर कर लेते तो उनको मिले विशेष अधिकारों से वंचित कर दिया जाएगा इससे आदिवासियों के स्थानीय संसाधनों पर अधिकार सांस्कृतिक अधिकारों और आरक्षण के अधिकारों को खतरे में डाला जाएगा
18-
आदिवासियों के रिजर्वेशन पर क्या प्रभाव पड़ेगा
भारत का संविधान इस देश के मूल जनजातियों को आरक्षण देने का अधिकार देता है जो कि किसी घुसपैठिए के साथ साझा नहीं किया जा सकता क्योंकि वह इस देश में अवैध प्रवासी के रूप में आए हैं आदिवासी नागरिकता लेने के लिए अपने आप को घोषित करेगा उनको आरक्षण से हाथ धोना पड़ेगा
19-
संविधान में दिए गए अधिकारों का हनन होगा
इनके साथ ही आदिवासी अपने जमीन के अधिकार भी खो देंगे और उनके अधिकार का अस्तित्व पर हमला होगा आदिवासी सिर्फ घर ही नहीं होंगे बल्कि उनके संसाधनों पर सरकार एवं खनन कंपनियों का कब्जा आज पांचवी और छठी अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासियों ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार दिए गए हैं जो और एनआरसी लागू होने के बाद नजरअंदाज कर दिए जाएंगे आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार बढ़ेंगे और उनको हीन भावना से देखा जाएगा और एनआरसी आदिवासियों के अधिकारों को छीनने के लिए लाए गए उपकरण है
20-
क्या आदिवासियों को CAA और NRC एनआरसी से बाहर रखा जाएगा रखा गया है या विशेष छूट दी जाएगी
यह झूठ है कि आदिवासियों को CAA/NRC एनआरसी से बाहर रखा गया है चिंताओं को संबोधित नहीं करता है और केवल घोषणा करता है कि यह कानून छठी अनुसूची क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा धारा 6b-4 में लिखा है इस खंड में कुछ भी असम मेघालय मिजोरम त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्र पर लागू नहीं होगा क्योंकि संविधान की छठी अनुसूची में शामिल है और बंगाल पूर्वी सीमा क्षेत्र के तहत अधिसूचित के तहत आने वाला क्षेत्र शामिल है कानून के साथ भारत के बाकी हिस्सों में आदिवासियों की चिंताओं को दूर नहीं करता है जिसमें पांचवी अनुसूची राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लद्दाख अंडमान और निकोबार आदि शामिल हैं
21-
आदिवासी छठी अनुसूची और भीतरी रेखा परमिट के बाहर नहीं रहते हैं
यह कानून मात्र 10% आदिवासी जो उत्तर पूर्व के विशेष क्षेत्रों में रहते हैं बाहर रखा गया है परंतु शेष 90% आदिवासी जो उत्तर पूर्व लद्दाख से अंडमान और निकोबार तक रहते हैं 6 कानून राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे मध्य प्रदेश गुजरात राजस्थान महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ झारखंड उड़ीसा पश्चिम बंगाल आंध्र प्रदेश तेलंगाना कर्नाटक तमिलनाडु आदि में रह रहे आदिवासियों की स्थिति और अधिकार अधिकारों खतरे में डालने वाला कानून है
22-
क्या आदिवासियों को CAA और
NRC एनआरसी का विरोध करना चाहिए
भारत का संविधान किस देश के सभी नागरिकों को अधिकार देने एवं को सुरक्षित करने का एकमात्र दस्तावेज है CAA और NRC कानून भारत के संविधान पर हमला है जिसका विरोध करना हर नागरिक का कर्तव्य है CAA और NRC आदिवासियों को प्रभावित करता है इसलिए इस अधिनियम को उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है स्पष्ट शब्दों में आदिवासियों को इस कानून का हर संभव तरीके से विरोध करना चाहिए
23-CAA
और NRC का विरोध आदिवासी किस प्रकार कर सकते हैं
आदिवासी हमेशा अन्याय अत्याचार लड़ते रहे हैं और अपनी लड़ाई की मिसाल कायम की है भारत की आजादी की पहली लड़ाई भी सिंधु कान्हू मुरमू भाइयों के नेतृत्व में 1855 मैं संथाल विद्रोह की शुरू की गई इसी श्रेणी में भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व वाली क्रांति आदिवासियों का त्याग और बलिदान का इस देश के इतिहास में अद्वितीय स्थान है आज भी हम सभी आदिवासियों कानूनों के खिलाफ घर से बाहर निकल कर विरोध करने की आवश्यकता है इनके खिलाफ सही आदमी वासियों को अहिंसात्मक रूप से एकजुट होकर विरोध करने की जरूरत है
दोस्तों इस देश के मूल निवासियों को एसटी एससी ओबीसी अल्पसंख्यक माइनॉरिटी के पढ़े-लिखे लोग जो इस देश की सिस्टम व्यवस्था को समझते हैं अपने घर परिवार में जो कम पढ़े लिखे हैं उनको इन सब की जानकारी बताएं और उन्हें सचेत रहने का सलाह दें

No comments:
Post a Comment
you have any dauts, Please info me know