आज बहुत उँचाई नापने की ख्वाहिशें पनप रही हैं, मगर
अपनो से ही मात खा जाते हैं मन बहुत चंचल है ठहरने का नाम ही नहीं लेता वह तो
आजमाईश में लगा रहता है, हो सकता है हम मंजिल तक पहुँच जाएं, लेकिन
असल जरुरत पूरी नहीं कर सकते क्योंकि आज का मायावी षड्यंत्र हर राह पर कंकड़ और
काँटे बिछाये रखे हैं, क्यों हम उन जालिमों पर भरोशा कर जाते
हैं जो सीधे निगाह से हमारी गरीबी भी नहीं देख सकते भले ही कुछ पल के लिए आपके
हितैषी बन जाएं वो मगर आपकी विकास नहीं देख सकते, फिर कैसी उनकी
मेहरवानी हम पर की वो आज भी हमारे उसुलों पर राज करते रहें, अभी
ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है, कहते हैं जब जागो तभी सबेरा कल सायद
नहीं समझा था मगर आज कुछ तो सीख ही गया क्या सच और क्या झूठ इतना तो फर्क कर ही
सकता हुँ औए आप मुझसे भी ज्यादा ज्ञान वान हैं अपने आत्म बल से अंदर झाँक कर तो
देख लीजिए बहुत कुछ भरा हुआ है उसे निकाल कर इस अंधकार भरे जीवन को समर्पित कर
दीजिये ।
जयस महापंचायत
28 फरवरी 2020
दिनेश श्याम प्रभारी अनूपपुर

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